कोटा मेडिकल कॉलेज: सिजेरियन के बाद एक बार फिर महिला की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
कोटा मेडिकल कॉलेज (Kota Medical College) के नए अस्पताल में सीजेरियन के बाद एक महिला की मौत हुई है। मृतका का नाम रेशमा बताया गया है। परिजनों का आरोप है कि ड्रिप के बाद उसका शरीर नीला पड़ने लगा। आरोप है कि स्टाफ ने काफी देर तक मरीज को नहीं संभाला। अस्पताल प्रशासन ने मरीज की पुरानी जटिलताओं का तर्क दिया है।
अस्पताल में क्या हुआ?
परिजनों के अनुसार 13 तारीख की रात करीब 8 बजे रेशमा को नए अस्पताल लाया गया। उस समय तक सब कुछ ठीक बताया गया। 14 तारीख की सुबह 9 से 10 बजे के बीच डॉक्टरों ने सीजेरियन ऑपरेशन (Caesarean Operation) किया।
परिजनों का कहना है कि डिलीवरी के बाद मां और बच्चा दोनों ठीक थे। दोपहर 11 से 12 बजे के बीच रेशमा को गायनिक ओटी (OT – Operation Theatre) से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
परिजनों का आरोप क्या है?
मकसूद खान के अनुसार जनरल वार्ड में स्टाफ ने रेशमा को ड्रिप चढ़ाई। आरोप है कि इसके बाद ड्रिप में एक इंजेक्शन भी दिया गया। मकसूद का कहना है कि उन्हें दवा का नाम नहीं बताया गया।
उनके अनुसार कुछ देर बाद रेशमा की हालत बिगड़ने लगी। उसका शरीर नीला-पीला पड़ने लगा। पास मौजूद उनकी बहन ने स्टाफ को बुलाया। आरोप है कि स्टाफ ने पहले कहा कि ऐसी दिक्कत कभी-कभी हो जाती है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि कहने के बाद भी स्टाफ ने काफी देर तक मरीज को नहीं संभाला। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू (ICU – Intensive Care Unit) ले जाया गया।
आईसीयू से निजी अस्पताल तक
परिजनों के अनुसार आईसीयू में हालत और खराब हुई और यूरिन बंद हो गया। रात करीब 12 बजे स्टाफ ने डायलिसिस की जरूरत बताई। साथ ही कई बोतल खून का इंतजाम करने को कहा गया। आरोप है कि व्यवस्था न होने की बात कहकर मरीज को निजी अस्पताल ले जाने को कहा गया।
15 तारीख को सुबह 3 बजे परिजन रेशमा को निजी अस्पताल ले गए। वहां इलाज चला, लेकिन तबीयत और बिगड़ने लगी। इसके बाद निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज में ही इलाज कराने को कहा।
16 तारीख को परिजन रेशमा को फिर मेडिकल कॉलेज लाए। यहां उसे एसएसबी में भर्ती किया गया। शाम तक हालत बिगड़ती गई और रात में उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद हंगामा
मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और कारण पूछा। आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर जवाब देने से कतराते दिखे। परिजनों का यह भी आरोप है कि डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों को बुलाने का नाटक करने लगे। यह सभी बातें परिजनों के आरोप हैं।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
अस्पताल प्रशासन ने अपना तर्क रखा है। उसके अनुसार रेशमा को 36 सप्ताह 3 दिन की गर्भावस्था में पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती किया गया था। प्रशासन के अनुसार उसे गर्भ में एमनियोटिक द्रव अधिक होने की समस्या थी।
प्रशासन ने बताया कि उसकी पहले तीन बार सीजेरियन डिलीवरी हो चुकी थी। उसके अनुसार ब्लड में थक्के की स्थिति भी लग रही थी।
अनसुलझे सवाल
मौत की स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है। परिजन पूछ रहे हैं कि इंजेक्शन के बाद शरीर नीला क्यों पड़ा। उनका सवाल यह भी है कि दवा से पहले एलर्जी जांच हुई या नहीं।
परिजन यह भी जानना चाहते हैं कि दिनभर जनरल वार्ड में रखने के बाद रात 12 बजे अचानक डायलिसिस और खून की मांग क्यों हुई। इन सवालों पर अस्पताल का कोई विस्तृत जवाब स्रोत में उपलब्ध नहीं है।