राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की गाइडलाइन: सरपंच चुनाव लड़ना है तो छोड़नी होगी प्रशासक की कुर्सी

Ashish Bhardwaj | Sept 30, 2026, 19:26 IST
राजस्थान पंचायत चुनाव
राजस्थान की 10,290 ग्राम पंचायतों के सरपंचों को अपने-अपने पद से इस्तीफा देना अनिवार्य किया गया है ताकि वे आगामी चुनावों में भाग ले सकें। नामांकन पत्र भरने से पहले उनकी विदाई आवश्यक होगी, अन्यथा नामांकन खारिज हो जाएगा। सरकार सभी प्रशासकों को एक साथ हटाने पर विचार कर रही है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को सरलता मिले।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान की 10,290 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान सरपंच ही प्रशासक लगे हैं।
  • चुनाव लड़ने के लिए उन्हें प्रशासक पद से इस्तीफा देना होगा।
  • इस्तीफा नामांकन पत्र भरने से पहले स्वीकार होना जरूरी है।
  • इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ तो नामांकन खारिज कर दिया जाएगा।
  • सरकार सभी प्रशासकों को एक साथ हटाने पर भी विचार कर रही है

राजस्थान में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए प्रशासक को कुर्सी छोड़नी होगी। अगर कोई निवर्तमान सरपंच नामांकन भरने से पहले प्रशासक पद से इस्तीफा नहीं देता तो वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। सरकार सभी प्रशासकों को एक साथ भी हटाने की तैयारी कर रही है।



दरअसल, प्रदेश की 10 हजार 290 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। इसके बाद सरकार ने वहां प्रशासक (कार्यकाल खत्म होने पर पंचायत का कामकाज संभालने वाला) नियुक्त किए। इन पदों पर वहीं के सरपंचों को ही लगाया गया। यानी जो कल तक सरपंच थे, वही आज पंचायत चला रहे हैं।



दोबारा लड़ना है तो छोड़ना होगा पद

जो निवर्तमान सरपंच दोबारा चुनाव लड़ना चाहते हैं, उनके लिए नियम साफ है। ऐसे में उन्हें पहले प्रशासक पद से इस्तीफा देना होगा। इसके बिना वे Sarpanch Election Rajasthan की दौड़ में शामिल नहीं हो पाएंगे।



सोचिए एक बार। कोई व्यक्ति पंचायत का प्रशासक भी हो और उसी पंचायत में उम्मीदवार भी। आयोग ने इसी स्थिति के लिए साफ नियम तय किया है।



राज्य निर्वाचन आयोग गाइडलाइन: पहले इस्तीफा

राज्य निर्वाचन आयोग गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन से पहले इस्तीफा देना होगा। पंचायत चुनाव के नामांकन पत्र जब भी भरे जाएंगे, यह नियम लागू रहेगा। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इस्तीफा देखा जाएगा।



पूरी प्रक्रिया को तीन कदमों में समझें। पहला, प्रशासक पद से इस्तीफा दें। दूसरा, इस्तीफा स्वीकार करवाएं। तीसरा, इसके बाद ही नामांकन भरें।



इस्तीफा अटका तो नामांकन खारिज

अगर इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, तो उम्मीदवार का नामांकन खारिज कर दिया जाएगा। यानी सिर्फ इस्तीफा देना काफी नहीं है। उसका स्वीकार होना भी उतना ही जरूरी है।



लेकिन असली पेंच यहीं छिपा है।



लाभ का पद बना सबसे बड़ी वजह

आयोग ने प्रशासक के पद को लाभ का पद माना है। लाभ का पद यानी ऐसा सरकारी पद, जिससे अधिकार या आर्थिक फायदा मिलता हो। इसी वजह से प्रशासक रहते हुए चुनाव नहीं लड़ा जा सकता।



चुनाव की तैयारी कर रहे प्रशासकों को नामांकन के आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना होगा। उन्हें पहले ही इस्तीफा स्वीकार कराने की प्रक्रिया पूरी करवानी होगी। आखिरी दिन इस्तीफा अटक गया तो क्या होगा? पूरी चुनावी तैयारी पर पानी फिर सकता है।



सभी प्रशासक एक साथ हटेंगे?

इधर सरकार के स्तर पर भी मंथन चल रहा है। विचार है कि आयोग की घोषणा से पहले सभी प्रशासक हटा दिए जाएं। इससे सभी निवर्तमान सरपंच चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हो सकेंगे।



कलेक्टर के पास भी रहेगा अधिकार

अगर सरकार ऐसा नहीं करती, तो दूसरा रास्ता भी मौजूद है। संबंधित जिला कलेक्टर प्रशासक का इस्तीफा स्वीकार कर सकते हैं। वे अपने स्तर पर पदमुक्त करने का आदेश भी जारी कर सकते हैं। यानी उम्मीदवारों को जिला स्तर पर ही राहत मिल सकती है।



सरपंच चुनाव लड़ने के नियम पर नजर

Panchayat Chunav 2026 से पहले यह नियम 10,290 ग्राम पंचायतों के प्रशासकों के लिए अहम है। सरपंच चुनाव लड़ने के नियम अब साफ हैं। पहले इस्तीफा, फिर नामांकन।



पंचायत चुनाव 2026 की तारीखों के ऐलान से पहले सरकार का फैसला भी अहम होगा। क्या सरकार सभी प्रशासकों को एक साथ हटाएगी? राजस्थान सरपंच चुनाव की तस्वीर इसी फैसले से और साफ होगी। तब तक राजस्थान पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रशासकों के लिए समय बहुत कीमती है।

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