फिर हजारों छात्र लौट रहे कोटा, कोचिंग संस्थानों के लिए यह आपदा में अवसर जैसा, जानें पूरी कहानी
Kota: उत्तर भारत इस समय लू की भयंकर चपेट में है, लेकिन कोटा के रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन से उतरे 25 साल के वैभव और उसके भाई विकास के चेहरों पर जो पसीना था, वह सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि उनके भविष्य पर अचानक टूटे अनिश्चितता के बादलों की घबराहट थी।
दोनों भाई जिस ट्रेन से उतरे थे, उसमें पैर रखने तक की जगह नहीं थी। एसी (AC) डिब्बों के टिकट तो बहुत दूर की बात, जनरल बोगी में भी तिल रखने की जगह नहीं थी। लेकिन वैभव और विकास के पास इंतजार करने का कोई वक्त नहीं था। उन्हें किसी भी हाल में राजस्थान के कोचिंग हब कोटा पहुंचना था।
यह कहानी सिर्फ वैभव या विकास की नहीं है। यह देश के उन लाखों मेडिकल उम्मीदवारों (NEET-UG एस्पिरेंट्स) की दास्तां है, जिन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा पेपर लीक के बाद 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द होने पर फिर कोटा के चक्रव्यूह में धकेल दिया गया है।
अगले महीने 21 जून को होने वाली री-नीट (Re-NEET) परीक्षा के लिए देश भर से हताश, थके और भावनात्मक रूप से टूटे छात्र एक बार फिर कोटा की तंग गलियों और हॉस्टलों की तरफ रुख कर रहे हैं।
जब खुशियां पेपर लीक की भेंट चढ़ गईं
अभी कुछ ही दिन पहले की बात है, जब 3 मई की परीक्षा देकर हजारों छात्र अपने-अपने घरों को लौटे थे। कई महीनों, यहां तक कि सालों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने चैन की सांस ली थी। माता-पिता खुश थे कि उनके बच्चों की तपस्या पूरी हुई।
वैभव के लिए यह उनका आठवां प्रयास था। आठ साल की असफलताओं, रातों की नींद हराम करने और समाज के तानों को झेलने के बाद इस साल वैभव को लगा था कि उन्होंने जंग जीत ली है।
वे कहते हैं, मैंने परीक्षा के बाद अपने नंबरों का मिलान किया था।
मुझे पूरा भरोसा था कि इस बार मुझे मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाएगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही एनटीए (NTA) ने प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता सबूतों के बाद परीक्षा रद्द करने और 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-NEET) कराने का एलान किया, इन छात्रों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
घर पर मिली कुछ दिनों की राहत पल भर में एक बुरे सपने में बदल गई। जिन किताबों को छात्रों ने अलमारियों में बंद कर दिया था, उन्हें रोते हुए वापस निकालना पड़ा।
कोटा में हॉस्टलों का बढ़ता किराया
घर से कोटा लौटने की यह यात्रा न सिर्फ मानसिक रूप से दर्दनाक है, बल्कि छात्रों के परिवारों पर बड़ी आर्थिक मार भी है। री-नीट की घोषणा होते ही कोटा का पूरा इकोसिस्टम, जो कुछ दिनों के लिए शांत पड़ गया था, अचानक से फिर सक्रिय हो गया है। लेकिन इस सक्रियता के साथ ही छात्रों के शोषण का एक नया दौर भी शुरू हो गया है।
विकास ने कोटा पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, कोटा में कदम रखते ही सबसे बड़ी चुनौती रहने की जगह ढूंढना है। यहां हॉस्टलों और कमरों के दाम आसमान छूने लगे हैं। परीक्षा रद्द होने से पहले जो कमरा हमें 10,000 रुपए प्रति माह में मिल रहा था, अब उसी कमरे के लिए सीधे 15,000 रुपए मांग रहे हैं।
एक तरफ भीषण गर्मी, दूसरी तरफ पढ़ाई का दोबारा दबाव और ऊपर से चंद दिनों के भीतर किराए में 50% की यह बेतहाशा बढ़ोतरी-गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रही है। लेकिन इन सबके बावजूद छात्र अपनी मजबूरी के कारण इसे सहने को तैयार हैं।
विकास के मुताबिक, उनके गांवों में न तो ढंग का इंटरनेट है, न ही टेस्ट सीरीज़ की सुविधा और न ही पढ़ाई का वह माहौल जो कोटा में मिलता है। इसलिए भारी खर्च के बावजूद उन्हें यहां लौटना ही पड़ा।
कोचिंग इंडस्ट्री की इमरजेंसी तैयारी: 99 रुपये का 'विक्ट्री बैच' और मुफ्त योजनाएं
कोटा की मल्टी अरब डॉलर की कोचिंग इंडस्ट्री ने भी संकट के इस समय को एक नए अवसर और अपनी साख बचाने के माध्यम के रूप में देखा है। जैसे ही री-नीट का फैसला आया, कोटा के प्रमुख कोचिंग संस्थानों ने छात्रों को वापस खींचने और उन्हें इमरजेंसी तैयारी कराने के लिए अपनी रणनीतियों को री-ऑर्गनाइज़ करना शुरू कर दिया।
यहां के कोचिंग संस्थान इस मौके को आपदा में अवसर के रूप में ले रहे हैं। एक बड़े कोचिंग संस्थान के पदाधिकारी के अनुसार इस समय छात्रों को जिन तीन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है, वे हैं - टेस्ट पेपर्स, निरंतर अभ्यास और लेक्चर का तत्काल रिवीजन। हमारा संस्थान इसके लिए यूट्यूब (YouTube) पर दैनिक लाइव रिवीजन कक्षाएं आयोजित करेगा। मुफ्त अभ्यास सामग्री देगा, अपने ऐप के माध्यम से छात्रों के कमजोर चैप्टरों की पहचान करके उनके लिए कस्टमाइज्ड स्टडी प्लान तैयार करेगा।
