जनता के धैर्य की परीक्षा न लें पीएम,वोट चोरी के मुद्दे पर बोले टीकाराम जूली,मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अपने मताधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री को जनता के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। जूली ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में निकाले गए मार्च को लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
भगवान राम का उदाहरण देकर पीएम मोदी पर निशाना
टीकाराम जूली ने भगवान राम और समुद्र से जुड़ा रामचरितमानस का प्रसंग याद दिलाया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के बार-बार अनुरोध करने के बाद भी जब समुद्र ने रास्ता नहीं दिया, तो उन्होंने क्रोध प्रकट किया था। जूली ने इस संदर्भ में रामचरितमानस की चौपाई 'बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।' का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जनता अपने मताधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रही है। लोकतंत्र में जनता के वोट की ताकत सर्वोपरि है और उसके अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
जूली ने कहा कि वोट चोरी के आरोपों को लेकर जनता में नाराजगी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है। यह हर नागरिक के मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
जूली ने दावा किया कि राजस्थान के युवा, दलित, किसान और आम नागरिक राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित 'चलो दिल्ली मार्च' का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें शामिल लोगों ने अपने मताधिकार की रक्षा का संदेश दिया है।
अशोक गहलोत बोले- मार्च चेतावनी का संकेत
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी वोट चोरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के आह्वान पर नई दिल्ली में निकाले गए मार्च को लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
गहलोत ने दावा किया कि मार्च में युवाओं और जेन-जी की भागीदारी यह दिखाती है कि लोग संविधान और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस के लिए चेतावनी है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार उनका बचाव क्यों कर रही है।
गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग को स्वयं सामने आकर आरोपों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।फिलहाल ये कांग्रेस नेताओं के आरोप और राजनीतिक बयान हैं।