श्रीगंगानगर बॉर्डर पर ड्रोन से RDX की ड्रॉपिंग, हैंडलर कुलवंत की तलाश तेज; एटीएस की निगरानी में जुटाए जा रहे सबूत
राजस्थान के श्रीगंगानगर बॉर्डर पर पाकिस्तानी ड्रोन के जरिए RDX, हथियार और कारतूस गिराने के मामले में जांच एजेंसियों को नए सुराग मिले हैं। 12 अक्टूबर की रात हुई ड्रॉपिंग में तीसरे पैकेट में 7.750 किलो RDX होने की जानकारी सामने आई है। जांच के मुताबिक, पंजाब का हैंडलर कुलवंत ड्रॉपिंग से पहले ही इस पैकेट के बारे में जानता था। उसने कथित तौर पर कैरियर सुखविंदर को मैसेज भेजकर तीसरे पैकेट को सावधानी से खोलने के लिए कहा था। राजस्थान एटीएस और पंजाब पुलिस अब कुलवंत की तलाश कर रही हैं।
एक रात में तीन बार हुई हथियारों की ड्रॉपिंग
जांच के मुताबिक, 12 अक्टूबर को रात 9 बजकर 14 मिनट पर खानूवाली पोस्ट से करीब एक किलोमीटर दूर चक 5 केएनएम इलाके में तीन बार ड्रॉपिंग हुई थी। इन पैकेटों से तुर्की निर्मित दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और 867 कारतूस बरामद होने की जानकारी दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियार कहां पहुंचाए जाने थे और इनके इस्तेमाल की क्या योजना थी।
तीसरे पैकेट में मिला 7.750 किलो RDX
मामले में सबसे अहम बात तीसरे पैकेट की पैकिंग को लेकर सामने आई है। शुरुआती दो पैकेटों की पैकिंग सामान्य थी, जबकि तीसरे पैकेट को खोलने के लिए बीएसएफ की टीम को कई बार कट लगाने पड़े। जांच में सामने आया कि सफेद रंग के इस पैकेट में 7.750 किलो RDX था। एजेंसियां पैकेट की पैकिंग और ड्रॉपिंग के तरीके से जुड़े सबूतों की जांच कर रही हैं।
ड्रॉपिंग से पहले कुलवंत ने भेजा था मैसेज
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान के कथित सप्लायर अली चाचा से संपर्क रखने वाले पंजाब के हैंडलर कुलवंत को ड्रॉपिंग की जानकारी पहले से थी। आरोप है कि उसने कैरियर सुखविंदर को तीसरे पैकेट को सावधानी से खोलने का संदेश दिया था। एजेंसियां इस मैसेज, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रोन से भेजे गए सामान की जानकारी किन लोगों के पास थी।
हथियार किस वारदात में इस्तेमाल होने थे, जांच जारी
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और 867 कारतूस किसके लिए मंगवाए गए थे। एक आशंका यह है कि कुलवंत को ये हथियार किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने थे, जबकि दूसरे पहलू के तहत उसके खुद किसी वारदात में शामिल होने की संभावना की भी जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ड्रॉपिंग के समय कुलवंत की लोकेशन पंजाब के मोगा में थी।
एटीएस की निगरानी में जुटाए जा रहे सबूत
मामले की जांच राजस्थान एटीएस के डीआईजी राममूर्ति जोशी की निगरानी में चल रही है। एजेंसी केस से जुड़े सबूत जुटाने और अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने में लगी है। एटीएस और पंजाब पुलिस कुलवंत को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हथियारों और विस्फोटक की खेप भेजने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और उनका नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है।
ग्रेनेड हमले के वांटेड सुखविंदर से कनेक्शन की जांच
एटीएस पंजाब के जलालाबाद सिटी थाने में 12 सितंबर की रात हुए ग्रेनेड हमले के मामले में वांटेड सुखविंदर से संभावित मिलीभगत के सबूत भी जुटा रही है। जांच में तीन सवाल अहम माने जा रहे हैं कि रघु ने सुखविंदर को अपने दोस्त बज्जू के घर पर किसके कहने पर रुकवाया, कुलवंत से संपर्क करने के लिए मोबाइल किसने और क्यों दिया तथा रेकी के लिए कार किसने उपलब्ध कराई। इन सवालों के जवाब मिलने से कथित नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
आगे क्या?
अब राजस्थान एटीएस और पंजाब पुलिस की जांच का मुख्य फोकस हैंडलर कुलवंत की गिरफ्तारी, मोबाइल और डिजिटल सबूतों की जांच तथा हथियारों और RDX की खेप के अंतिम गंतव्य का पता लगाना है। एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि इस मामले का जलालाबाद ग्रेनेड हमले से कोई संबंध है या नहीं। कुलवंत की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद हथियारों की सप्लाई चेन और कथित नेटवर्क को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।