सुप्रीम कोर्ट की चंबल और केन नदी में रेत खनन पर चिंता, तीन राज्यों को हलफनामा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल और केन नदी के तल से रेत निकालने पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि नदी तल से रेत खनन भविष्य के लिए विनाशकारी है। इससे नदी का बहाव प्रभावित होता है। कोर्ट ने मामले पर सीईसी से विशेष रिपोर्ट मांगी है। साथ ही मप्र, राजस्थान और यूपी सरकार को भी दो सप्ताह में हलफनामा देने को कहा है।
नदी तल से रेत खनन क्यों है खतरनाक?
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक नदी तल से रेत खनन भविष्य के लिए विनाशकारी है। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित होता है। नदी के इकोसिस्टम (पानी, जीव-जंतु और पौधों का पूरा प्राकृतिक तंत्र) पर भी खराब असर पड़ता है। कोर्ट की चिंता सिर्फ चंबल तक सीमित नहीं। केन नदी में रेत खनन का भी कोर्ट ने इसी सुनवाई में संज्ञान लिया है। दोनों नदियों के तल से रेत निकालने पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है।
नदी तल पर मांगी गई CEC रिपोर्ट
कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC–Central Empowered Committee) से विशेष रिपोर्ट मांगी है। यह सीईसी रिपोर्ट नदी तल से रेत खनन पर आधारित होगी। समिति को रिपोर्ट में इस विषय पर अलग से अपनी बात रखनी होगी। कोर्ट का सवाल है कि संरक्षित इलाके में अवैध खनन आखिर रुक क्यों नहीं रहा? सीईसी की रिपोर्ट से इस बात की तस्वीर साफ हो जाएगी।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य पर मंडराया खतरा
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा। मामला राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन का है। इससे संकटग्रस्त जलीय जीवों पर खतरा बढ़ रहा है।चंबल में अवैध रेत खनन इस पूरी सुनवाई का मूल मुद्दा है। चंबल अवैध रेत खनन को लेकर कोर्ट पहले भी राज्यों को निर्देश जारी कर चुका। अब उन्हीं निर्देशों के पालन का हिसाब मांगा गया है।
5400 वर्ग किमी में फैला है चंबल घड़ियाल अभयारण्य
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फैला है। इसका क्षेत्रफल 5400 वर्ग किलोमीटर है। यह दिल्ली के कुल क्षेत्रफल से साढ़े तीन गुना से भी ज्यादा है। यहां वे घड़ियाल मिलते है, जो दुर्लभ हैं या जिनकी संख्या बहुत कम हो चुकी। रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल भी यहां रहता है। गंगा डॉल्फिन भी इसी इलाके में मिलती है।
2 सप्ताह में सरकारों को देने होंगे जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से अनुपालन हलफनामा मांगा है। अनुपालन हलफनामा यानी आदेश के पालन का लिखित शपथ पत्र। इसके लिए तीनों राज्यों को दो सप्ताह का समय मिला है। राज्यों को बताना होगा कि कोर्ट के निर्देशों पर कितना अमल हुआ। इसमें अभयारण्य की सुरक्षा से जुड़े कदम शामिल होंगे। अवैध खनन रोकने के लिए की गई कार्रवाई भी बतानी होगी।
प्रतापगढ़ रेंजर का मामला भी उठा
सुनवाई में राजस्थान के प्रतापगढ़ का मामला भी उठा। वहां अवैध खनन रोकने पर फॉरेस्ट रेंजर को डंपर से कुचलने का मामला है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में अवैध रेत ले जाने वाले वाहन चल रहे हैं।
FAQs
- सुप्रीम कोर्ट ने चंबल रेत खनन पर क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने CEC से नदी तल से रेत खनन पर विशेष रिपोर्ट मांगी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को दो सप्ताह में अनुपालन हलफनामा देना होगा। - राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य कितना बड़ा है?
अभयारण्य करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में आता है। - चंबल अभयारण्य में कौन से दुर्लभ जीव मिलते हैं?
यहां घड़ियाल, रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल और गंगा डॉल्फिन मिलते हैं। अवैध रेत खनन से इन पर खतरा बढ़ रहा है।