सोडाला जेडीए अतिक्रमण विरोध तीसरे दिन भी जारी: जेडीए की अर्थी निकाली, 160 फीट चौड़ीकरण पर सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक 160 फीट सड़क चौड़ी करने की कार्रवाई चल रही है।
- बताया जा रहा है कि 200 से ज्यादा मकान और दुकानें जद में आ सकती हैं।
- जेडीए के अनुसार हाईकोर्ट के निर्देश पर डिमार्केशन हुआ और 210 नोटिस दिए गए।
- सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की याचिका खारिज कर दी है।
- लोगों ने जेडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और दिवाली तक की मोहलत मांगी है।
सोडाला जेडीए अतिक्रमण विरोध तीसरे दिन भी जारी रहा। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोग और महिलाएं सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर विरोध जताया। उन्होंने जेडीए के नाम की अर्थी भी निकाली।
न्यू सांगानेर रोड अतिक्रमण कार्रवाई सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक चल रही है। यहां 160 फीट सड़क चौड़ी करनी है। प्रदर्शन से सोडाला और न्यू सांगानेर रोड पर यातायात प्रभावित हुआ।
सोडाला जेडीए अतिक्रमण विरोध में क्या हुआ?
सुबह से ही स्थानीय लोग सड़क पर जमा होने लगे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई रोकने की मांग की। लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय घर और दुकान तोड़ने से कई परिवारों पर संकट आएगा। प्रदर्शन के चलते सोडाला और न्यू सांगानेर रोड पर यातायात प्रभावित हुआ।स्थानीय व्यापारियों ने दिवाली तक की मोहलत देने की भी मांग की है। सवाल यह है कि लोग आखिर किस बात पर सबसे ज्यादा सवाल उठा रहे हैं?
जेडीए की अर्थी निकाली सोडाला में, क्या है नाराजगी?
जेडीए की अर्थी निकाली सोडाला में, इसे प्रदर्शनकारियों ने अपना आक्रोश जताने का तरीका बताया। न्यू सांगानेर रोड व्यापार मंडल के महामंत्री पंकज शर्मा के अनुसार विरोध डिमार्केशन को लेकर भी है। डिमार्केशन यानी सड़क की सीमा तय कर निशान लगाना। पंकज शर्मा का कहना है कि व्यापारी समझ नहीं पा रहे कि सड़क चौड़ीकरण का आधार क्या है।
गूगल कोऑर्डिनेट लाल निशान जेडीए पर क्या आरोप है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जेडीए ने पहले डिवाइडर को सड़क का मध्य बिंदु मानने की बात कही थी। तब कहा गया था कि दोनों तरफ बराबर कार्रवाई होगी।
लोगों का दावा है कि मौके पर निशान लगाते समय गूगल कोऑर्डिनेट के आधार पर चौड़ाई अलग-अलग नापी गई। इससे एक तरफ ज्यादा और दूसरी तरफ कम हिस्से में लाल निशान लगे। गूगल कोऑर्डिनेट यानी नक्शे पर किसी जगह की लोकेशन बताने वाले अंक। यह आरोप स्थानीय लोगों का है। इस पर जेडीए का जवाब सोर्स में नहीं है।
स्थानीय निवासी मनोज कुमावत ने कहा कि उन्हें जेडीए में दूसरा नक्शा दिखाया गया था। उनके अनुसार टीम ने निशान अलग लगाए। उन्होंने कहा कि सालों पुराने प्रतिष्ठानों को अतिक्रमण बताया जा रहा है।
मेट्रो स्टेशन परिसर छोड़ने पर क्यों उठे सवाल?
विवेक विहार और श्याम नगर मेट्रो स्टेशन परिसरों को लेकर भी स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक ही रोड एलाइनमेंट पर बने ये मेट्रो ढांचे कार्रवाई से अलग रखे गए हैं। रोड एलाइनमेंट यानी सड़क की तय सीधी रेखा। उनका आरोप है कि इसी बीच निजी संपत्तियों पर लाल निशान लगाए जा रहे हैं। इससे जेडीए की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
पट्टे और मोहलत पर क्या कह रहे हैं लोग?
