बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले आदिवासी की मदद में आगे आए मंत्री किरोड़ीलाल, बोले-एक महीने की सैलरी देंगे

Ashish Bhardwaj | Apr 30, 2026, 12:36 IST
Photograph: (the sootr)
अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले ओडिशा के आदिवासी जीतू मुंडा की राजस्थान के मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा मदद करेंगे। उन्होंने जीतू को अपनी एक माह की सैलरी देने की घोषणा की है।

News In Short

  • मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ओडिशा के जीतू मुंडा की मदद में आए आगे।
  • राजस्थान के मंत्री ने जीतू को एक महीने की सैलरी देने का ऐलान किया।
  • ओडिशा के क्योंझर में जीतू मुंडा अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचे थे।
  • मंत्री ने कहा, जीतू मुंडा का दर्द मेरा दर्द है, मैं संकट में उनके साथ खड़ा हूं।
  • मंत्री ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से इस घटना पर कार्रवाई की मांग की है।

News In Detail

हाल ही में ओडिशा के क्योंझर जिले में एक घटना सामने आई। आदिवासी जीतू मुंडा ओडिशा ग्रामीण बैंक से पैसे निकलवाने के लिए सबूत के रूप में अपनी मृत बहन का कंकाल बैंक में लेकर पहुंच गया। इस घटनाक्रम पर अब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की प्रतिक्रिया सामने आई है।



डॉ. किरोड़ी लाल ने जताई नाराजगी

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहनचरण माझी से इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मंत्री ने कहा कि जीतू मुंडा की पीड़ा और बेबसी को देखकर उनका दिल कांप उठा। उन्होंने इस घटना को समाज के लिए कलंक बताया। यह भी कहा कि इस तरह की त्रासदी को किसी भी समाज में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।



कृषि मंत्री ने की मदद की घोषणा

कृषि मंत्री ने अपने ट्विटर पर लिखा कि जीतू मुंडा की पीड़ा को महसूस कर वह उनकी मदद के लिए एक महीने की सैलरी देने का निर्णय लेते हैं। मंत्री के अनुसार, जीतू का दर्द मेरा दर्द है और मैं संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ा हूं। उन्होंने कहा कि यह हम सबका कर्तव्य है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए, जिससे किसी को भी असहाय महसूस न हो।



क्या थी घटना

जीतू मुंडा की बहन कालरा मुंडा का खाता मल्लिपसी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक में था। जीतू अपनी बहन का 20,000 रुपये निकालने के लिए बैंक पहुंचा। बैंक कर्मचारियों ने नियमों के अनुसार उसे खाताधारक को लाने की शर्त दी, लेकिन जीतू के पास बहन का कागजी प्रमाण नहीं था, क्योंकि वह उसकी मृत्यु के बाद ही बैंक गया था। परेशान होकर जीतू ने अपनी बहन का कंकाल कंधे पर रखकर बैंक की ओर बढ़ने का निर्णय लिया।



जीतू मुंडा का व्यक्तिगत संघर्ष

जीतू मुंडा के पास शिक्षा की कमी थी, जिसके कारण वह बैंक के नियमों को नहीं समझ पाए। उनके पास न ही अपने बहन के खाता खोलने का सही तरीका था और न ही बैंक की प्रक्रिया की जानकारी। 26 जनवरी 2026 को उनकी बहन कालरा मुंडा की मृत्यु हो गई थी, और उसके बाद ही जीतू ने बैंक से पैसे निकालने का प्रयास किया। इस संघर्ष में वह अपने परिवार को आर्थिक मदद देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन प्रशासनिक जटिलताओं के कारण उन्हें भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।



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