सब इंस्पेक्टर भर्ती 2016 पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- 50 फीसदी आरक्षण सीमा का सख्ती से पालन करे सरकार
अदालत ने कहा है कि सार्वजनिक सेवाओं में आरक्षण लागू करते समय 50 फीसदी की कानूनी सीमा और एससी-एसटी श्रेणी की बैकलॉग रिक्तियों के नियमों का सख्ती से पालन होना बेहद अनिवार्य है।
आरक्षण सीमा का उल्लंघन और याचिकाकर्ताओं की दलील
मामले की सुनवाई श्याम सिंह व अन्य की याचिकाओं पर हुई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने तथ्य रखे कि आरपीएससी द्वारा 5 अक्टूबर 2016 को जारी मूल विज्ञापन और उसके बाद 2018 व 2019 में किए गए संशोधनों में कानूनी खामियां थीं।
गैर-अनुसूचित क्षेत्र (Non-TSP) के कुल 456 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए केवल 142 पद ही रखे गए थे, जिससे अनारक्षित श्रेणी का कोटा 50% के कानूनी अनुपात से काफी नीचे गिर गया। इसके अलावा, बैकलॉग पदों का स्पष्ट ब्योरा नहीं था और ओबीसी (OBC) श्रेणी की रिक्तियों को बिना किसी वैध कानूनी प्रावधान के आगे (Carry-forward) बढ़ा दिया गया था।
राज्य सरकार और आरपीएससी ने अदालत में अतिरिक्त शपथपत्रों के जरिए वर्षवार रिक्तियों का हवाला देकर इस प्रशासनिक फैसले को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे नाकाफी माना।
90 दिन में नई सूची और 180 दिन में पूरी प्रक्रिया
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मूल विज्ञापनों और शुद्धिपत्रों में श्रेणीवार पदों के निर्धारण का कोई पुख्ता कानूनी आधार मौजूद नहीं था। कोर्ट ने निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- 90 दिनों में पदों का पुनर्गठन: आरपीएससी और संबंधित विभाग 50% आरक्षण सीमा के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए 90 दिनों के भीतर पदों की नए सिरे से पुनर्गणना करेंगे। संशोधित जानकारी कार्मिक विभाग (DOP) और RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
- संशोधित मेरिट और कैडर आवंटन: 1 सितंबर 2020 को घोषित परिणाम के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति नई संशोधित मेरिट लिस्ट के अनुसार तय होगी। इसी के आधार पर नया रोस्टर, कैडर आवंटन और वरिष्ठता (Seniority) सूची बनेगी।
- 180 दिनों की समयसीमा: इस पूरी चयन और पुनरीक्षण प्रक्रिया को 6 महीने (180 दिन) के भीतर हर हाल में पूरा करना होगा।
कार्यरत अभ्यर्थियों को सुरक्षा और अतिरिक्त पद सृजन की छूट
हाई कोर्ट ने भर्ती विवाद में शामिल अभ्यर्थियों के हितों का विशेष ध्यान रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि पहले से नियुक्त और कार्यरत किसी भी चयनित अभ्यर्थी को उनकी सेवा से हटाया नहीं जाएगा।
इसके साथ ही, सामान्य और अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों (Meritorious Candidates) के हितों से समझौता न हो, इसके लिए राज्य सरकार को आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में नए और अतिरिक्त पद सृजित (Create Extra Posts) करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।
FAQs
- राजस्थान हाई कोर्ट ने सब इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर भर्ती 2016 परीक्षा पर क्या फैसला सुनाया है?
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को भर्ती में पदों का श्रेणीवार नए सिरे से निर्धारण और पुनर्गणना करने का निर्देश दिया है। - 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन करने पर राजस्थान हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 50% आरक्षण सीमा का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है, और इसके तहत पदों की पुनर्गणना 90 दिनों में की जाएगी। - भर्ती प्रक्रिया में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए हाई कोर्ट के क्या निर्देश हैं?
हाई कोर्ट ने कहा है कि पहले से कार्यरत किसी भी चयनित अभ्यर्थी को उनकी सेवा से नहीं हटाया जाएगा और नए पद सृजन की छूट भी दी गई है।