जोजरी नदी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 100 मीटर के दायरे में लगी निर्माण पर रोक
समझें क्या है पूरा मामला
- जोजरी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ।
- नदी किनारे 100 मीटर तक निर्माण पर रोक लगाई।
- 500 मीटर क्षेत्र में प्रदूषणकारी उद्योगों पर पाबंदी।
- वैज्ञानिक सीमांकन तक अंतरिम सुरक्षा क्षेत्र रहेगा लागू।
- कोर्ट ने नदी पारिस्थितिकी बचाने पर जताई चिंता।
राजस्थान में जल संकट और नदियों में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को जोजरी नदी प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने नदी किनारे 100 मीटर में हर तरह के निर्माण पर रोक लगा दी। 500 मीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर भी पाबंदी लगाई गई है। यह प्रतिबंध वैज्ञानिक सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेगा।
नदी किनारे निर्माण पर पूरी रोक
सोमवार को जोजरी नदी प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नदी किनारों के संरक्षण के लिए अंतरिम आदेश जारी किया। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दिया।
पीठ ने जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण या विकास गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है।
500 मीटर के दायरे में उद्योगों पर भी पाबंदी
कोर्ट ने पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक और अहम निर्देश दिया है। नदी के मौजूदा प्रवाह पथ या चिन्हित फ्लड लाइन के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में कोई भी खतरनाक या प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट के मुताबिक यह प्रतिबंध उन गतिविधियों पर भी लागू होगा जो नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह पाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक हाई फ्लड लाइन और जरूरी पारिस्थितिक बफर जोन तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
पारिस्थितिकी तंत्र को लेकर जताई गहरी चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक हाई फ्लड लाइन और बफर जोन का वैज्ञानिक सीमांकन पूरा नहीं होता, तब तक नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए एक निश्चित और मापने योग्य अंतरिम सुरक्षा क्षेत्र लागू करना जरूरी है।
कोर्ट का मानना है कि बिना ऐसे अस्थायी संरक्षण क्षेत्र के नदी को और नुकसान होने का खतरा बना रहेगा। यही वजह है कि वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी होने तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
पहले भी सख्त रहा है कोर्ट का रुख
जोजरी नदी प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहा है। बीते दिनों भी कोर्ट राजस्थान सरकार को जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में दशकों से जारी औद्योगिक प्रदूषण रोकने में नाकामी पर फटकार लगा चुका है। कोर्ट ने पहले कहा था कि जोधपुर, पाली और बालोतरा के करीब 20 लाख लोग अब भी दूषित पानी की समस्या झेल रहे हैं।
इससे पहले कोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2022 के उस आदेश पर भी सुनवाई कर चुका है, जिसमें रीको (RIICO) और संबंधित नगर निकायों पर जुर्माना लगाया गया था। कोर्ट कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स यानी सीईटीपी की खराब हालत पर भी पहले नाराजगी जता चुका है, क्योंकि कई उद्योग इन प्लांट्स को बाइपास कर सीधे प्रदूषित पानी नदी में छोड़ते पाए गए थे।
आगे क्या
फिलहाल नदी किनारे निर्माण और उद्योग गतिविधियों पर लगी यह रोक अंतरिम है। हाई फ्लड लाइन और बफर जोन के वैज्ञानिक निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे का स्थायी फैसला आएगा।
इस बीच स्थानीय प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों के लिए कोर्ट के इस आदेश का पालन करना अनिवार्य होगा। मामले पर आगे की सुनवाई और कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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