श्रीगंगानगर बॉर्डर पर RDX ड्रॉपिंग: 20 साल का कुलवंत निकला हैंडलर, 2 साल में 10 केस
भारत-पाकिस्तान के श्रीगंगानगर बॉर्डर पर 12 अक्टूबर को पाकिस्तानी ड्रोन से RDX और हथियार गिराए जाने के मामले में जांच एजेंसियों को अहम जानकारी मिली है। जांच के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे सप्लायर अली चाचा से डील करने वाला हैंडलर कुलवंत सिंह महज 20 साल का है। वह दसवीं तक पढ़ा है और कम उम्र में ही तस्करी के नेटवर्क से जुड़ गया। उसके खिलाफ पंजाब के आठ थानों में दो साल के भीतर 10 केस दर्ज हुए हैं।
जेल से छूटने के 45 दिन बाद की डील
कुलवंत सिंह 27 अगस्त 2026 को बठिंडा सेंट्रल जेल से बाहर आया था। इसके करीब 45 दिन बाद उसने कथित तौर पर पाकिस्तानी सप्लायर से RDX और हथियारों की डील की। 12 अक्टूबर को श्रीगंगानगर बॉर्डर पर ड्रॉपिंग हुई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और हथियारों व विस्फोटक की खेप किसके लिए मंगाई गई थी।
ग्रेनेड हमले के आरोपी से पहले से संपर्क
जांच के अनुसार, कुलवंत सिंह का संपर्क सुखविंदर से पहले से था। सुखविंदर पंजाब के जलालाबाद सिटी थाने में 12 सितंबर की रात हुए ग्रेनेड हमले के मामले में वांछित है। बताया गया है कि श्रीगंगानगर में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के मुखबिर रघु के संपर्क में आने के बाद सुखविंदर को मोबाइल मिला और उसने कुलवंत से डील को लेकर बातचीत शुरू की। सुखविंदर और लखविंदर फिलहाल ATS की हिरासत में हैं।
जेल में भी मोबाइल से नेटवर्क चलाने का आरोप
कुलवंत सिंह करीब दो साल तीन महीने फरीदकोट सेंट्रल जेल में बंद रहा। इस दौरान उसके पास से तीन बार मोबाइल फोन बरामद हुए। जेल प्रशासन ने इस संबंध में फरीदकोट सिटी थाने में तीन मुकदमे दर्ज करवाए थे। बार-बार मोबाइल मिलने के बाद उसे बठिंडा सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया, जहां से वह जमानत पर बाहर आया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि जेल में रहते हुए भी वह मोबाइल के जरिए अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था।
पंजाब पुलिस और ATS की टीमें तलाश में जुटीं
मामले की जांच के लिए ATS ने श्रीगंगानगर में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। डीआईजी राममूर्ति जोशी समेत तीन अधिकारी वहां मौजूद हैं, जबकि बीकानेर यूनिट पहले से जांच में जुटी है। पंजाब पुलिस भी कुलवंत की तलाश में अलग-अलग जगह दबिश दे रही है। जानकारी के मुताबिक, ड्रॉपिंग वाले दिन उसकी लोकेशन मोगा में थी। इसके बाद से वह लगातार ठिकाने बदल रहा है और बातचीत के लिए कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता रहा है।
ड्रग्स तस्कर ने RDX क्यों मंगाया?
जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ड्रग्स तस्करी के मामलों में आरोपी कुलवंत ने इस बार हेरोइन के बजाय RDX और हथियार क्यों मंगवाए। उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत सात मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। ANTF के अनुसार, शुरुआती आशंका हेरोइन की ड्रॉपिंग की थी, लेकिन बरामदगी से मामले की गंभीरता बढ़ गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक का इस्तेमाल खुद किया जाना था या इसे किसी आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाना था।
आगे क्या?
जांच एजेंसियां कुलवंत सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही हैं। उसके पकड़े जाने के बाद ही RDX की डिलीवरी के अंतिम ठिकाने, संभावित इस्तेमाल और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल एजेंसियां कुलवंत के संपर्कों, मोबाइल नंबरों और जेल में रहते हुए कथित गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।