उदयपुर के जर्जर सरकारी स्कूल में बच्चों पर गिरा प्लास्टर, 3 घायल; पहले दी थी खराब भवन की सूचना

Ashish Bhardwaj | Oct 06, 2026, 17:53 IST
सरकारी स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा
राजस्थान में उदयपुर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से हड़कंप मच गया। इस घटना में तीन बच्चों को सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि दो अन्य बच्चों को मामूली चोटें आईं। शिक्षा विभाग को इस जर्जर स्कूल भवन के बारे में पहले भी जानकारी दी गई थी।

राजस्थान में उदयपुर के सरकारी स्कूल में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। क्लासरूम में 32 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान छत का प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे गिर गया। मलबा बच्चों पर आ गिरा। हादसे में तीन बच्चों के सिर में चोट लगी। दो अन्य बच्चों को मामूली चोट आई। जिस बिल्डिंग में बच्चे पढ़ रहे थे, वह करीब 25 साल पुरानी है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि बिल्डिंग जर्जर होने की जानकारी पहले ही शिक्षा विभाग को दी गई थी। हादसे के बाद बिल्डिंग पर ताला लगा दिया गया है। बच्चों की पढ़ाई दूसरी जगह कराई जाएगी।



घटना उदयपुर जिले के भींडर थाना क्षेत्र की वाणियातलाई ग्राम पंचायत में हुई। यहां सरकारी प्राइमरी स्कूल नारदा में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे एक क्लासरूम में पहली से पांचवीं तक के 32 बच्चे बैठे थे। पढ़ाई चल रही थी। इसी दौरान तेज आवाज के साथ छत का प्लास्टर टूटकर गिर गया। कमरे में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षक बच्चों को बाहर लेकर आए। घायल बच्चों को भींडर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया।



हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत के मुताबिक पहली क्लास में पढ़ने वाली कृष्णा कुमारी और कार्तिक के साथ पांचवीं के छात्र गणेशलाल के सिर में चोट लगी। इलाज के बाद तीनों को घर भेज दिया गया। दो अन्य बच्चों को मामूली चोट आने की जानकारी है।



गोविंद सिंह डोटासरा ने किया सरकार पर हमला

गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर हमला हमला करते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा। उन्होंने कहा कि भींडर की वाणियातलाई पंचायत के नारदा स्कूल में पढ़ाई के दौरान बच्चों पर छत गिरने की घटना बेहद चिंताजनक और सरकार की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।




स्कूल में 37 बच्चे, भवन पर अब ताला

इस सरकारी स्कूल में कुल 37 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में दो कमरे और एक बरामदा है। हादसे के बाद बच्चों को यहां बैठाना सुरक्षित नहीं माना गया।शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देश के बाद भवन पर ताला लगा दिया गया है। अब स्कूल माताजी के चबूतरे के पास दूसरी जगह चलेगा। घटना की जानकारी मिलने के बाद सीबीईओ भींडर राजेंद्र कुमार चौबीसा भी मौके पर पहुंचे।



पहले भी दी थी जर्जर भवन की जानकारी

प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत का कहना है कि स्कूल की बिल्डिंग साल 2001 में बनी थी। बिल्डिंग की हालत खराब होने की जानकारी शिक्षा विभाग को पहले दी जा चुकी थी।स्थानीय ग्रामीणों का भी आरोप है कि स्कूल की हालत लंबे समय से खराब थी। इसे लेकर शिकायतें की गईं, लेकिन समय रहते समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को केवल प्लास्टर गिरा। अगर पूरी छत गिरती तो हादसा कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता था।




राजस्थान में 3587 स्कूल भवन जर्जर

नारदा स्कूल का हादसा ऐसे समय हुआ है, जब राजस्थान में जर्जर सरकारी स्कूलों का मुद्दा पहले से चर्चा में है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 41 जिलों के 65308 सरकारी स्कूलों का तकनीकी सर्वे कराया है।



24 सितंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सर्वे में 3587 स्कूल भवन जर्जर मिले हैं। इसके अलावा करीब 71078 क्लासरूम और बिजली, पानी व टॉयलेट जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत बताई गई है।



सरकार के मुताबिक पिछले दो साल में स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए 3364 काम मंजूर किए गए। इन पर 1220 करोड़ रुपए खर्च हो चुके। 652 नए स्कूल भवनों को भी प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। सितंबर 2026 तक मौजूदा सरकार ने स्कूलों की सुविधाओं के लिए कुल 2,973 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। सरकार ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर आगे करीब 12,500 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना भी बताई है।




आदिवासी इलाकों के स्कूल देख रही कॉकरोच जनता पार्टी

इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने भी राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान छेड़ा हुआ है। पार्टी का 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान उदयपुर समेत आदिवासी इलाकों में चल रहा है।



CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनकी टीम ने सितंबर में उदयपुर के कई सरकारी स्कूलों का दौरा किया था। इस दौरान कई स्कूल बदहाल मिले थे। पीने के पानी, जर्जर बिल्डिंग, मिड-डे मील की गुणवत्ता को भी सीजेपी की टीम ने जांचा था और इसकी खामियों पर सवाल उठाए थे।



झालावाड़ में 7 बच्चों की गई थी जान

राजस्थान में जर्जर स्कूल भवनों का सबसे बड़ा हालिया हादसा 25 जुलाई 2025 को झालावाड़ में हुआ था। मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का हिस्सा गिर गया था।हादसे में सात बच्चों की मौत हुई थी और कई बच्चे घायल हुए थे। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया था। आयोग ने राजस्थान के मुख्य सचिव और झालावाड़ एसपी से रिपोर्ट मांगी थी।इस हादसे के बाद प्रदेशभर में सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे।




बांसवाड़ा और डूंगरपुर में भी गिर चुका प्लास्टर

साल 2026 में भी राजस्थान में सरकारी स्कूलों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। मई में बांसवाड़ा जिले के एक सरकारी स्कूल में क्लास के दौरान छत का प्लास्टर गिर गया था। इसमें 11वीं कक्षा की चार छात्राएं चोटिल हुई थीं।जुलाई 2026 में डूंगरपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मारगिया महूड़ा में भी छत का प्लास्टर गिरा। उस समय स्कूल कार्यालय में बैठे दो शिक्षक मलबे की चपेट में आ गए और घायल हुए थे।



अब उदयपुर के नारदा सरकारी स्कूल में भी ऐसा ही हादसा हुआ है। यहां राहत की बात यह रही कि पूरी छत नहीं गिरी और किसी बच्चे की जान नहीं गई। लेकिन हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि जर्जर घोषित या खराब हालत वाले स्कूल भवनों में बच्चों को बैठाने से पहले मरम्मत या दूसरी सुरक्षित जगह की व्यवस्था कितनी तेजी से हो रही है।



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