मनोज श्रीवास्तव ने राम पर बहुत कुछ लिखा है, उन्हीं से जानते हैं कि आखिर राम को लेकर वो क्या सोचते हैं। राम आज भी इतने प्रासंगिक क्यों है। <br /><br />