दो करोड़ घूसकांड: सस्पेंड ASP मुकेश सोनी की जमानत खारिज, जेल में मनेगी दिवाली
दो करोड़ रुपए रिश्वत मांगने का आरोप
यह मामला उदयपुर नगर निगम के 272 फर्जी पट्टा प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि तत्कालीन एसओजी ASP मुकेश कुमार सोनी ने मामले में राहत देने, कमजोर चार्जशीट पेश करने और जब्त दस्तावेज लौटाने के बदले 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी।
ACB ने 27 सितंबर को कार्रवाई करते हुए पहले दलाल सज्जन सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ASP मुकेश सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी 3 अक्टूबर से उदयपुर जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
मोबाइल स्क्रीन पर लिखकर मांगी थी रिश्वत
इस मामले का सबसे चर्चित पहलू रिश्वत मांगने का तरीका रहा। आरोप के मुताबिक, आवाज रिकॉर्ड होने से बचने के लिए ASP ने मौखिक रूप से रकम मांगने के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर 2 करोड़ रुपए लिखकर परिवादी को दिखाए थे।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने सीधे मुंह से रिश्वत की मांग नहीं की थी। साथ ही ट्रैप के समय पिता के निधन के कारण बालोतरा में होने की बात भी कही गई।
हालांकि, ACB ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, वॉट्सऐप कॉल रिकॉर्डिंग और मोबाइल स्क्रीन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य पेश किए। अदालत ने इन सबूतों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
भ्रष्टाचार को लेकर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी से निष्पक्षता और ईमानदारी की अपेक्षा की जाती है। पद का दुरुपयोग कर इतनी बड़ी रिश्वत मांगना गंभीर मामला है।
कोर्ट ने भ्रष्टाचार को जनता के भरोसे और कानून व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
जमानत याचिका का अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और परिवादी के वकील विनोद कुमार शर्मा ने विरोध किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रह चुके हैं और मामले में अभी चालान पेश होना बाकी है। कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाने हैं। ऐसे में जमानत मिलने पर आरोपी अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका पैदा हो सकती है।
कमजोर चार्जशीट और दस्तावेज लौटाने का आरोप
ACB की जांच के अनुसार, 272 फर्जी पट्टा प्रकरण में परिवादी को राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। आरोप है कि कमजोर चार्जशीट पेश करने, अन्य धाराओं में कार्रवाई से बचाने और जब्त दस्तावेज लौटाने के लिए 2 करोड़ रुपए का सौदा तय किया गया था।
ACB ने पहले दलाल सज्जन सिंह को गिरफ्तार किया और उसके बाद ASP मुकेश सोनी तक जांच पहुंची। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह मामला पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा है। हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रभावशाली पद पर बैठे आरोपियों के मामलों में गवाहों की सुरक्षा और जांच की निष्पक्षता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आगे क्या?
अब ACB की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले में चालान पेश होने और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया बाकी है। जमानत नहीं मिलने के कारण आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहेंगे।