उदयपुर 272 प्लॉट घोटाले में 2 करोड़ की रिश्वत का खेल, दलाल गिरफ्तार; SOG के ASP हिरासत में
समझें क्या है पूरा मामला
- उदयपुर के 272 प्लॉट घोटाले की जांच एसओजी कर रही थी।
- शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि केस में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के लिए 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई।
- एसीबी ने सत्यापन के बाद दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को 2 करोड़ रुपए लेते हुए ट्रैप किया।
- रकम में 4 लाख रुपए असली और 1.96 करोड़ रुपए डमी नोट थे।
- कार्रवाई के बाद एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी को बालोतरा स्थित घर से हिरासत में लिया गया।
उदयपुर के चर्चित 272 प्लॉट घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के बदले 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया है। एसीबी ने शनिवार को एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी के नाम पर 2 करोड़ रुपए की रिश्वत लेते दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को ट्रैप किया।
कार्रवाई के बाद शनिवार देर रात एसीबी की टीम ने एएसपी मुकेश सोनी को बालोतरा स्थित उनके घर से हिरासत में लिया। मामले में एसीबी की जांच आगे जारी है।
शिकायत के बाद शुरू हुई ACB की कार्रवाई
एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने एसीबी को शिकायत दी थी कि उसके खिलाफ उदयपुर के सूरजपोल थाने में 272 प्लॉट घोटाले से जुड़ा मामला दर्ज है। इस केस की जांच एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी कर रहे थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि मामले में एफआर लगाने के लिए 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत की पुष्टि होने के बाद रिश्वत के लेनदेन को पकड़ने के लिए ट्रैप की तैयारी की गई।
4 लाख असली, 1.96 करोड़ के डमी नोट
एसीबी ने कार्रवाई के दौरान 4 लाख रुपए के असली नोट और 1.96 करोड़ रुपए के डमी नोट तैयार किए थे। कुल 2 करोड़ रुपए की रकम से भरा बैग दलाल को दिया गया।
जैसे ही दलाल सज्जन सिंह जैन ने रुपए से भरा बैग लिया, एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उससे पूछताछ शुरू की गई और मामले में आगे की कार्रवाई की गई।
कार में हुई थी ASP से मुलाकात
जांच में सामने आया कि दलाल सज्जन सिंह जैन ने शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के लिए उसकी मुलाकात एएसपी मुकेश सोनी से करवाई थी। यह मुलाकात किसी सरकारी कार्यालय में नहीं, बल्कि उदयपुर में एक चौराहे के पास खड़ी कार में हुई थी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, कार की आगे वाली सीट पर एएसपी मुकेश सोनी बैठे थे, जबकि पीछे की सीट पर शिकायतकर्ता और दलाल सज्जन सिंह जैन मौजूद थे।
आरोप है कि इससे पहले दलाल ने शिकायतकर्ता से मामले को खत्म कराने के बदले 2 करोड़ रुपए नकद देने की बात कही थी। इतनी बड़ी रकम की मांग के बाद शिकायतकर्ता ने एएसपी से मुलाकात कराने को कहा था।
बातचीत रिकॉर्ड होने के डर से चुप रहे ASP
शिकायतकर्ता के अनुसार, कार में हुई मुलाकात के दौरान दलाल ने 2 करोड़ रुपए देने की बात कही। उस दौरान एएसपी मुकेश सोनी कथित तौर पर ज्यादा बातचीत नहीं कर रहे थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बातचीत रिकॉर्ड होने की आशंका के चलते एएसपी चुप रहे। इसके बाद कथित तौर पर उन्होंने अपने मोबाइल की स्क्रीन पर सिर्फ '2 करोड़' लिखकर दिखाया और मामला खत्म होने का इशारा किया। मुलाकात के बाद दलाल लगातार शिकायतकर्ता के संपर्क में रहा। इसके बाद एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कर कार्रवाई की।
एफआर और जब्त सामान छोड़ने के बदले मांगी गई रकम
आरोप है कि रिश्वत की रकम 272 प्लॉट घोटाला मामले में एफआर लगाने और पहले से जब्त सामान को वापस दिलाने के बदले मांगी गई थी।
इसी मामले में कार्रवाई के दौरान पहले कुछ आरोपियों के घरों से बड़ी मात्रा में नकदी और सोने के जेवर जब्त किए गए थे। एसीबी अब यह भी जांच कर रही है कि रिश्वत की पूरी डील में कौन-कौन लोग शामिल थे।
क्या है 272 प्लॉट घोटाला?
यह मामला उदयपुर में खाली और रद्द पड़े प्लॉटों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और मिलीभगत के जरिए हड़पने और बेचने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, साल 2012 में यूआईटी की कई कॉलोनियां नगर निगम को ट्रांसफर की गई थीं। इनमें बड़ी संख्या में प्लॉट खाली थे। आरोप है कि भू-माफियाओं और निगम के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से इन प्लॉटों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार की गईं। इसके बाद फर्जी व्यक्तियों के नाम पर नामांतरण करवाकर इन प्लॉटों को आगे बेचने का आरोप है।
2022 में दर्ज हुई थी FIR
272 प्लॉट मामले में साल 2022 में सूरजपोल थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच एसओजी को दी गई। मामले की जांच के दौरान कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी जांच से जुड़े एक मामले में सुखेर निवासी पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को भी गिरफ्तार किया गया था।
बताया गया कि उनके घर से करीब 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए बरामद किए गए थे। अब इसी जब्त सामान को वापस दिलाने और केस में एफआर लगाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया है।
विधानसभा में भी उठा था मामला
272 प्लॉट घोटाले का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी उठ चुका है। मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
जांच के बाद नगर निगम ने करीब 48 पट्टे निरस्त किए थे। इस मामले को पूर्व में कांग्रेस पार्षद रहे अजय पोरवाल ने भी उठाया था। इसके अलावा गुलाबचंद कटारिया और उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन भी इस मामले को लेकर आवाज उठा चुके हैं।
मुकेश सोनी को लेकर पहले भी विवाद
एएसपी मुकेश सोनी की पोस्टिंग और कार्यप्रणाली को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आने की बात कही गई है जानकारी के अनुसार, साल 2022 में अजमेर में नशीली दवाओं की तस्करी के एक मामले में आरोपी को कथित फायदा पहुंचाने के आरोपों के बीच मुकेश सोनी समेत तीन पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट ने रेंज से बाहर भेजने के निर्देश दिए थे।
साल 2024 में मुकेश सोनी एसओजी की अजमेर चौकी में तैनात रहे। इसके बाद उन्हें वहां से हटाया गया। नवंबर 2025 में उन्हें एसओजी की उदयपुर यूनिट में भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।
अब आगे क्या?
एसीबी ने दलाल सज्जन सिंह जैन को गिरफ्तार कर लिया है और एएसपी मुकेश सोनी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि 2 करोड़ रुपए की रिश्वत की मांग किस स्तर पर तय हुई थी, रकम किसके लिए थी और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। एसीबी मामले में दस्तावेजों, बातचीत और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
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