व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि उनके पास वर्षों पुराने पट्टे और दस्तावेज हैं। इसके बावजूद संपत्तियां अतिक्रमण में गिनी जा रही हैं। पट्टा यानी जमीन के उपयोग का कानूनी दस्तावेज।
संजय शर्मा ने कहा कि उनके पास 1979 का सोसायटी पट्टा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपत्ति के बाद क्या निस्तारण हुआ, यह कोई बताने को तैयार नहीं है। व्यापारी विजय मोदी ने दीपावली तक की मोहलत मांगी है। उनका कहना है कि आनन-फानन में कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है।
अर्चना बालोदिया ने दावा किया कि सिर्फ 6 दिन के नोटिस पर कार्रवाई हो रही है। बलजीत कौर ने आरोप लगाया कि न मुआवजा मिल रहा है, न दुकान के बदले दुकान। ये सभी स्थानीय लोगों के आरोप हैं। प्रदर्शनकारी महिला पूनम शर्मा ने भी जेडीए पर आरोप लगाए। लोगों का यह भी कहना है कि अब उन्हें जनप्रतिनिधियों का साथ नहीं मिल रहा।
जेडीए 210 नोटिस न्यू सांगानेर रोड पर क्या कह रहा है?
जेडीए प्रवर्तन शाखा के पुलिस उपाधीक्षक इस्लाम खान के अनुसार हाईकोर्ट के निर्देश पर डिमार्केशन हुआ। नोटिस दिए गए और पीटी सर्वे भी करवाया गया।जेडीए 210 नोटिस न्यू सांगानेर रोड पर दे चुका है। इनमें मकान, दुकान, शोरूम, दीवारें और रैंप जैसे सभी तरह के अतिक्रमण शामिल हैं। इन्हें हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
अब तक कितना हिस्सा खाली हुआ, आगे क्या?
जेडीए ने 5 अक्टूबर से न्यू सांगानेर रोड पर कार्रवाई शुरू की। पहले चरण में सड़क के दोनों ओर करीब 700 मीटर हिस्से से अतिक्रमण हटाया गया। अब बाकी करीब 1.7 किलोमीटर हिस्से में कार्रवाई की तैयारी है।
जेडीए के मुताबिक अभी नगर निगम से जुड़ी 124 आपत्तियां लंबित हैं। इनमें करीब 100 आपत्तियां नगर निगम के क्षेत्राधिकार की बताई जा रही हैं। जेडीए ने इनके निस्तारण के लिए हाईकोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगा है।
मामले में करीब दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होनी है। इसके बावजूद जेडीए ने 9 अक्टूबर से आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जेडीए ने 6 अक्टूबर को हाईकोर्ट में कार्रवाई की पालना रिपोर्ट भी पेश की थी।
सुप्रीम कोर्ट व्यापारियों की याचिका खारिज, नगर निगम ने क्या कहा?
न्यू सांगानेर रोड के प्रभावित व्यापारी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद जेडीए की कार्रवाई का रास्ता साफ माना जा रहा है।
नगर निगम सिविल लाइन्स जोन के उपायुक्त मनोहर लाल जाट के अनुसार जानकारी में आने के बाद टीम बनाई गई है। दस्तावेजों का मिलान भी हो रहा है। अशोक नगर में निगम ने कुछ पट्टे जारी किए हैं। संख्या टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही बताई जाएगी। अब नजर इस पर रहेगी कि जेडीए 9 अक्टूबर से आगे की कार्रवाई कैसे करता है और प्रदर्शनकारियों की मोहलत की मांग पर क्या फैसला होता है।
यह खबर क्यों जरूरी है:
सड़क चौड़ीकरण का असर सीधे लोगों के घर और रोजगार पर पड़ता है। 200 से ज्यादा मकान और दुकानें जद में आने की बात कही जा रही है। हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रही कार्रवाई और लोगों के दस्तावेजों के दावे आमने-सामने हैं। त्योहार से पहले कार्रवाई होने से परिवारों की चिंता बढ़ी है। यह मामला शहर के विकास और प्रभावित लोगों के अधिकारों के संतुलन का सवाल उठाता है।