राजस्थान में पहली बार: गर्भवती महिलाओं की जांचें करना सीखेंगी ANM, उदयपुर से लागू होगा मॉड्यूल
ऑनलाइन होगी मॉनिटरिंग
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO – Chief Medical and Health Officer) द्वितीय डॉ. एम.एस. राठौड़ के अनुसार गर्भवती महिलाओं की जांच और एएनएम के प्रशिक्षण की स्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। आरसीएचओ (RCHO – Reproductive and Child Health Officer) डॉ. राकेश गुप्ता इसकी सीधी मॉनिटरिंग करेंगे।
प्रशिक्षण पूरा होने पर संबंधित अस्पताल के प्रभारी अधिकृत प्रमाणपत्र जारी करेंगे। इसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। विभाग इसके लिए एक समर्पित पोर्टल तैयार कर रहा है। इससे प्रशिक्षित एएनएम का रिकॉर्ड हमेशा उपलब्ध रहेगा।
राज्य का पहला जिला बनेगा उदयपुर
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद एएनएम फील्ड में उपलब्ध जांच किट का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगी। ऑनलाइन मॉनिटरिंग और प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रखने वाला यह मॉड्यूल लागू करने वाला उदयपुर राजस्थान का पहला जिला बनेगा।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA – Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan) के तहत हर महीने की 9, 18 और 27 तारीख को गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है। इन जांचों के जरिए गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन किया जाता है।
लैब टेक्नीशियन की कमी से जांच प्रभावित
कई बार स्वास्थ्य केंद्रों पर लैब टेक्नीशियन की अनुपलब्धता के कारण जांच प्रभावित हो जाती है। ऐसे में चिकित्सा विभाग ने एएनएम को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। इससे वे उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल कर सकेंगी।
यह प्रशिक्षण सीएमएचओ प्रथम और द्वितीय के क्षेत्र में आने वाली एएनएम को चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य जांच की प्रक्रिया में उनकी दक्षता बढ़ाना है। साथ ही फील्ड स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।
सितंबर में 14,592 महिलाओं की जांच
जिले में पीएमएसएमए के तहत सितंबर महीने में एएनएम ने 14,592 गर्भवती महिलाओं की जांच की। यह आंकड़ा बताता है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में एएनएम की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
ऐसे में जांच की प्रक्रिया में व्यावहारिक दक्षता बढ़ने से रिपोर्ट की सटीकता और विश्वसनीयता बेहतर करने में मदद मिलेगी। इससे गर्भवती महिलाओं को समय पर जरूरी जांच उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
कौन-कौन सी जांच सीखेंगी?
प्रशिक्षण के दौरान एएनएम को यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट और हीमोग्लोबिन जांच का अभ्यास कराया जाएगा। इसके अलावा ब्लड प्रेशर मापन और वजन मापन भी सिखाया जाएगा। एएनएम लंबाई मापन और ब्लड शुगर टेस्ट भी सीखेंगी।
इसके अलावा यूरिन में एल्बुमिन और शुगर की जांच का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एचआईवी (HIV – Human Immunodeficiency Virus) स्क्रीनिंग और वीडीआरएल (VDRL – Venereal Disease Research Laboratory) जांच का अभ्यास भी कराया जाएगा। इन जांचों के लिए एएनएम के पास किट उपलब्ध रहती है।
प्रशिक्षण के बाद वे अस्पताल के अलावा फील्ड और घर-घर जाकर भी इन जांचों को अधिक दक्षता से कर सकेंगी। इस पहल का महत्व केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभाग का प्रयास है कि एएनएम अपनी जांच किट का इस्तेमाल आत्मविश्वास और दक्षता के साथ कर सकें।