श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय मासूम के साथ दरिंदगी: 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप हुए तय

Mukesh Sharma | Oct 10, 2026, 19:09 IST
श्रीगंगानगर पोक्सो केस
श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के मामले में 22 आरोपियों पर आरोप तय हुए हैं। विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की है। पुलिस के अनुसार लड़की को होटल में लाया गया था, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस मामले में चार आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

श्रीगंगानगर में 13 साल की नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के चर्चित मामले में अदालत ने अहम कदम उठाया है। पोक्सो मामलों की स्पेशल कोर्ट नंबर एक ने 22 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। इनमें तीन होटलों से जुड़े लोग और 15 ग्राहक शामिल हैं। अब इन सभी के खिलाफ ट्रायल शुरू होगा।



22 आरोपियों पर आरोप तय

मामले में स्पेशल पीपी (PP – Public Prosecutor) एडवोकेट मनोहरलाल पंवार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्पेशल जज योगेश जोशी ने आरोप तय किए हैं। आरोपियों पर पोक्सो (POCSO – Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट और दूसरी धाराओं में आरोप तय हुए हैं। ये आरोपी तीन होटलों, होटल जॉय इन, होटल सफायर और होटल ड्रीम से जुड़े मामले के हैं।



आरोपियों में होटल संचालक, मैनेजर और ई-रिक्शा चालक शामिल हैं। 15 ग्राहक भी इस सूची में हैं। यह Sri Ganganagar POCSO case अब ट्रायल के चरण में पहुंच गया है।



अब होगा ट्रायल

आरोप तय होने का मतलब है कि अदालत को प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने लायक आधार मिला है। अब गवाहों और सबूतों के आधार पर ट्रायल चलेगा। अंतिम फैसला सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा।



चार आरोपी फरार

मामले में चार आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इनमें होटल ड्रीम का संचालक राकेश कुमार नायक शामिल है। सूरज नाम का आरोपी भी फरार है। आरोप है कि उसने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। दो और युवक भी फरार बताए गए हैं।



सवाल यह है कि इतने चर्चित मामले में चार आरोपी अब तक पकड़ से बाहर कैसे हैं?



कैसे शुरू हुआ मामला

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून को बच्ची अपनी एक सहेली से मिलने गई थी। घर लौटने में देर हुई और परिवार से उसका संपर्क टूट गया। परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।



पुलिस के अनुसार उसी रात बच्ची श्रीगंगानगर पहुंची। वह घर जाने के लिए एक ई-रिक्शा में बैठी। आरोप है कि चालक रामबाबू उसे घर पहुंचाने की जगह एक होटल संचालक को सौंप आया। बदले में उसने पैसे लिए।



इसके बाद कई दिनों तक बच्ची को अलग-अलग होटलों में ले जाया गया। पुलिस जांच में उसके साथ कई लोगों द्वारा यौन शोषण के आरोप सामने आए।



भरोसे की एक सवारी, और एक बच्ची की जिंदगी बदल गई।



मानव तस्करी और संगठित अपराध

जांच में यह नाबालिग से दुष्कर्म मामला संगठित अपराध से भी जुड़ा निकला। पुलिस ने इसे मानव तस्करी का मामला भी माना है। आरोप है कि होटल संचालकों और मैनेजरों की इसमें सीधी भूमिका थी।



सोशल मीडिया की तस्वीरों से मिला सुराग

पुलिस के मुताबिक एक होटल मैनेजर ने बच्ची की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाली थीं। इन्हीं तस्वीरों से पुलिस को सुराग मिला। इसके बाद 22 जून को पुलिस ने बच्ची को होटल जॉय इन से बरामद किया।



पीड़िता की पहचान गोपनीय

कानून के मुताबिक पोक्सो मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसलिए बच्ची से जुड़ी कोई पहचान वाली जानकारी इस खबर में नहीं दी गई है। अगर आपको किसी बच्चे के शोषण की जानकारी मिले, तो चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या पुलिस हेल्पलाइन 112 पर तुरंत सूचना दें।



तीन होटलों पर बुलडोजर

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। 1 जुलाई को संयुक्त टीम ने तीनों होटलों पर बुलडोजर चलाया। होटल जॉय इन, होटल सफायर और होटल ड्रीम के खिलाफ यह कार्रवाई हुई।



100 होटलों में मिली खामियां

इसके बाद प्रशासन ने शहर के हर होटल की जांच कराई। जांच में 100 होटलों में अलग-अलग तरह की खामियां मिलीं। नगर परिषद ने तीन होटलों को सीज भी किया। क्या शहर के होटलों की निगरानी पहले से सख्त होती, तो यह घटना रुक सकती थी?



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