व्हीलचेयर पर बैठकर पढ़ाते हैं, अंदाज है फिल्मी हीरो जैसा, क्लास को बनाते हैं कूल
समझें क्या है पूरा मामला
- व्हीलचेयर से नहीं रुका तपस्वी शर्मा का हौसला।
- सेरेब्रल पाल्सी के बावजूद बने असिस्टेंट प्रोफेसर।
- पहले प्रयास में क्लियर किया NET-JRF एग्जाम।
- फिल्मी डायलॉग से पढ़ाते हैं पॉलिटिकल साइंस।
- तपस्वी ने लिखी सेरेब्रल पाल्सी पर किताब।
तपस्वी शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज, सांगानेर में पॉलिटिकल साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्हें जन्म से सेरेब्रल पाल्सी है और व्हीलचेयर उनकी जिंदगी का हिस्सा है। इसके बावजूद उन्होंने पहले ही प्रयास में नेट-जेआरएफ क्लियर किया। वे फिल्मी डायलॉग से क्लास को दिलचस्प बनाते हैं। उन्होंने सेरेब्रल पाल्सी पर एक किताब भी लिखी है।
तपस्वी शर्मा व्हीलचेयर पर क्लास में जरुर जाते हैं लेकिन क्लास में पढ़ाने का उनका अंदाज सबसे अलग है। अगर कोई छात्र तनाव में दिखे, तो वे फिल्मी डायलॉग से माहौल हल्का कर देते हैं। इसी अंदाज में वे पॉलिटिक्स के चैप्टर से भी उसे जोड़ देते हैं।
फिल्मी डायलॉग से जगाते हैं रुचि
तपस्वी 'धुरंधर' के अंदाज में कहते हैं- 'अगर तुम्हारे पटाखे खत्म हो गए हों तो मैं धमाके शुरू करूं...।' यह सुनते ही पूरी क्लास ठहाकों से गूंज उठती है।
फिर वे 'हेराफेरी' का मशहूर डायलॉग भी बोलते हैं- 'क्या गुंडा बनेगा रे तू...।' छात्रों का कहना है कि सर की क्लास में कभी बोरियत महसूस नहीं होती।
शरीर की लिमिट है, ब्रेन की नहीं
तपस्वी ने अपने अनुभवों पर 'अनबीटेबल, सेलिब्रेटिंग लाइफ विद सेरेब्रल पाल्सी' नाम से एक किताब भी लिखी है। इसमें उन्होंने अपनी जिंदगी के संघर्ष को साझा किया है।
वे बताते हैं कि वे ट्विन्स हैं। उनके बड़े भाई फुटबॉलर रहे हैं और अभी हैदराबाद में बैंक अधिकारी हैं। उनके पिता सचिवालय में डिप्टी सेक्रेटरी रहे और मां स्कूल में लेक्चरर हैं।
तपस्वी कहते हैं कि उन्होंने बचपन से संघर्ष देखा है, लेकिन हारना कभी नहीं सीखा। उन्होंने पहले ही प्रयास में नेट-जेआरएफ (National Eligibility Test – Junior Research Fellowship) और असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा क्लियर कर ली।
छात्रों का साथ, कभी नहीं ली छुट्टी
कॉलेज में जरूरत पड़ने पर छात्र खुद उनकी व्हीलचेयर उठाकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा देते हैं। तपस्वी कभी छुट्टी नहीं लेते।
वे अपने छात्रों से अक्सर कहते हैं- 'शरीर की लिमिट है, ब्रेन की नहीं।' यह वाक्य उनकी पूरी जिंदगी की सोच को दर्शाता है।
अपनी जिंदगी का मंत्र भी वे फिल्मी अंदाज में बताते हैं- 'मेरी जिंदगी का तंबू तीन बंबू पर टिका है, मेरा सब्जेक्ट, मूवी और क्रिकेट।' यही तीन चीजें उनकी जिंदगी को आगे बढ़ाती हैं।
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