इस पदाधिकारी का अनुमान है कि उनके करीब 6,000 से 6,500 छात्रों में से 40 से 50 प्रतिशत छात्र फिजिकल क्लास के लिए कोटा लौट रहे हैं, जहां उनके लिए दैनिक सत्र, शंका समाधान और व्यक्तिगत होमवर्क की व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने माना कि शिक्षक, माता-पिता और छात्र - सभी इस समय अत्यधिक मानसिक तनाव में हैं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
दूसरी ओर, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड ने री-नीट के उम्मीदवारों के लिए महज 99 रुपए की मामूली फीस पर विक्ट्री बैच शुरू करने की घोषणा की है। वहीं, जो छात्र पहले से उनके यहां नामांकित (Enrolled) थे, उनके लिए यह कार्यक्रम पूरी तरह से मुफ्त कर दिया गया है। 16 मई से इस विशेष बैच की कक्षाएं देश भर के केंद्रों में शुरू भी हो चुकी हैं।
इसी तरह, प्रमुख एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्स वाला (Physics Wallah) ने भी मैदान में उतरते हुए मिशन 30 नीट 2026 (Mission 30 NEET 2026) लॉन्च किया है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फिजिक्स वाला ने 'PW प्रेरणा' नाम से वन-टू-वन इमोशनल वेलबीइंग सपोर्ट (भावनात्मक कल्याण सहायता) और ऑफलाइन केंद्रों पर हेल्पडेस्क की शुरुआत की है, ताकि तनाव से जूझ रहे छात्रों को काउंसलर्स का सहारा मिल सके।
इस पूरी कवायद पर कोटा के एक अन्य प्रमुख कोचिंग संस्थान के प्रमुख ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बड़ी कोचिंग कंपनियों के लिए इस तरह के मुफ्त या बेहद सस्ते क्रैश कोर्स चलाना व्यावसायिक रूप से बहुत मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा, रणनीतिक रूप से देखा जाए तो बड़े कोचिंग सेंटरों के लिए यह काफी किफायती है।
इसका एक कारण साख और गुडविल भी है। संस्थान समझते हैं कि छात्र परीक्षा रद्द होने के बाद जबरदस्त भावनात्मक तनाव में हैं। इसके अलावा कोचिंग सेंटरों के पास पहले से ही बड़े पैमाने पर काम करने वाले सिस्टम मौजूद हैं, इसलिए वे इसे आसानी से संभाल सकते हैं।
सीबीआई (CBI) जांच की आंच
एक तरफ जहाँ छात्र अपनी जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा की दोबारा तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथों इस पेपर लीक घोटाले की परतों को खोलने वाले कई चौंकाने वाले सुराग लगे हैं।
सीबीआई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजस्थान के दूसरे कोचिंग हब सीकर से शुरु हुए पेपर लीक मामले के पीछे संगठित नेक्सस सामने आ रहा है। इस मामले में मनीषा वाघमारे नाम की एक महिला का नाम प्रमुखता से उभरा है, जो पेशे से पुणे में एक ब्यूटीशियन है। जांच एजेंसी के अनुसार, मनीषा इस पूरे खेल की एक कॉमन लिंक (मुख्य कड़ी) साबित हुई है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, मनीषा वाघमारे ही वह शख्स थी जो प्रतिष्ठित स्कूलों के शिक्षकों और मेडिकल उम्मीदवारों के बीच मध्यस्थ (कमीशन के आधार पर ट्यूशन की आड़ में) का काम कर रही थी। आरोप है कि उसने इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल करके लीक हुए प्रश्नपत्र को छात्रों के बीच वितरित करवाया।
वह एनटीए (NTA) के NEET-UG 2026 के प्रश्न-पत्र निर्धारण पैनल की एक विशेषज्ञ सदस्य रही है। प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले पैनल के भीतर ही इस तरह की सेंधमारी ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
छात्रों के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं
वैभव और विकास जैसे छात्रों के लिए यह 30-35 दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। मुफ्त टेस्ट सीरीज़ के सहारे अपनी तैयारी को धार दे रहे विकास कहते हैं, अगर कोचिंग ने ये टेस्ट सीरीज़ मुफ्त न की होती, तो मुझे सिर्फ टेस्ट पेपर्स के लिए 2,500 से 5,000 रुपये अलग से खर्च करने पड़ते।
कोटा की तपती धूप में हॉस्टल के एक छोटे से कमरे में बैठकर पंखे की गर्म हवा के बीच वैभव एक बार फिर अपनी जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान की किताबों के पन्ने पलट रहे हैं। उनकी आंखों में थकान है, पर उम्मीद अभी मरी नहीं है।
देश के सिस्टम की नाकामी का खामियाजा भुगतते हुए ये छात्र 21 जून को एक बार फिर परीक्षा केंद्र पर बैठेंगे-इस उम्मीद के साथ कि इस बार उनकी मेहनत बिकेगी नहीं, बल्कि उसका सही मूल्यांकन होगा।
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