WAPCOS के पूर्व सीएमडी आरके अग्रवाल पर CBI जांच का शिकंजा, राजस्थान से जुड़े भ्रष्टाचार के तार
News In Short
- वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी के पूर्व सीएमडी आरके अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ीं।
- अग्रवाल के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने को कहा।
- अग्रवाल पद का दुरुपयोग करते हुए बीएमडब्ल्यू कार का इस्तेमाल कर रहे थे।
- पूर्व सीएमडी अग्रवाल के भ्रष्टाचार की जड़ें राजस्थान के झुंझुनूं जिले से जुड़ीं।
- राजस्थान के गुढ़ा थाने में दर्ज हैं अग्रवाल के खिलाफ दो मामले। इनमें कई आरोप।
News In Detail
Jaipur: केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने बड़े कदम के तहत वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी (WAPCOS) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) आरके अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। मंत्रालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17A के तहत इस जांच की मंजूरी दी है।
हालांकि यह मामला दिल्ली के गलियारों से शुरू होता है, लेकिन दस्तावेजों के विश्लेषण से इसके तार सीधे तौर पर राजस्थान के झुंझुनूं जिले से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
राजस्थान कनेक्शन: पुलिस थानों में दर्ज मुकदमे
दस्तावेजों के अनुसार WAPCOS के पूर्व अध्यक्ष आरके अग्रवाल का विवादों से नाता केवल मंत्रालय की फाइलों तक सीमित नहीं है। उनके खिलाफ राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़ा पुलिस स्टेशन में पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। फरवरी 2023 में दर्ज एफआईआर में अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। इससे पहले 2022 में दर्ज हुए मामले में भी उन पर गंभीर आरोप थे।
इन मामलों में अग्रवाल के साथ-साथ सुमीर चावला (अतिरिक्त मुख्य प्रबंधक), संजय बोहिदार (मुख्य अभियंता) और अवतार सिंह (सहायक प्रबंधक) जैसे अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। राजस्थान हाई कोर्ट में भी इनसे जुड़ी आपराधिक याचिकाएं विचाराधीन हैं। ये याचिका दर्शाती हैं कि भ्रष्टाचार के इस खेल की जड़ें राजस्थान तक फैली हुई हैं।
लग्जरी कारें और विदेशी फंड
सीवीसी पोर्टल पर दर्ज शिकायत और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालयकी शुरुआती जांच में अग्रवाल पर कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि अग्रवाल अपने पद का दुरुपयोग करते हुए WAPCOS के खाते से एक महंगी बीएमडब्ल्यू कार का इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि उनके पद के अनुसार उन्हें जो वाहन आवंटित था, वह उसका भी उपयोग कर रहे थे। इस लग्जरी कार का खर्च कंपनी के कोष से अवैध रूप से भरा जा रहा था।
ठेकेदारों से रिश्वत का नेटवर्क
जांच रिपोर्ट के अनुसार अग्रवाल ने अपनी पत्नी दीप्ति अग्रवाल के नाम पर एक बैंक खाता खोल रखा था। आरोप है कि इस खाते में WAPCOS और NPCC के विभिन्न ठेकेदारों से सीधे तौर पर रिश्वत की राशि जमा की जाती थी।
सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि अग्रवाल के पुत्र मनन अग्रवाल की वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) की फीस (2018-2022) और दिल्ली से चेन्नई के बीच की हवाई यात्राओं का भुगतान प्रोजेक्ट मैनेजरों और अन्य अधिकारियों द्वारा किया गया।
मनी ट्रेल की आगामी कार्रवाई
मंत्रालय की जांच में यह पुष्टि हुई है कि मनन अग्रवाल की फीस के लगभग ₹2.50 लाख का भुगतान हरि चंद अरोड़ा द्वारा किया गया, जो चंडीगढ़ में कार्यरत थे। इसके अलावा हवाई टिकटों की बुकिंग प्रोजेक्ट मैनेजर सुमित मित्तल के क्रेडिट कार्ड से की गई थी।
सीबीआई को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खाता संख्या 55115012226 के क्रेडिट विवरणों की जांच करने को कहा गया है। ऐसे सभी पेमेंट गेटवे और खातों की पहचान करने का भी आग्रह किया गया है, जिनसे अग्रवाल के परिवार के निजी खर्चों का भुगतान किया गया।
सीबीआई से राजस्थान में दर्ज मुकदमों और वहां के ठेकेदारों के साथ अग्रवाल के व्यावसायिक संबंधों की कड़ियों का भी पता लगाने का अनुरोध किया गया है।
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