मंत्री खराड़ी बोले,खुद को हिंदू नहीं मानने वालों को मुंह काला करके गांव से निकाल देना चाहिए

Jageshwar Prasad | Oct 23, 2026, 18:14 IST
राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों के बीच जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी के बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों के बीच जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी के बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी। खराड़ी ने कहा कि जो लोग खुद को हिंदू नहीं मानते और आदिवासी समाज की परंपराओं के खिलाफ काम करते हैं, उनका मुंह काला करके गांव से बाहर निकाल देना चाहिए। हालांकि, भाषण में उन्होंने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया।

संस्कृति और विरासत पर दिया जोर

मंत्री ने आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति का मुद्दा उठाया। उन्होंने नवरात्रि का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज के लोग देवी माता की पूजा करते हैं। वे देवरे जाते हैं और अपनी आस्था के अनुसार परंपराओं का निर्वहन करते हैं। ये परंपराएं पूर्वजों से मिली विरासत हैं।



खराड़ी ने सवाल किया कि यदि कुछ लोग खुद को हिंदू नहीं मानते, तो क्या वे समाज की पुरानी परंपराओं को भी बंद कराना चाहते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि राजनीतिक दल और नेता आते-जाते रहेंगे। लेकिन संस्कृति, संस्कार और विरासत बनी रहनी चाहिए।




बयान पर कायम हूं

बातचीत में मंत्री बाबूलाल खराड़ी (Babulal Kharadi) ने कहा कि उन्होंने यह बयान सोच-समझकर दिया है। आदिवासी क्षेत्रों में खुद को हिंदू नहीं मानने वाले कुछ लोग परंपराओं और संस्कृति के खिलाफ जाकर भोले-भाले आदिवासियों को भड़काने का काम कर रहे हैं।



खराड़ी ने कहा कि उनके कार्यकर्ता ऐसे लोगों को गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे। उन्होंने इसे सनातन धर्म के खिलाफ राजनीतिक विरोधियों का षड्यंत्र बताया। साथ ही कहा कि इसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।




सियासत में बढ़ी हलचल

इस बयान के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस बयान को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर सकता है। वहीं, भाजपा इसे संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर देख रही है। यह बयान पंचायत चुनाव के बीच आया है, जिससे इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।




जानें कौन हैं बाबूलाल खराड़ी?

बाबूलाल खराड़ी राजस्थान के एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और वर्तमान में राजस्थान सरकार की भजनलाल शर्मा कैबिनेट में जनजाति क्षेत्रीय विकास (TAD) तथा गृह रक्षा (Civil Defence) विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। वे उदयपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाड़ोल (ST) विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक हैं।



बाबूलाल खराड़ी झाड़ोल क्षेत्र से चार बार (2003, 2008, 2018 और 2023) विधायक चुने गए। उनका जीवन आज भी आम आदिवासियों की तरह है और वे खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। वह आदिवासी समाज की पारंपरिक 'दापा प्रथा' के तहत अपनी दो पत्नियों (मणी देवी और तेज देवी) के साथ रहते हैं।



खराड़ी का जुड़ाव लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से रहा है। वर्ष 2000 में वे कोटड़ा पंचायत समिति के प्रधान चुने गए और उसके बाद मुख्यधारा की राजनीति में आए। विधानसभा में उनके प्रदर्शन और जनहित के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए उन्हें वर्ष 2021 में राजस्थान विधानसभा का सर्वश्रेष्ठ विधायक (Best MLA) भी चुना गया था। आदिवासी समाज के उत्थान के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें कैबिनेट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।



  1. बाबूलाल खराड़ी ने आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराओं के बारे में क्या कहा?
    बाबूलाल खराड़ी ने आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोग देवी माता की पूजा करते हैं और वे अपनी आस्था के अनुसार परंपराओं का निर्वहन करते हैं।
  2. राजनीतिक दलों और विपक्ष ने खराड़ी के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
    खराड़ी के बयान के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस बयान को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर सकता है, जबकि भाजपा इसे संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर देख रही है।
  3. बाबूलाल खराड़ी कौन हैं और उनका राजनीतिक करियर कैसा है?
    बाबूलाल खराड़ी राजस्थान के एक राजनीतिज्ञ हैं और वर्तमान में आदिवासी क्षेत्रीय विकास मंत्री हैं। वे चार बार झाड़ोल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं और उनके पास आदिवासी समाज के उत्थान और विकास के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
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