सेहत के साथ खिलवाड़: मिठाई के साथ लोग खा रहे हैं धीमा जहर, चांदी के वर्क में 99% एल्युमिनियम-कैडमियम
दीवाली और अन्य त्योहारी सीजन में मिठाइयों, पान और माउथ फ्रेशनर की शोभा बढ़ाने वाला चांदी और सोने का वर्क आपकी सेहत के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। राजस्थान में चांदी के वर्क की सालाना मांग 30 से 40 टन है, जबकि शुद्ध चांदी का वर्क केवल डेढ़ टन ही सप्लाई हो रहा है। इसका मतलब है कि बाजार में बिकने वाला 96 से 97% वर्क नकली और मिलावटी वर्क है।
जयपुर की दो सरकारी और एडवांस लैब में कराए गए सैंपल परीक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसमें चांदी के वर्क में एल्युमिनियम, कैडमियम और 85% तक लोहा मिलने की पुष्टि हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एलएमबी (LMB) के मालिक अजय अग्रवाल सहित प्रतिष्ठित मिठाई कारोबारियों ने राज्य सरकार से खाद्य पदार्थों पर इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
कीमत में भारी अंतर और मिलावट का खेल
व्यापारी एलविश गुप्ता के अनुसार, प्रदेश में शुद्ध चांदी के वर्क का सालाना कारोबार 30 से 35 करोड़ रुपए का है। सवा पांच गुना सवा इंच आकार के एक शुद्ध चांदी के वर्क की कीमत करीब 10 रुपए आती है, जबकि नकली वर्क बाजार में महज एक रुपए में मिल जाता है।
लागत को कम करने के लिए मिलावटखोर एल्युमिनियम और अन्य जहरीली धातुओं का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। जयपुर हलवाई समिति के अध्यक्ष राजेंद्र रावत का कहना है कि लोग चंद रुपयों की बचत के लिए ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
लैब जांच में सामने आए डरावने आंकड़े
मीडिया रिपोर्ट्स और लैब जांच के अनुसार चार प्रमुख सैंपल फेल पाए गए:
- चांदी का पहला सैंपल: इसमें 1% भी चांदी नहीं मिली, बल्कि 99% शुद्ध एल्युमिनियम और कैडमियम पाया गया।
- चांदी का दूसरा सैंपल: इसमें मात्र 14.82% चांदी और 85.17% खतरनाक आयरन (लोहा) मिला।
- सोने के दोनों सैंपल: सोने के नाम पर बेचे जा रहे वर्क में 87% से 88% तक तांबा और जिंक की मिलावट पाई गई।
FSSAI के कड़े नियम, लेकिन धज्जियां उड़ रही हैं
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI – Food Safety and Standards Authority of India) के नियमों के मुताबिक, चांदी के वर्क का वजन अधिकतम 2.8 ग्राम प्रति वर्ग मीटर होना चाहिए और इसकी शुद्धता 99.9% अनिवार्य है। नियमों में स्पष्ट है कि इसमें एल्युमिनियम, लेड (अधिकतम सीमा 10 पीपीएम) और कैडमियम (अधिकतम सीमा 2 पीपीएम) की मात्रा तय मानकों से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
इसके अलावा, वर्क बनाने में पशुओं की आंतों के इस्तेमाल पर रोक है और केवल शाकाहारी तरीकों को ही फूड माना गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इन नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
सेहत के लिए कितना खतरनाक है मिलावटी वर्क?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो लंबे समय तक ऐसे मिलावटी और जहरीली धातुओं युक्त वर्क का सेवन करने से शरीर के अंदरूनी अंगों पर बुरा असर पड़ता है। इससे लीवर और किडनी खराब होने, अंगों के कार्य करना बंद करने और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।