32 साल का इंतजार हुआ खत्म; यमुना जल समझौता पर राजस्थान-हरियाणा में बनी सहमति
News In Short
- 1994 में हुए यमुना जल समझौते पर राजस्थान और हरियाणा में अंतिम सहमति बनी।
- हथिनी कुंड बैराज से चूरू तक 265 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की डीपीआर मंजूर।
- पिछले तीन महीनों से डीपीआर को लेकर अटका गतिरोध बैठक में सुलझा लिया गया।
- समझौते के तहत चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों को 577 एमसीएम पानी मिलेगा।
- परियोजना के तहत मानसून के दौरान राजस्थान को 1917 क्यूसेक पानी मिल सकेगा।
News In Detail
राजस्थान के शेखावाटी अंचल के लिए एक अच्छी खबर आई है। यमुना जल को पाइपलाइन के जरिए चूरू तक लाने की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर हरियाणा और राजस्थान के बीच सहमति बन गई है। बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के आवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रोजेक्ट को गति देने के निर्देश दिए।
यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अब राजस्थान का जल संसाधन विभाग इस डीपीआर को केंद्रीय जल आयोग (CWC) के पोर्टल पर अपलोड करेगा। इसके साथ ही प्रोजेक्ट के लिए बजट और अन्य संसाधनों को जुटाने का काम भी शुरू हो जाएगा।
3 महीने से अटका था मामला
फरवरी 2024 में दोनों राज्यों के बीच एमओयू (MoU) होने के बाद से ही हरियाणा की ओर से कुछ तकनीकी बिंदुओं पर पेच फंसा हुआ था। हरियाणा के अधिकारी पानी की मात्रा और टैपिंग पॉइंट्स को लेकर स्पष्टता चाह रहे थे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान इस मुद्दे को केंद्रीय मंत्री के सामने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद बुधवार को मौके पर ही सभी लंबित बिंदुओं का निस्तारण कर दिया गया।
शेखावाटी की प्यास बुझाएगी 265 KM लंबी पाइपलाइन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत हथिनी कुंड बैराज से चूरू के हासियावास तक 265 किलोमीटर की तीन समानांतर पाइपलाइन बिछाई जाएंगी।
लाभार्थी जिले: चूरू, सीकर और झुंझुनूं।
कुल आवंटित जल: 577 एमसीएम।
अन्य स्रोत: भविष्य में रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ बांधों से भी इसी पाइपलाइन के जरिए पानी लाया जाएगा।
1994 का यमुना जल समझौता
यमुना जल का असली बंटवारा 12 मई 1994 को हुआ था। इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच पानी बांटा गया था। राजस्थान के हिस्से में मानसून अवधि के दौरान हथिनी कुंड से 1917 क्यूसेक जल आवंटित किया गया था। कुल पानी का बंटवारा कुछ इस प्रकार तय हुआ था:
| राज्य | पानी का हिस्सा (%) |
| हरियाणा | 40.6% |
| उत्तर प्रदेश | 35.1% |
| राजस्थान | 10.4% |
| दिल्ली | 6.3% |
| हिमाचल प्रदेश | 1.7% |
किशाऊ परियोजना और भिवाड़ी पर भी मंथन
बैठक में केवल यमुना जल ही नहीं, बल्कि किशाऊ परियोजना पर भी सभी संबंधित राज्यों में आम सहमति बनाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा, राजस्थान को दिल्ली-अलवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के जरिए जोड़ने और भिवाड़ी में जल भराव की गंभीर समस्या के समाधान पर भी दोनों राज्यों ने मिलकर काम करने का भरोसा दिया।
तीन दशकों से अटका यह प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरने को तैयार है। शेखावाटी क्षेत्र, जो लंबे समय से गहरे जल संकट से जूझ रहा है, उसके लिए यह पाइपलाइन जीवनदायिनी साबित होगी। केंद्रीय मंत्री और दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच हुई इस ऑन द स्पॉट सहमति ने राजस्थान के हक का पानी मिलने का रास्ता साफ कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
यमुना जल समझौता क्या है और यह कब हुआ था?
यमुना जल समझौता 12 मई 1994 को पांच राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, यूपी, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश) के बीच हुआ था। इसके तहत ऊपरी यमुना बेसिन के पानी का बंटवारा किया गया था, जिसमें राजस्थान को 10.4% पानी आवंटित किया गया था।
हथिनी कुंड-चूरू पाइपलाइन प्रोजेक्ट से किन जिलों को फायदा होगा?
इस प्रोजेक्ट से मुख्य रूप से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के तीन जिलों - चूरू, सीकर और झुंझुनूं को लाभ मिलेगा। हथिनी कुंड बैराज से करीब 265 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए मानसून का पानी यहां तक पहुंचाया जाएगा।
अब इस प्रोजेक्ट में अगला कदम क्या होगा?
सहमति बनने के बाद राजस्थान का जल संसाधन विभाग अब प्रोजेक्ट की डीपीआर को केंद्रीय जल आयोग के पोर्टल पर अपलोड करेगा। इसके बाद केंद्र सरकार से तकनीकी स्वीकृति और फंडिंग (वित्त पोषण) की प्रक्रिया शुरू होगी।
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