सोनिया की किताब पर रार, गहलोत का केंद्र पर निशाना, RSS को कहा नक्सली सोच
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रकाशन विवाद:PMO के दबाव में पेंग्विन का इनकार।
- अंश हटाने से मना:सोनिया गांधी का सेंसरशिप से साफ इनकार।
- नए पब्लिशर्स की होड़:कई बड़े प्रकाशन समूह आए आगे।
- RSS पर पलटवार: NAC को दिमागी नक्सल बताने पर भड़के गहलोत।
सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक के भारतीय संस्करण के प्रकाशन पर रोक और RSS के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर में नेशनल एडवाइजरी कमेटी (NAC) को लेकर छपे लेख पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार तथा संघ पर जमकर निशाना साधा है। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने प्रकाशन रोकने को पीएमओ के दबाव का नतीजा बताया और आरएसएस को नक्सली सोच वाला करार दिया।
पेंग्विन इंडिया के फैसले पर उठाए सवाल
गहलोत ने कहा कि 10 नवंबर को रिलीज होने वाली इस पुस्तक का पूरा देश इंतजार कर रहा था। पेंग्विन की वैश्विक पैरेंट कंपनी इसे पूरी दुनिया में छापने के लिए तैयार है, लेकिन पेंग्विन इंडिया ने अचानक पैर खींच लिए। गहलोत का आरोप है कि किताब में चीन, पीएम नरेंद्र मोदी और आरएसएस से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणियां होने के कारण केंद्र सरकार का भारी दबाव था। पब्लिशर ने सोनिया गांधी से कुछ अंश हटाने को कहा था, लेकिन उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया। गहलोत ने इसे संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) पर प्रहार बताया।
अन्य पब्लिशर्स ने की पेशकश
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पेंग्विन के इनकार के बाद देश की कई प्रतिष्ठित पब्लिशिंग कंपनियों ने आगे आकर सोनिया गांधी को पुस्तक छापने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, भारत में प्रकाशन किस माध्यम से होगा, इसका अंतिम फैसला सोनिया गांधी खुद करेंगी। गहलोत ने सोनिया गांधी के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन की सराहना करते हुए कहा कि उनके कृतित्व और भारतीय संस्कृति को अपनाने के अंदाज की तारीफ पक्ष और विपक्ष दोनों करते हैं।
ऑर्गेनाइजर और RSS पर पटलवार
आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर द्वारा यूपीए शासनकाल की नेशनल एडवाइजरी कमेटी (NAC) को दिमागी नक्सल बताए जाने पर गहलोत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वालों की अपनी सोच ही नक्सली है। ये वे लोग हैं जिन्होंने आजादी के बाद संविधान का विरोध कर मनुस्मृति की वकालत की थी।
गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली NAC ने देश को राइट टू एजुकेशन (RTE), राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) और फूड सिक्योरिटी एक्ट (खाद्य सुरक्षा कानून) जैसे ऐतिहासिक अधिकार दिए। इस अधिकार-आधारित ढांचे (Rights-based approach) ने देश में सोशल सिक्योरिटी के एक नए युग की शुरुआत की, जिससे प्रेरणा लेकर राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है।
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