वीसी डॉ. देवस्वरूप की बर्खास्तगी पर स्टे, आज ही था अंतिम कार्यदिवस

Mukesh Sharma | Jul 02, 2026, 19:51 IST
बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी के VC की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. देवस्वरूप की बर्खास्तगी पर राजस्थान हाई कोर्ट से स्टे मिल गया है। संयोग से आज ही उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था। फिलहाल उन पर बर्खास्तगी का ठप्पा नहीं लगेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • वीसी डॉ. देवस्वरूप की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक।
  • डॉ. देवस्वरूप दिव्यांग यूनिवर्सिटी व कौशल यूनिवर्सिटी के कुलगुरू।
  • संयोग से यह स्टे कुलगुरू के कार्यकाल के अंतिम दिन आया।
  • आरयू में रहते हुए भर्तियों में चहेतों को फायदा पहुंचाने के आरोप।
  • दलीलों में कहा- राज्यपाल ने बिना सच्चाई जाने गैर-कानूनी ढंग से हटाया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के वीसी डॉ.देवस्वरुप को राहत दे दी है। कोर्ट ने कार्यकाल के अंतिम दिन उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी है।



जस्टिस रेखा बोराणा ने यह अंतरिम आदेश डॉ. देवस्वरुप की याचिका पर दिए। उनके पास विश्वकर्मा कौशल यूनिवर्सिटी का चार्ज भी था। राज्यपाल ने उन्हें दोनों ही यूनिवर्सिटी से बर्खास्त किया था। कोर्ट से उन्हें दोनों यूनिवर्सिटी के लिए राहत मिली है।



यह है मामला

वाइस चांसलर डॉ. देवस्वरूप पर 2011-2012 और 2013-2014 की नियुक्तियों में अनियमितता करने और चहेतों को फायदा देने के आरोप लगे थे। उनके खिलाफ डॉ. प्रेमलता सिंगारिया ने एससी महिला के साथ अन्याय करने और नियमों की अनदेखी को लेकर शिकायत की थी।



राज्यपाल ने कोटा यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ.भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बैठाई। कमेटी ने जांच रिपोर्ट में माना कि डॉ. देवस्वरुप ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के वीसी रहने के दौरान नियुक्तियों में अनियमितता की थी।



कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने मई 2026 के अंतिम सप्ताह में डॉ.देवस्वरुप को बर्खास्त कर दिया था। तब वे बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी और विश्वकर्मा कौशल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु थे।



यह बताया अदालत को

सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर ने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल ने सच्चाई को जाने बिना ही एक तरफा कार्रवाई की। 13 साल पहले जिन नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप में उन्हें बर्खास्त किया है, उन्हें चुनौती देने वाली कुछ याचिकाएं आज भी हाई कोर्ट में लंबित हैं। कुछ मामलों में हाईकोर्ट की खंडपीठ सलेक्शन प्रक्रिया को सही मान चुकी है।



एडवोकेट माथुर ने कोर्ट को बताया कि शिक्षकों का सलेक्शन वीसी न तो अकेले करते हैं और न ही किए गए थे। सलेक्शन की एक निर्धारित प्रक्रिया है। इसमें वीसी के अलावा विषय विशेषज्ञों के साथ ही राज्यपाल का प्रतिनिधि भी होता है।



हर कैंडीडेट की परफॉरर्मेंस का मूल्यांकन करने के बाद सामूहिक रुप से निर्णय होता है। सभी नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके की गई थीं। किसी कैंडीडेट को जानबूझकर फायदा पहुंचाने के आरोप बेबुनियाद हैं। ये छवि खराब करने की कोशिश है।



जांच कमेटी की विश्वसनीयता क्या ?

कोर्ट को बताया गया कि ऐसी जांच कमेटी की क्या विश्वसनीयता है, जिसे गठित करने की निर्धारित प्रक्रिया तक नहीं अपनाई गई।



जांच कमेटी ने तत्कालीन कुलसचिव, स्क्रीनिंग कमेटी सदस्यों, सलेक्शन कमेटी सदस्यों, सिंडिकेट सदस्यों तथा तत्कालीन वीसी से कोई जानकारी नहीं ली। न ही इस बारे में कोई पूछताछ ही की।



कमेटी ने जानबूझकर यह फैक्ट भी छिपाया कि ये सभी मामले कोर्ट में हैं। हकीकत में शिकायतकर्ता की एक याचिका हाईकोर्ट में आज भी लंबित चल रही है।



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