आदिवासी की जमीन को भी नहीं बख्शा, 15 साल बाद फिर बेच कर ठग लिए लाखों रूपए

Purshottam Kumar Joshi | Jan 28, 2026, 12:30 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के उदयपुर में भुवाणा गांव मे आदिवासी परिवार की जमीन को शातिर ठगों ने 15 साल बाद फिर से दूसरे व्यक्ति को बेच कर लाखों रूपए ठग लिए। धोखाधड़ी के खुलासे के बाद रजिस्ट्री निरस्त कर पुलिस जांच कर रही है।

News in Short

  • उदयपुर के भुवाणा में आदिवासी की जमीन धोखाधड़ी से दो बार बेची गई।
  • जमीन की दलाली के मुख्य आरोपी छगनलाल को गिरफ्तार किया गया है।
  • गुमानाराम भील ने 2010 में जमीन खरीदी थी, लेकिन छगनलाल ने उसे दोबारा बेचा।
  • छगनलाल ने दोनों पक्षों से अवैध वसूली की, जिसमें 48 लाख रुपए की पुष्टि हुई है।
  • पुलिस इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य लोगों की जांच कर रही है।

News in Detail

राजस्थान के उदयपुर में आदिवासियों की जमीन पर शातिर ठगों की नजर हो गई है। भूमाफियाओं से मिलीभगत कर इन जमीनों को फर्जी तरीके से बेच कर लाखों रुपए ऐंठ रहे है। भुवाणा गांव में एक आदिवासी की जमीन को 15 सालों में ही धोखाधड़ी कर दो बार बेच दिया गया। मुख्य आरोपी छगनलाल ने पहले गुमानाराम भील से 2010 में खरीदी गई जमीन को फिर से गोपाल भील को 2 करोड़ में बेच दिया। पुलिस के मुताबिक छगनलाल ने इस सौदे से दोनों पक्षों से अवैध वसूली की, जिसमें 48 लाख रुपए की रकम शामिल है। पुलिस छगनलाल और उसके संपर्कों के खिलाफ जांच कर रही है और रजिस्ट्री को निरस्त किया गया।



उदयपुर में आदिवासी जमीन धोखाधड़ी का मामला

उदयपुर के भुवाणा में एक आदिवासी की जमीन धोखाधड़ी से दो बार बेची गई है। इसके चलते 15 साल पुराना विवाद सामने आया है। सुखेर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी जमीन दलाल छगनलाल को गिरफ्तार किया है। छगनलाल पर आरोप है कि उसने एक ही जमीन को दो बार बेच दिया। इससे न केवल पुराने खरीदार बल्कि नए खरीदार को भी धोखा हुआ।



मामला तब सामने आया जब गुमानाराम भील नामक व्यक्ति ने 2010 में कीकाराम मीणा से 12.51 लाख रुपए में जमीन खरीदी थी। गुमानाराम ने 10.51 लाख रुपए का भुगतान किया और जमीन पर कब्जा भी लिया। लेकिन कीकाराम की मृत्यु के बाद जमीन का रिकॉर्ड उनके वारिसों के नाम आ गया और छगनलाल ने इसका फायदा उठाया।



धोखाधड़ी की कहानी

छगनलाल की रिश्तेदारी कीकाराम के पैतृक गांव कागरदा (पाली) में थी। उसे पहले से ही जानकारी थी कि जमीन पहले बिक चुकी है, फिर भी उसने कीकाराम के वारिसों को लालच देकर इस जमीन को दोबारा बेचने की योजना बनाई। आरोप है कि छगनलाल ने गोपाल भील नामक व्यक्ति को इस जमीन का सौदा 2 करोड़ रुपए में तय किया। इसके बाद 19 अक्टूबर 2025 को कीकाराम के वारिसों के माध्यम से गोपाल भील के नाम रजिस्ट्री भी करवाई गई।



बैंक ट्रांजैक्शन से खुलासा

पुलिस के अनुसार बैंक ट्रांजैक्शन से पता चला कि छगनलाल ने दोनों पक्षों से अवैध वसूली की थी। गोपाल भील से उसने 30 लाख रुपए अपने भाई रामाराम के खाते में डलवाए, जबकि कीकाराम के बेटे चम्पाराम से भी 18 लाख रुपए वसूले गए।



कीकाराम की पत्नी कुकीदेवी ने छगनलाल के कहने पर गोपाल को जमीन बेचने की जानकारी दी। जब गुमानाराम को यह पता चला तो उसने विधायक पुष्पेंद्र सिंह से कुकीदेवी को समझाने का आग्रह किया।



सख्त कानूनी कार्रवाई

पुलिस छगनलाल और उसके संपर्कों के खिलाफ जांच कर रही है। इसके अलावा, गोपाल भील ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए रजिस्ट्री को निरस्त कराया और छगनलाल समेत 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। रजिस्ट्री निरस्त होने के बाद, कीकाराम के वारिसों ने फिर से गुमानाराम के नाम पर रजिस्ट्री करवाई है। यह पूरी घटना भूमि हड़पने और धोखाधड़ी के जाल को उजागर करती है। इसमें छगनलाल की भूमिका मुख्य रही है।



मामले की मुख्य बातें

  • आरोपी: छगनलाल (जमीन दलाल)
  • धोखाधड़ी का तरीका: एक ही जमीन को दो बार बेचना
  • जमीन का मूल्य: पहले 12.51 लाख, फिर 2 करोड़ रुपए
  • मुख्य खरीदार: गुमानाराम भील और गोपाल भील

संभावित कानूनी परिणाम

यह मामला न केवल जमीन हड़पने का है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, जमीन की अवैध बिक्री (illegal land sale) और वित्तीय अनियमितताएं भी शामिल हैं। छगनलाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सभी पक्षों के खिलाफ आरोप सही पाए गए तो यह मामला एक बड़ा उदाहरण बनेगा कि कैसे भू-माफियाओं और दलालों ने आदिवासियों की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए अवैध तरीके अपनाए हैं।



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