चार दशकों से कोई चुनावी मुकाबला नहीं, जानें कौन हैं लगातार सातवीं बार निर्विरोध सरपंच चुनी गईं भीखी देवी?
पहली बार 1994 में बनीं थीं सरपंच
भीखी देवी पहली बार वर्ष 1994-1995 में इस ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई थीं। इसके बाद से उनके सामने किसी भी प्रत्याशी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया। इस बार भी नामांकन प्रक्रिया तथा नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने तक उनके मुकाबले कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं आया। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें आधिकारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित (Unopposed Elected) घोषित कर दिया।
इस ग्राम पंचायत की खास बात यह भी है कि केवल सरपंच ही नहीं, बल्कि सभी सात वार्डों के वार्ड पंच भी सर्वसम्मति से निर्विरोध चुने गए हैं। इसके चलते वीरेंद्र नगर में मतदान कराने की जरूरत ही नहीं पड़ी और पूरी ग्राम पंचायत का गठन बिना चुनाव के संपन्न हो गया।
कांग्रेस के कद्दावर नेता हेमाराम चौधरी की हैं पत्नी
भीखी देवी (Bhikhi Devi) राजस्थान कांग्रेस के बड़े नेता हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं। हेमाराम चौधरी छह बार विधायक रहे हैं। वे पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। इसके बाद भी ग्रामीणों के अनुसार भीखी देवी बेहद सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करती हैं।
अपने पिछले कार्यकालों में बतौर सरपंच उन्होंने गांव के चौमुखी विकास पर काम किया है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय मुद्दों को हल करने की दिशा में उन्होंने काम किया। ग्रामीणों के बीच बने इसी विश्वास और सेवा भाव के कारण गांव के लोग हर चुनाव में बिना किसी विरोध के उन्हें अपना मुखिया चुनते आ रहे हैं।
बेटे के नाम पर बनी नई पंचायत
बायतु पंचायत समिति की इस ग्राम पंचायत का नाम पहले बायतु भीम था। इसे बाद में नवसृजित करके वीरेंद्र नगर नाम दिया गया। इस नई ग्राम पंचायत का नामकरण हेमाराम चौधरी और भीखी देवी के इकलौते पुत्र डॉक्टर वीरेंद्र चौधरी के नाम पर किया गया है।
डॉक्टर वीरेंद्र पेशे से चिकित्सक थे। कम उम्र में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया था। ग्राम पंचायत का नाम बदलने और पुनर्गठन के बाद भी ग्रामीणों ने एक बार फिर भीखी देवी के हाथों में ही गांव की कमान सौंपी है। यह उनके प्रति गांव के लोगों के गहरे विश्वास को दिखाता है।
अनोखी मिसाल बनी पंचायत
वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गई है। जहां आमतौर पर पंचायत चुनावों में कड़ा मुकाबला होता है, वहां यह गांव चार दशक से सर्वसम्मति से अपना नेतृत्व चुन रहा है। यह भीखी देवी के सामाजिक कार्यों और गांव के लोगों के साथ उनके जुड़ाव को दर्शाता है।
FAQs
- भीखी देवी कौन हैं और उन्हें कब सरपंच चुना गया था?
भीखी देवी राजस्थान के वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत की सरपंच हैं, जिन्हें पहली बार वर्ष 1994-1995 में सरपंच चुना गया था। - वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत का नाम किसके नाम पर रखा गया है?
वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत का नाम हेमाराम चौधरी और भीखी देवी के इकलौते पुत्र डॉक्टर वीरेंद्र चौधरी के नाम पर रखा गया है। - वीरेंद्र नगर में पंचायत चुनावों में मतदान की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ी?
वीरेंद्र नगर में पंचायत चुनावों में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी क्योंकि सभी पदों के प्रत्याशियों को निर्विरोध चुना गया था। सभी वार्ड पंच भी सर्वसम्मति से निर्विरोध चुने गए।