SMS हॉस्पिटल में सीनियर डॉक्टरों का प्रशासनिक पदों से मोहभंग, कई ने छोड़ी HOD की कुर्सी
नेफ्रोलॉजी से गैस्ट्रोएंटरोलॉजी तक कई विभागों में बदलाव
SMS मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में हाल के दिनों में कई विभागों के वरिष्ठ डॉक्टरों ने प्रशासनिक पदों पर बने रहने में अनिच्छा जताई है। नेफ्रोलॉजी विभाग के पूर्व HOD डॉ. विनय मल्होत्रा ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद पर बने रहने की इच्छा नहीं जताई। उनके दो कार्यकाल पूरे हो चुके थे। इसके बाद डॉ. संजीव शर्मा को विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसी तरह गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रूपेश कुमार पोखरणा ने भी अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद HOD पद पर आगे काम नहीं करने की इच्छा जताई है।
न्यूरोसर्जरी और बायोकेमेस्ट्री विभाग में भी बदले हालात
न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अचल शर्मा ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए VRS ले लिया। बताया गया है कि उनकी सेवानिवृत्ति में अभी करीब तीन साल बाकी थे। वहीं बायोकेमेस्ट्री विभाग की पूर्व HOD ने भी अपना पद छोड़ दिया है। मेडिसिन विभाग के डॉ. सुधीर मेहता भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS ले चुके हैं।इन घटनाओं के बाद अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्य परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
SMS से जुड़े 12 अस्पतालों के अधीक्षकों की मांगी जानकारी
SMS मेडिकल कॉलेज से कुल 12 अस्पताल जुड़े हुए हैं। इनमें स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जनाना अस्पताल, महिला चिकित्सालय, कांवटिया अस्पताल और जेके लोन अस्पताल सहित अन्य संस्थान शामिल हैं।
चिकित्सा विभाग ने इन अस्पतालों के अधीक्षकों के कार्यकाल की जानकारी मांगी थी। बताया गया है कि जिन अधिकारियों का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनकी जानकारी विभाग को भेज दी गई है। ऐसे में आने वाले समय में कुछ अस्पतालों के अधीक्षकों में बदलाव हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।
डॉक्टरों पर प्रशासनिक दबाव भी बना चर्चा का विषय
मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों को चिकित्सा सेवाओं के साथ पढ़ाई, रिसर्च और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में लंबे समय तक कई तरह की जिम्मेदारियां संभालना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
जेएईएफ की ओर से भी इस मुद्दे पर चिंता जताई गई है। संगठन का कहना है कि मेडिकल टीचर्स पर चिकित्सा और शिक्षा के अलावा प्रशासनिक कार्यों का दबाव भी रहता है।
कई बार किसी घटना के लिए सीधे मेडिकल टीचर्स को जिम्मेदार मानकर कार्रवाई की जाती है। ऐसी परिस्थितियों से डॉक्टरों में असंतोष पैदा हो सकता है। संगठन ने मेडिकल शिक्षकों के कामकाज के माहौल और प्रशासनिक दबाव पर ध्यान देने की जरूरत बताई है।
SMS मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने क्या कहा?
SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार, कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर आगे नहीं रहने की इच्छा जताई है। उन्होंने बताया कि अटैच अस्पतालों के अधीक्षकों के कार्यकाल की जानकारी भी चिकित्सा विभाग ने मांगी थी, जिसे संबंधित विभाग को भेज दिया गया है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
SMS हॉस्पिटल राजस्थान का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है। यहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में वरिष्ठ डॉक्टरों के प्रशासनिक पद छोड़ने और VRS लेने की घटनाएं अस्पताल के प्रबंधन, विभागीय नेतृत्व और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी हैं। डॉक्टरों पर बढ़ते कार्यभार और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
आगे क्या?
अब चिकित्सा विभाग की ओर से अस्पतालों के अधीक्षकों के कार्यकाल और संभावित बदलावों को लेकर निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही यह देखना होगा कि वरिष्ठ डॉक्टरों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्यभार को लेकर उठ रहे मुद्दों पर विभाग क्या कदम उठाता है।