निकाय चुनाव में तानाशाही और पुलिस का दुरुपयोग कलंक- टीकाराम जूली

Mukesh Sharma | Sept 21, 2026, 18:21 IST
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला, निकाय चुनाव को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर निकाय सभापति चुनावों में तानाशाही और पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास पर कलंक बताया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • लोकतंत्र पर प्रहार:निकाय चुनावों में निष्पक्षता को ताक पर रखने का आरोप।
  • प्रशासन का दुरुपयोग:कांग्रेस पार्षदों को वोट डालने से रोकने का दावा।
  • चुनाव आयोग से शिकायत:तिजारा घटनाक्रम को लेकर राज्य व केंद्र आयोग को पत्र।
  • जनता करेगी हिसाब:सत्ता के अहंकार में चूर सरकार को दी चेतावनी।

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय सभापति चुनावों के दौरान हुई घटनाओं को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार और पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली को लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय और कलंक करार दिया।



नेता प्रतिपक्ष जूली ने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों के दौरान पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के दम पर कांग्रेस पार्षदों को मतदान करने से रोका गया। उन्होंने कहा, "आज जिस प्रकार का तांडव और तानाशाही पूरे प्रदेश में देखने को मिल रही है, वह राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास में कभी नहीं देखी गई। भाजपा अपना बोर्ड बनाने के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार है।"



तिजारा का मुद्दा उठाया

तिजारा निकाय का जिक्र करते हुए जूली ने बताया कि 18 पार्षदों को हरियाणा बॉर्डर पर रोके जाने के गंभीर मुद्दे पर उन्होंने राजस्थान चुनाव आयोग और केंद्रीय चुनाव आयोग दोनों को लिखित में औपचारिक शिकायत भेजी है।



तिजारा नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव से पहले कांग्रेस समर्थित पार्षदों को रोकने का मामला सामने आया था। खैरथल-तिजारा जिले की तिजारा पालिका में अध्यक्ष पद के लिए मतदान से ठीक पहले विवाद हुआ था। इसी तरह श्रीविजयनगर, उनियारा, कुचेरा समेत कई जगह फायरिंग और पार्षदों को रोकने के आरोप लगे हैं।



उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तानाशाही और बलप्रयोग के दम पर ही चुनाव कराने थे, तो फिर चुनावी प्रक्रिया का ढोंग क्यों रचाया गया?



जनता हिसाब लेगी - जूली

अंत में चेतावनी देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सत्ता के अहंकार में जनमत को दबाया नहीं जा सकता। राज्य की जागरूक जनता समय आने पर इस तानाशाही और लोकतांत्रिक संस्थाओं के हनन का हिसाब ब्याज समेत चुकता करेगी।



गौरतलब है कि राजस्थान में 273 निकायों में वार्ड चुनाव हुए थे, जिसमें कांग्रेस 29-40 सीट वाली कई जगह सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन सभापति चुनाव में भाजपा ने निर्दलीय के समर्थन से कई जगह बोर्ड बना लिया। पाली, अजमेर, अलवर, मूंडवा, उनियारा समेत कई जगह कांग्रेस बहुमत में होते हुए भी हार गई, जिस पर कांग्रेस खरीद-फरोख्त और प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है।



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