उदयपुर हत्याकांड के पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट ने गंभीरता का दिया हवाला
समझें क्या है पूरा मामला
- उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल की उनकी दुकान के अंदर हत्या कर दी गई थी।
- हत्या के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी।
- जांच एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
- पांच आरोपियों ने लंबे समय से जेल में होने का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से जमानत मांगी थी।
- हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड से जुड़े पांच आरोपियों को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को देखते हुए आरोपियों को फिलहाल जमानत देने से इनकार किया है।
जिन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन शामिल हैं। इन आरोपियों की ओर से लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे की प्रक्रिया में लग रहे समय को आधार बनाकर जमानत की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने मामले की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
2022 में हुई थी कन्हैया लाल की हत्या
उदयपुर में जून 2022 में कन्हैया लाल की हत्या ने पूरे देश में काफी चर्चा पैदा की थी। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई। जांच के दौरान आरोपियों के बीच संपर्क, घटना की कथित साजिश और अन्य पहलुओं को लेकर सबूत जुटाए गए। इसी आधार पर मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की गई।
आरोपियों ने जमानत के लिए दी थी दलील
हाईकोर्ट में आरोपियों की ओर से जमानत के लिए कई दलीलें दी गईं। बचाव पक्ष ने लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। यह भी कहा गया कि आरोपियों को घटना से जोड़ने वाले सबूतों को ट्रायल के दौरान परखा जाना बाकी है।
दूसरी ओर, जांच एजेंसी की ओर से आरोपियों की जमानत का विरोध किया गया। एजेंसी ने मामले की गंभीरता और आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध सामग्री का हवाला देते हुए जमानत नहीं देने की मांग की।
UAPA के तहत भी चल रहा मामला
कन्हैया लाल हत्याकांड में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत भी कार्रवाई की गई है। जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने इसी कानून के तहत लागू जमानत संबंधी प्रावधानों पर भी विचार किया।
अदालत ने मामले में उपलब्ध सामग्री और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत याचिका पर फैसला देते समय की गई टिप्पणियों का मुख्य ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
चार साल से ज्यादा समय से जेल में आरोपी
जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से यह भी बताया गया कि वे चार साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। बचाव पक्ष ने लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे की गति को देखते हुए राहत देने की मांग की थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं माना। इसके साथ ही पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
आगे जारी रहेगा मामले का ट्रायल
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पांचों आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामले की मुख्य सुनवाई आगे जारी रहेगी। ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान, दस्तावेजी सबूत और जांच एजेंसी की ओर से पेश अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।
अदालत ने यह भी साफ किया है कि जमानत पर की गई टिप्पणियों को मुख्य मुकदमे में अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा। ट्रायल कोर्ट मामले का फैसला उपलब्ध सबूतों और कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से करेगा।