बॉर्डर एरिया में फर्जी आर्मी की ड्रेस, 1000 मीटर कपड़ा जब्त
समझें क्या है पूरा मामला
- श्रीगंगानगर में नकली सैन्य कपड़े का नेटवर्क पकड़ा।
- सेना और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 1000 मीटर कपड़ा जब्त।
- वर्दी जैसे पैटर्न वाले कपड़े की अवैध बिक्री का खुलासा।
- बरेली से मिले सुराग के बाद हुआ बड़ा एक्शन।
- सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुटीं।
श्रीगंगानगर जिले में एक बड़ा नेटवर्क पकड़ में आया है। भारतीय सेना की खुफिया इकाइयों और राजस्थान पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की। यह कार्रवाई सेना की वर्दी जैसे दिखने वाले नकली कॉम्बैट कपड़े के खिलाफ हुई। संयुक्त अभियान में करीब 1,000 मीटर बिना अनुमति वाला सैन्य पैटर्न कपड़ा जब्त किया गया।
यह पूरा मामला सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही हैं।
बरेली से मिला था पहला सुराग
इस मामले की जड़ें उत्तर प्रदेश के बरेली से जुड़ी हैं। इस साल जून में बरेली में नकली सैन्य कॉम्बैट कपड़ा पकड़ा गया था। उस समय जांच एक अहम मोड़ पर पहुंची। पता चला कि इस कपड़े का स्रोत राजस्थान के श्रीगंगानगर से जुड़ा हुआ है।
इसके बाद भारतीय सेना की खुफिया टीम सक्रिय हो गई। टीम ने श्रीगंगानगर में गोपनीय तरीके से जांच शुरू की। इस जांच में एक स्थानीय फर्म की भूमिका सामने आई।
कैसे फैला था नकली कपड़े का कारोबार
जांच में सामने आया कि यह फर्म कई इलाकों में नकली कपड़ा पहुंचा रही थी। आरोप है कि फर्म श्रीगंगानगर शहर तक यह कपड़ा पहुंचाती थी। लालगढ़ जट्टान और सूरतगढ़ के बाजार भी इसमें शामिल थे। आसपास के अन्य बाजारों की दुकानों तक भी यह कपड़ा पहुंच रहा था।
सेना ने पुलिस को सौंपी रिपोर्ट
जांच का अगला बड़ा कदम जुलाई में उठा। सेना ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट जुलाई के मध्य में राजस्थान पुलिस को सौंप दी। इसके बाद दोनों एजेंसियों ने मिलकर आगे की रणनीति बनाई।
30 जुलाई को सेना और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान जिले की कई दुकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। तलाशी में बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ। करीब 1,000 मीटर नए पैटर्न का नकली सैन्य कॉम्बैट कपड़ा जब्त किया गया। यह कपड़ा बिना किसी अनुमति के रखा गया था।
क्यों है यह सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता भी बताई है। सेना की वर्दी जैसे पैटर्न वाला कपड़ा बिना अनुमति रखना कानूनन अपराध है। इसे बेचना या इस्तेमाल करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
इसका एक बड़ा खतरा भी है। ऐसे कपड़ों का गलत इस्तेमाल कर कोई भी व्यक्ति खुद को सेना का जवान बता सकता है। इससे सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। यही वजह है कि इस तरह के मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है।
जांच अभी भी जारी
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली सैन्य वर्दी का यह कारोबार कितने बड़े स्तर पर चल रहा था। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
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