उदयपुर: रिश्वत आरोपी एएसपी मुकेश सोनी ने नहीं बताया फोन का पासवर्ड, एसीबी को पांच दिन से दे रहा चकमा
समझें क्या है पूरा मामला
- रिश्वत आरोपी एएसपी के फोन में छुपे राज।
- पासवर्ड बताने से कर दिया इंकार।
- एसीबी पांच दिन से कर रही पूछताछ।
- रिमांड 3 अक्टूबर तक बढ़ाई गई।
- मोबाइल से बड़े नाम आने की आशंका।
उदयपुर में 2 करोड़ के रिश्वतकांड में घिरे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG – Special Operations Group) के एएसपी (ASP – Additional Superintendent of Police) मुकेश सोनी को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB – Anti Corruption Bureau) के सूत्रों ने अहम जानकारी दी।
उनके मुताबिक सोनी को एसीबी की कार्रवाई को लेकर पहले से शक था। इसलिए वह परिवादी पर नजर रख रहा था। उसे फंसाने के लिए एसीबी ने एक प्रशासनिक अधिकारी की मदद ली। वहीं गिरफ्तारी के बाद से मुकेश सोनी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है।
बीते पांच दिन से जांच अधिकारी उसका आईफोन अनलॉक करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आरोपी मुकेश सोनी पासवर्ड नहीं बता रहा है। बुधवार को आरोपी एएसपी और दलाल सज्जन सिंह की रिमांड 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई।
पूछताछ में क्या हुआ?
जमीन घोटाले में रिश्वत मांगने के आरोपी मुकेश सोनी ने पूछताछ में घूस मांगने से इंकार कर दिया था। जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक इस पर एसीबी ने उसे रिकॉर्डिंग सुनाई। इसके बाद वह चुप हो गया।
दलाल सज्जन सिंह ने पूछताछ में बताया कि उसने एएसपी के कहने पर ही परिवादी से संपर्क किया था। यह जानकारी जांच के लिए अहम मानी जा रही है।
मोबाइल का पासवर्ड नहीं बता रहा
रविवार 27 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद से मुकेश सोनी से पूछताछ हो रही है। अधिकारियों का दावा है कि वह सहयोग नहीं कर रहा है। उसके आईफोन में काफी अहम सबूत होने की आशंका है।
लेकिन मुकेश सोनी उसका पासवर्ड नहीं बता रहा है। बीते पांच दिन में उससे कई बार पासवर्ड पूछने की कोशिश की गई। मोबाइल एसीबी टीम के कब्जे में है, लेकिन बिना पासवर्ड के उसे चालू नहीं किया जा सका।
कोर्ट में क्या दलील दी?
बुधवार को दोनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। एसीबी का कहना था कि जांच अभी बाकी है। आरोपी अब भी बहुत कुछ जानकारी नहीं दे रहे हैं।
एसीबी ने कोर्ट के समक्ष यह भी बताया कि एएसपी जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों की रिमांड 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी।
मोबाइल से क्या मिल सकता है?
एसीबी का मानना है कि एएसपी के मोबाइल से बड़े नाम सामने आ सकते हैं। आखिर 2 करोड़ की रिश्वत में कौन-कौन शामिल था। यह पैसा कितने लोगों में बंटना था।
वॉट्सएप चैट और कॉलिंग से इसका पता लग सकता है। यही कारण है कि एसीबी ने तीन दिन का और रिमांड मांगा है। अब एसीबी एएसपी से सख्ती से पूछताछ कर सकती है।
साथ ही आईटी (IT – Information Technology) एक्सपर्ट की मदद से मोबाइल चालू कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे जो भी डेटा निकलेगा, वह जांच के लिए अहम होगा।
एसीबी के सवालों पर मुकरे
परिवादी निरंजन मोगरा की गिरफ्तारी के दौरान एएसपी मुकेश सोनी ने उनके घर से पत्नी के सोने के बैंगल, सोने की घड़ी और जमीन के दस्तावेज जब्त किए थे। ये जब्ती रिकॉर्ड में नहीं दर्शाए गए थे। इस सवाल पर सोनी ने ऐसी किसी जब्ती से इनकार कर दिया।
परिवादी से 2 करोड़ की रिश्वत लेने और केस में एफआर (FR – Final Report) लगाने के सवाल पर भी उन्होंने साफ कहा कि ऐसा नहीं किया। परिवादी के घर से डीवीआर (DVR – Digital Video Recorder) क्यों और किस कारण से जब्त किया, इस पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
परिवादी से तीन खाली चेक पर साइन क्यों कराए गए, इस सवाल पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 2 करोड़ की रिश्वत एएसपी और दलाल के अलावा किस-किसके बीच बंटनी थी, इस पर भी कोई जवाब नहीं दिया।
अब बड़ा सवाल
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है। जब चोरी और मारपीट जैसे मुकदमों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सख्ती बरती जाती है। तो एएसपी मुकेश सोनी के साथ एसीबी द्वारा सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की गई।
यही कारण है कि एसीबी अभी तक उनके जब्त मोबाइल को चालू नहीं कर पाई। अब देखना जरूरी है कि रिमांड के दौरान एसीबी क्या नए सबूत जुटा पाती है।