सूरत में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: कपड़ा मिलों से छुड़ाए 91 बच्चे, अधिकतर राजस्थान के रहने वाले
News In Short
- गुजरात में सूरत की तीन कपड़ा मिलों से 91 बच्चों को मुक्त कराया।
- इनमें से 86 बच्चे राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं।
- मुक्त कराए गए बच्चों में सबसे छोटा बच्चा मात्र 7 वर्ष का है।
- रेस्क्यू ऑपरेशन गायत्री सेवा संस्थान के प्रयासों से हुआ संभव।
- बच्चों को पिकनिक के बहाने लालच देकर सूरत लाया गया था।
News In Detail
गुजरात में सूरत के कपड़ा उद्योग में चल रहे बड़े बाल श्रम नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस और प्रशासन ने एक संयुक्त अभियान में कपड़ा मिलों से 91 बच्चों को सुरक्षित छुड़ाया है। इनमें 86 बच्चे राजस्थान के उदयपुर संभाग के हैं। यह कार्रवाई शहर की तीन अलग-अलग टेक्सटाइल यूनिट में की गई। इन बच्चों में सबसे छोटा बच्चा मात्र 7 वर्ष का है।
कैसे हुआ ऑपरेशन?
यह रेस्क्यू ऑपरेशन गायत्री सेवा संस्थान (GSS) द्वारा एक महीने तक की गई मैपिंग और जांच के बाद संभव हुआ। संस्था ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को इसकी सूचना दी। इसके बाद राजस्थान और गुजरात की पुलिस ने मिलकर छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान पहले एक यूनिट से बच्चों को छुड़ाया गया, जिन्होंने अधिकारियों को उन अन्य ठिकानों के बारे में बताया जहां बच्चों को छिपाकर रखा गया था। हालांकि, छापेमारी के दौरान कुछ तस्कर और नियोक्ता भागने में सफल रहे।
बाहर से लगा दिया जाता था ताला
जांच में खुलासा हुआ कि बच्चों को काम के दौरान बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया जाता था। बच्चों को सुबह जल्दी काम पर लाया जाता था और यूनिट को बाहर से ताला लगा दिया जाता था ताकि किसी को शक न हो। ताला शाम 7 बजे के बाद ही खुलता था।
छापेमारी के समय एक 8 साल का बच्चा बिना शर्ट के खड़ा था और डर के मारे अन्य बच्चों के पीछे छिपकर अधिकारियों से शर्ट मांग रहा था। बच्चों को बेहद तंग जगहों पर रखा जाता था, जहां एक छोटे से कमरे में 12 से 15 बच्चे रहने को मजबूर थे।
धोखाधड़ी और तस्करी का जाल
हैरानी की बात यह है कि कई मामलों में माता-पिता को पता था कि उनके बच्चे काम के लिए भेजे गए हैं। कुछ बच्चों को पिकनिक के बहाने लालच देकर सूरत लाया गया था। तस्करों ने मुख्य रूप से राजस्थान के आर्थिक रूप से पिछड़े जनजातीय क्षेत्रों को निशाना बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बच्चे पिछले 3-4 सालों से इन इकाइयों में काम कर रहे थे।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क कितना गहरा और संगठित है।
सभी रेस्क्यू किए गए बच्चों को सूरत की बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया है। उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
कुल रेस्क्यू: 91 बच्चे (उम्र 7 से 14 वर्ष)।
मूल निवास: 86 बच्चे राजस्थान के (मुख्यतः उदयपुर संभाग के जनजातीय क्षेत्र), शेष उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से।
कार्य स्थिति: 12-15 घंटे काम, बाहर से ताला बंद कमरे, और अमानवीय रहन-सहन।
शामिल एजेंसियां: NCPCR, मानव तस्करी विरोधी इकाई (AHTU), राजस्थान और सूरत पुलिस, और स्वयंसेवी संस्थाएं (AVA और GSS)।
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