सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में 300 कर्मचारियों पर लटकी नौकरी की तलवार, यह है वजह

Purshottam Kumar Joshi | Feb 09, 2026, 14:19 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में 300 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने पर विवाद शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन कार्मिकों को हटा कर ठेका प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। इससे कर्मचारियों ने आंदोलन की धमकी दी है।

News In Short

  • मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में 300 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है, जो पिछले 25 सालों से विश्वविद्यालय में सेवा दे रहे हैं।
  • विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों को बाहर करने के लिए ठेका प्रणाली लागू करने का फैसला किया है, जो कर्मचारियों का विरोध कर रहे हैं।
  • कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका प्रणाली से उनका शोषण बढ़ेगा और पारदर्शिता में कमी आएगी।
  • राज्य सरकार ने पहले ही कर्मचारियों की सेवा 2025 तक जारी रखने का आदेश दिया था, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने दरकिनार कर दिया।
  • कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है, यदि प्रशासन अपनी नीति पर अडिग रहता है।

News in Detail

राजस्थान में उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब 300 कर्मचारियों को बाहर करने का मन बना लिया है। यह कर्मचारी स्व वित्त पोषित सलाहकार मंडल में 25 वर्षों से कार्यरत है। इस फैसले के बाद कार्मिकों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।



ठेका प्रथा पर विवाद

हैरानी की बात यह है कि जिस ठेका प्रथा का विश्वविद्यालय प्रशासन पहले विरोध करता था, अब उसी को लागू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि उच्च दबाव के कारण प्रशासन ने पुराने, अनुभवी कर्मचारियों की बजाय एजेंसी के माध्यम से मैनपावर जुटाने का निर्णय लिया है।



कर्मचारियों का आरोप

सुखाड़िया यूनिवर्सिटी कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष, नारायण लाल सालवी का कहना है कि ठेका प्रणाली के लागू होने से कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप पारदर्शिता खत्म हो जाएगी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना है कि अगर प्रशासन वाकई कर्मचारियों के भविष्य के बारे में चिंता करता, तो वह कोई संतुलित समाधान निकालता, न कि उन्हें बाहर करने का रास्ता ढूंढ़ता।



कमेटी का गठन और विवाद

कुलपति की मंजूरी से इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इसमें कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि यह कमेटी उन लोगों द्वारा बनाई गई है, जिन्होंने पहले उनका समर्थन किया था, लेकिन अब वे उनके विरोध में खड़े हैं।



कर्मचारियों का गुस्सा और आंदोलन की संभावना

एसएफएबी कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे इस निर्णय को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि जब सरकारी आदेश पहले से ही उनके पक्ष में हैं, तो प्रशासन ठेका प्रणाली क्यों लागू करना चाहता है। इसके कारण अब कर्मचारी विश्वविद्यालय परिसर में बड़ा आंदोलन की चेतावनी दे रहे है।



कर्मचारियों की लंबे समय से सेवा

यह कर्मचारी पिछले 25 वर्षों से मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में सेवा दे रहे हैं। अब उन्हें बाहर निकालने की योजना से वे गहरे सदमे में हैं। उनका कहना है कि उन्होने विश्वविद्यालय की नींव बनाने में योगदान दिया है और अब प्रशासन उनका शोषण करने का प्रयास कर रहा है।



सरकारी आदेश और ठेका प्रणाली

एक साल पहले राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों की सेवा जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक जारी रखने का आदेश दिया था, लेकिन प्रशासन ने इस आदेश को नजरअंदाज कर दिया। कर्मचारियों को केवल दो महीने का सेवा विस्तार दिया गया और इसके बाद उनकी भर्ती परीक्षा आयोजित की गई। कर्मचारियों को स्थाई नौकरी की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें ठेका प्रणाली का विकल्प दिया गया।



क्यों गलत है ठेका प्रणाली?

कर्मचारियों का मानना है कि ठेका प्रणाली से उनका शोषण बढ़ेगा, काम में पारदर्शिता खत्म होगी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। वे मांग कर रहे हैं कि प्रशासन स्थाई समाधान निकाले और उनके भविष्य को सुरक्षित करे।



आंदोलन की संभावना

कर्मचारियों का यह भी कहना है कि अगर प्रशासन अपनी नीति पर अडिग रहा, तो वे विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। उनकी मांग है कि ठेका प्रणाली लागू करने से पहले कर्मचारियों से बातचीत की जाए।



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