पुलिस में स्पेशल सेल के नाम पर उगाही का खेल, एसओजी ने कहा, अब हर जिले में एक ही टीम, अफसरों की 'निजी सेना' नहीं होगी मान्य
News In Short
- सभी जिलों में पुलिस के भीतर स्पेशल टीम, फिर भी चल रही समानांतर टीमें।
- उदयपुर में ऐसी समानांतर स्पेशल टीम का वसूली खेल सामने आया।
- अब एसओजी ने ऐसी सभी समानांतर स्पेशल टीमों को लिया रडार पर।
- एसओजी ने आदेश जारी कर एक ही जिला स्तरीय स्पेशल टीम को दी मान्यता।
- आदेश में कहा, अगर कोई अवैध स्पेशल टीम मिली तो होगा एक्शन।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली फिर गंभीर सवालों में है। प्रदेश के सभी पुलिस जिलों में जिला स्तरीय स्पेशल टीम गठित हैं, लेकिन कुछ अफसरों ने इसके समानांतर अपनी 'निजी सेना' बना रखी है। हाल ही में एसीबी की एक कार्रवाई ने उदयपुर में पुलिस महकमे के भीतर स्पेशल टीम के नाम पर चल रहे वसूली सिंडिकेट का खुलासा किया था।
हाल ही में एसीबी की कार्रवाई ने उदयपुर में पुलिस महकमे के भीतर चल रहे वसूली सिंडिकेट का खुलासा किया था। हालांकि, उदयपुर की इस घटना के बाद एसओजी पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गया है। एसओजी ने जिलों में पुलिस के भीतर अवैध रूप से गठित स्पेशल टीमों को रडार पर ले लिया है।
उदयपुर में ऐसे सामने आया वसूली का खेल
उदयपुर के पुलिस उपाधीक्षक सूर्यवीर सिंह की समानांतर गठित स्पेशल टीम का काला चिट्ठा तब सामने आया, जब एसीबी ने एक कांस्टेबल नागेंद्र सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। टीम के सदस्यों ने एक गैराज संचालक को केस में फंसाने और गैराज सीज करने की धमकी दी थी। इसके बदले में 50 हजार रुपये मासिक बंधी की मांग की गई थी।
बाद में यह सौदा 25 हजार रुपये प्रति माह पर तय हुआ। कार्रवाई के दौरान सिपाही तो पकड़ा गया, लेकिन टीम के अन्य सदस्य उप निरीक्षक शक्ति सिंह, हेड कांस्टेबल अर्जुन सिंह और कांस्टेबल अनिल मीणा फरार होने में कामयाब रहे।
किसके आदेश पर बनी टीम?
उदयपुर खुलासे के बाद सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों में एक ही जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) गठित किए जाने के निर्देश हैं तो डिप्टी एसपी (डीएसपी) स्तर के अधिकारी ने अपनी अलग स्पेशल टीम कैसे बना ली। क्या इस टीम की जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक या रेंज आईजी को थी। क्या यह टीम केवल अवैध वसूली के लिए ही बनाई गई थी।
हाल ही में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने भी सार्वजनिक मंच से उदयपुर पुलिस की छवि पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस की छवि दलालों जैसी बनती जा रही है। यह मामला उनके दावों को पुख्ता करता नजर आ रहा है।
अवैध स्पेशल टीमें भंग करने के निर्देश
सूत्रों का कहना है कि उदयपुर की इस घटना और अन्य जिलों से मिल रही शिकायतों के बीच एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बेहद सख्त आदेश जारी किया है। इस आदेश ने साफ कर दिया है कि पुलिसिंग के नाम पर निजी सेना चलाने का दौर अब खत्म होगा।
आदेश में कहा गया कि जिला स्तर पर केवल जिला विशेष टीम (डीएसटी) के गठन का प्रावधान है। यह देखा गया है कि जिला पुलिस अधीक्षक बदलते ही नई टीमें गठित कर लेते हैं और पुराने को भंग कर देते हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि पुलिस मुख्यालय के स्थायी आदेश संख्या 17/2019 के अलावा किसी भी स्तर पर गठित अन्य सभी स्पेशल टीमों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए।
सिस्टम में सुधार की जरूरत
सूत्रों के अनुसार मुख्यालय का यह आदेश इस बात का प्रमाण है कि पुलिस महकमे के भीतर समानांतर सत्ता चलाने की कोशिशें की जा रही हैं। स्पेशल टीम का टैग लगाकर पुलिसकर्मी अक्सर थानों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर अवैध वसूली को अंजाम देते हैं।
रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत नहीं होगा और स्पेशल टीमों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक वर्दी पर लगने वाले इन दागों को धोना मुश्किल होगा।
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