जाट आरक्षण पर विश्वेंद्र-नेम सिंह में तकरार, दोनों बोले- मेरा मुंह मत खुलवाओ
समझें क्या है पूरा मामला
- विश्वेंद्र-नेम सिंह में आया सार्वजनिक विवाद।
- जाट आरक्षण आंदोलन में श्रेय की जंग तेज।
- विश्वेंद्र सिंह और नेम सिंह भिड़े, वीडियो वायरल।
- नेम सिंह बोले- अब अपमान नहीं सहूंगा।
- जाट आंदोलन के दो चेहरे अब आमने-सामने
राजस्थान केभरतपुर-धौलपुर के जाट आरक्षण आंदोलन में कभी साथ नजर आने वाले पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार अब खुलकर आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच विवाद अब सोशल मीडिया तक पहुंच गया।
एक तरफ विश्वेंद्र सिंह ने दावा किया कि उन्होंने नेम सिंह को आंदोलन में आगे बढ़ाया और राजनीतिक पहचान दिलाई। दूसरी ओर, नेम सिंह ने साफ कहा कि वे सम्मान करते हैं, लेकिन अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। दोनों ने वीडियो जारी कर एक-दूसरे को जवाब दिया। बात यहां तक पहुंच गई कि दोनों ने पुरानी बातें सार्वजनिक करने की चेतावनी तक दे दी।
जाट आरक्षण आंदोलन के श्रेय से बढ़ी खींचतान
विश्वेंद्र सिंह और नेम सिंह के बीच नाराजगी की एक बड़ी वजह भरतपुर (Bharatpur) जाट आरक्षण आंदोलन और उसमें किसकी कितनी भूमिका रही, इसे लेकर चल रही खींचतान बताई जा रही। विश्वेंद्र सिंह पिछले कुछ समय से नेम सिंह से नाराज बताए जा रहे। जून 2026 में भरतपुर में जाट आरक्षण को लेकर हुई हुंकार सभा में सांसद हनुमान बेनीवाल शामिल हुए थे। इस आंदोलन की अगुवाई में नेम सिंह फौजदार भी सक्रिय रहे।
इसके बाद दोनों के बीच दूरी और बढ़ती गई। बताया जा रहा है कि हाल में नेम सिंह के गांव में एक कार्यक्रम के दौरान विश्वेंद्र सिंह ने उनके चुनावी प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर आ गया।
विश्वेंद्र बोले- नेता मैंने बनाया, आंदोलन का झंडा सौंपा
विश्वेंद्र सिंह ने वीडियो में दावा किया कि जाट आरक्षण आंदोलन में नेम सिंह को आगे बढ़ाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर वे अपनी लोकसभा सदस्यता तक छोड़ चुके। विश्वेंद्र ने दावा किया कि उन्होंने ही नेम सिंह को आगे किया और आंदोलन की जिम्मेदारी सौंपी।
उनका कहना है कि विधायक रहते हुए आंदोलन से जुड़े मुकदमों की जिम्मेदारी भी उन्होंने अपने ऊपर ली, जिससे नेम सिंह समेत दूसरे आंदोलनकारियों को परेशानी नहीं हुई।उन्होंने कहा कि नेम सिंह को राजनीतिक पहचान दिलाने में भी उनकी भूमिका रही है।
विश्वेंद्र सिंह ने चुनाव में नेम सिंह को मदद करने का किया दावा
विश्वेंद्र सिंह ने पुराने चुनावों का जिक्र करते हुए कई दावे भी किए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान नेम सिंह उनके घर आए थे और परिवार से मदद मांगी थी। उन्होंने दावा किया कि नेम सिंह ने चुनाव प्रचार में उनकी पत्नी की तस्वीर इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी थी। विश्वेंद्र के मुताबिक उनके परिवार ने चुनाव और दूसरे मौकों पर नेम सिंह की मदद की।
विश्वेंद्र सिंह ने सांसद संजना जाटव की जीत में भी अपनी भूमिका होने का दावा किया।
विश्वेंद्र सिंह ने नेम सिंह को दी चुनौती
विश्वेंद्र सिंह का गुस्सा वीडियो में साफ दिखाई दिया। उन्होंने नेम सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि अगर पंचायत करनी है तो वे अपने खर्चे पर पंचायत बुलाने के लिए तैयार। वहां दोनों सार्वजनिक रूप से बता सकते हैं कि किसने किसके लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि नेम सिंह को उनके बारे में पीछे से बोलने के बजाय सामने आकर बात करनी चाहिए।
विश्वेंद्र ने यह भी कहा कि वे लंबे राजनीतिक जीवन में कई बड़े नेताओं और मुख्यमंत्रियों से बहस कर चुके, इसलिए किसी की धमकी से डरने वाले नहीं।हालांकि उन्होंने नेम सिंह को आगे बढ़ने का आशीर्वाद देते हुए कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान बनाए रखना चाहिए।
नेम सिंह बोले- सम्मान करूंगा, अपमान नहीं सहूंगा
विश्वेंद्र सिंह के वीडियो के बाद नेम सिंह फौजदार ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बार उन्होंने विश्वेंद्र सिंह का नाम लिया है, उतनी बार हनुमानजी का नाम लेते तो शायद ज्यादा अच्छा होता। नेम सिंह ने कहा कि वे समाज के सभी बुजुर्गों का सम्मान करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई उनका मजाक उड़ाए या उनका अपमान करे। उन्होंने कहा कि सम्मान और मर्यादा दोनों तरफ से होनी चाहिए।
नेम सिंह ने अपने जवाब में तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि वे भी 'बकरी की कोख से पैदा नहीं हुए हैं।' उन्होंने कहा कि वे भी अपनी मां की कोख और पिता के अंश से उसी समाज, वंश और गोत्र में पैदा हुए हैं। उनका कहा था कि वे हमेशा विश्वेंद्र सिंह का सम्मान करते आए हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उनका मजाक उड़ाया जाना ठीक नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि उनके पास भी कहने के लिए बहुत कुछ है। अगर उन्होंने सारी बातें सार्वजनिक कर दीं तो स्थिति ठीक नहीं रहेगी।
नेम सिंह ने कहा कि वे विधायक बनें या न बनें, इससे उनके सम्मान का फैसला नहीं होता। उन्होंने साफ कहा कि अब उनकी सहने की सीमा खत्म हो चुकी है और आगे वे अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। नेम सिंह नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं सके। वहीं जाट आरक्षण आंदोलन में वे लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
दोनों नेताओं के रिश्ते हमेशा ऐसे नहीं रहे। फरवरी 2024 में राजस्थान में जाट आरक्षण आंदोलनके दौरान विश्वेंद्र सिंह और नेम सिंह फौजदार साथ आए थे। तब विश्वेंद्र ने नेम सिंह को साफा पहनाया था और दोनों ने जाट समाज के एकजुट होने की बात कही थी। नेम सिंह ने भी उस समय विश्वेंद्र सिंह को आंदोलन का संरक्षक बताया था।
अब करीब ढाई साल बाद दोनों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया। फिलहाल दोनों तरफ से जारी वीडियो के बाद जाट आरक्षण आंदोलन में किसकी क्या भूमिका रही और किसने किसकी राजनीतिक मदद की, यही इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
यह खबरें भी पढ़ें...
राजस्थान में मानसून की विदाई के साथ बढ़ी गर्मी, 25 सितंबर से बारिश के आसार
राजस्थान में 1 अक्टूबर से बदलेगी स्कूल टाइमिंग, शिक्षक संगठन ने 16 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की
राजस्थान में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क, 50% से ज्यादा रकम विदेश तक पहुंचने का दावा