चूरू के रामोतार को UAE राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, फ्लाईदुबई की उड़ान में इनकी सूझबूझ से टला था बड़ा हादसा

Jageshwar Prasad | Nov 05, 2026, 15:28 IST
यूएई के राष्ट्रपति ने चूरू के रामोतार गोस्वामी को प्रतिष्ठित "फर्स्ट क्लास ऑर्डर ऑफ जायद द्वितीय" सम्मान से नवाजा।
राजस्थान निवासी रामोतार गोस्वामी ने विदेश की धरती पर अपने साहस, कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित सूझबूझ का परिचय दिया है। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति ने प्रतिष्ठित फर्स्ट क्लास ऑर्डर ऑफ जायद द्वितीय सम्मान से सम्मानित किया है। फ्लाईदुबई एयरलाइंस में केबिन क्रू सदस्य के रूप में कार्यरत रामोतार चूरू जिले के सादुलपुर निवासी ओमप्रकाश गोस्वामी के पुत्र हैं।

उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि और वीरता के लिए राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक भव्य समारोह में पूरी क्रू टीम को सम्मानित किया।




हवा में कॉकपिट ड्रामा: कैसे बची यात्रियों की जान?

30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (FlyDubai) की फ्लाइट FZ1073 (बोइंग 737 मैक्स 8) में कॉकपिट के भीतर एक भयानक घटना घटी। इस पूरी घटना का सिलसिलेवार (क्रमबद्ध) विवरण नीचे दिया गया है:



  • उड़ान और क्रू: विमान ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजराइल के तेल अवीव के लिए उड़ान भरी। फ्लाइट में 172 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे। कॉकपिट की कमान भारतीय मूल के कैप्टन स्मित माछर और ओमानी मूल के सह-पायलट हमाम अल-हमामी के हाथों में थी।
  • कॉकपिट में हमला: विमान जब सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र में लगभग 34,000 फीट की ऊंचाई पर सामान्य रूप से उड़ रहा था, तभी सह-पायलट हमाम अल-हमामी ने अचानक एक धारदार हथियार (चाकू) निकाला और कैप्टन स्मित माछर (Captain Smit Machchhar) पर जानलेवा हमला कर दिया।

  • विमान का नीचे गिरना: हमले के दौरान कॉकपिट के नियंत्रण (कंट्रोल्स) पर से ध्यान हटने के कारण विमान अचानक बेहद तेज़ गति से नीचे की तरफ गिरने लगा। कुछ ही सेकंड में विमान करीब 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई खोकर नीचे आ गया, जिससे केबिन में हड़कंप मच गया।
  • आपातकालीन सिग्नल: कैप्टन ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्थिति को संभालने की कोशिश की। इसी दौरान विमान से 'सक्वाक 7500' (हाईजैक/अवैध हस्तक्षेप) और 'सक्वाक 7700' (सामान्य आपातकाल) के इमरजेंसी कोड एयर ट्रैफिक कंट्रोल को भेजे गए।
  • पायलट का साहस और बचाव: लहूलुहान कैप्टन स्मित माछर ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद चिल्लाए। आवाज़ सुनकर केबिन क्रू और विमान में सफर कर रहे कुछ ऑफ-ड्यूटी पायलट तुरंत कॉकपिट में घुसे। उन्होंने मिलकर हमलावर सह-पायलट को दबोचा और उसे बांधकर काबू में किया।
  • सुरक्षित लैंडिंग: घायल कैप्टन और क्रू ने तुरंत विमान का नियंत्रण वापस लिया और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। विमान को सऊदी अरब के तबूक (Tabuk) रीजनल एयरपोर्ट की तरफ मोड़ा गया, जहां उसे सुरक्षित रूप से लैंड करा लिया गया।
  • परिणाम व जांच: लैंडिंग के तुरंत बाद सऊदी सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपी सह-पायलट को गिरफ्तार कर लिया। घायल कैप्टन को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। विमान में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे। इस घटना के बाद यूएई और सऊदी अरब की एजेंसियां आतंकी साजिश और मानसिक स्थिति के कोण से इसकी विस्तृत जांच कर रही हैं।

रामोतार ने निभाई यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका

इस बेहद खौफनाक और तनावपूर्ण स्थिति के दौरान चूरू के रामोतार गोस्वामी और अन्य केबिन क्रू सदस्यों ने अपना धैर्य बनाए रखा। उन्होंने यात्रियों में दहशत फैलने नहीं दी, केबिन में शांति व व्यवस्था कायम रखी और घायल कैप्टन को प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



रामोतार के भाई हेमंत गोस्वामी ने बताया कि उनके भाई के इस साहस और सामूहिक प्रयास से न केवल 100 से अधिक यात्रियों की जान बची, बल्कि एक बड़ा हवाई हादसा होने से भी टल गया। चूरू की रेतीली माटी से निकलकर सात समंदर पार अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाने वाले रामोतार की यह सफलता पूरे राजस्थान के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।



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