विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर फिर साधा निशाना, डोटासरा बोले- पूर्व मंत्री का पक्ष सुनेंगे
समझें क्या है पूरा मामला
- विश्वेंद्र ने दिए कांग्रेस छोड़ने के संकेत।
- डोटासरा पर फिर साधा निशाना।
- बोले- स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर।
- पार्टी कार्रवाई की तैयारी में थी।
- डोटासरा बोले, उनका पक्ष सुनेंगे।
पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह (Vishvendra Singh) ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद अब पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने फिर प्रदेशाध्यक्ष पर निशाना साधा है।
विश्वेंद्र ने सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी अध्यक्ष को संबोधित करते हुए लिखा कि उनका सार्वजनिक जीवन खुली किताब है और बेदाग है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और न ही लगने देंगे।
क्या लिखा पोस्ट में?
विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है। उन्होंने कहा कि उनके पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से समझौता नहीं किया।
उनका अनुसरण करते हुए वे भी पार्टी अध्यक्ष को अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझते हैं। उन्होंने लिखा कि वे शायद अब पार्टी की गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाएंगे।
पार्टी कार्रवाई की तैयारी में थी
डोटासरा के खिलाफ बयानबाजी के बाद विश्वेंद्र सिंह पर प्रदेश कांग्रेस ने कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। पार्टी कोई फैसला लेती, इससे पहले ही विश्वेंद्र ने खुद कांग्रेस को अलविदा कहने का इशारा कर दिया।
हालांकि उन्होंने आधिकारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। लेकिन उनके पोस्ट से साफ है कि वे पार्टी छोड़ने के मूड में हैं। यह राजनीतिक दांव माना जा रहा है।
डोटासरा ने क्या कहा?
मामले में डोटासरा का कहना है कि वे सोशल मीडिया के आधार पर फाइनल डिसीजन नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि वे प्रदेशाध्यक्ष हैं। विश्वेंद्र की भावना भी उन्हें लेनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्षों से भी बात करनी पड़ेगी। वहां के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी बात होगी। फिर कोई भी बात आएगी। अनुशासनहीनता की होगी तो अनुशासन कमेटी परीक्षण करेगी।
उसके बाद बात प्रदेशाध्यक्ष के पास आएगी। उससे पहले वे किसी के लिए टिप्पणी कैसे कर सकते हैं। डोटासरा ने साफ किया कि वे प्रक्रिया के अनुसार ही फैसला लेंगे।
पुराने संबंधों का जिक्र
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि विश्वेंद्र सिंह उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने कहा कि वे तो उनके राज्य मंत्री रह चुके हैं। विश्वेंद्र उन्हें छोटा भाई मानते हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के आधार पर वे कोई परसेप्शन नहीं बना सकते। विश्वेंद्र की कोई बात होगी तो सुनी जाएगी। डोटासरा ने कहा कि विश्वेंद्र उनसे बहुत प्यार करते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वेंद्र का उन पर बहुत आशीर्वाद रहा है। जब वे राज्य मंत्री थे, तब विश्वेंद्र उनके कमरे में आकर मिलते थे। जब वे कहते थे कि आप बड़े हैं, मैं आऊंगा, तो विश्वेंद्र कहते थे कि आप मेरे छोटे भाई हैं।
संवाद की कमी स्वीकारी
डोटासरा ने यह भी माना कि ढाई साल में संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर उनसे संवाद स्थापित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि विश्वेंद्र ने उनके सामने कभी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
यह बयान अहम है। इससे साफ है कि पार्टी में आंतरिक संवाद की कमी रही है। डोटासरा ने कहा कि वे पहले भी विश्वेंद्र से बात करने को तैयार थे। लेकिन संवाद नहीं हो सका।
क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
यह घटनाक्रम राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में अंदरूनी कलह को दिखाता है। निकाय चुनाव के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आया है। विश्वेंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़ना बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब देखना जरूरी है कि पार्टी आलाकमान क्या फैसला लेता है। क्या विश्वेंद्र को मनाया जाएगा या उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। यह आने वाले दिनों में साफ होगा।