पहले दो प्रयास में प्रीलिम्स फेल, तीसरे में AIR 16 लाकर IAS बनीं अंशु प्रिया
चिकित्सा जगत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान एम्स (AIIMS) से एमबीबीएस करने और बतौर डॉक्टर सेवा देने के बाद किसी भी युवा का करियर पूरी तरह सेट माना जाता है।
शानदार सैलरी, समाज में ऊंचा रुतबा और एक सुरक्षित भविष्य - ये सब कुछ था बिहार की बेटी अंशु प्रिया के पास। लेकिन जब उन्होंने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की लाचारी और आम जनता की अज्ञानता को देखा, तो उन्होंने इस शानदार करियर को छोड़कर देश की सबसे कठिन परीक्षा की ओर रुख किया।
शुरुआती सफर इतना कठिन था कि लगातार दो बार वे प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में भी पास नहीं हो सकीं। लेकिन हार न मानने की जिद और अपनी कमियों को ढाल बनाने के पैंतरे ने उन्हें साल 2021 की यूपीएससी परीक्षा में पूरे भारत में 16वीं रैंक के साथ सीधे आईएएस (IAS) अधिकारी बना दिया।
आइए जानते हैं एम्स की डॉक्टर से सीधे प्रशासनिक शीर्ष पर पहुंचने वाली डॉ. अंशु प्रिया की यह अद्भुत कहानी।
मुंगेर की माटी और शिक्षकों का परिवार
अंशु प्रिया मूल रूप से बिहार के मुंगेर जिले की रहने वाली हैं। उनका परिवार शिक्षा से बेहद गहराई से जुड़ा रहा है। उनके पिता मुंगेर के ही एक गर्ल्स मिडिल स्कूल में प्रिंसिपल (प्रधान अध्यापक) हैं। मां एक कुशल गृहिणी हैं। उनके दादा-दादी भी अपने समय में स्कूल टीचर थे।
शिक्षकों के इस माहौल में पली-बढ़ी अंशु बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई मुंगेर की नेट्रोडेम एकेडमी और उच्च माध्यमिक विद्यालय से पूरी की।
इसके बाद वे मेडिकल की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा (राजस्थान) चली आईं। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उनका चयन एम्स पटना में एमबीबीएस के लिए हो गया।
जब डॉक्टर से आईएएस बनने की प्रेरणा मिली
एमबीबीएस की डिग्री पूरी करने के बाद अंशु एम्स पटना में ही बतौर रेजिडेंट फिजिशियन अपनी सेवाएं देने लगीं। इसके बाद उन्होंने राजधानी दिल्ली के एम्स सहित कुछ अन्य बड़े अस्पतालों और हेल्थकेयर फैसिलिटीज में भी काम किया।
एक डॉक्टर के रूप में काम करते हुए अंशु ने ग्राउंड जीरो पर एक कड़वी हकीकत देखी। अंशु ने महसूस किया कि गरीब और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को गंभीर और बुनियादी बीमारियों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। देश में इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था नीचे के स्तर पर बहुत लचर हैं।
अंशु को लगा कि एक डॉक्टर बनकर वे केवल अस्पताल में आने वाले मरीजों का ही इलाज कर सकती हैं। लेकिन अगर जमीनी स्तर पर पूरी व्यवस्था और नीतियों को बदलना है, ताकि लोगों को बीमार होने से पहले ही अच्छी सुविधाएं मिल सकें - तो उन्हें प्रशासनिक अधिकारी (IAS) बनना होगा। बस इसी सोच ने उनका रास्ता बदल दिया।
लगातार दो बार प्रीलिम्स में फेल
अंशु प्रिया ने साल 2019 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। एक डॉक्टर और एम्स की मेधावी छात्रा होने के बावजूद यूपीएससी का चक्रव्यूह बेहद कठिन था।
पहले और दूसरे प्रयास (2019 और 2020) वे यूपीएससी प्रीलिम्स (प्रारंभिक परीक्षा) भी पास नहीं कर सकीं। एक डॉक्टर के लिए यह बहुत बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
तीसरे प्रयास की अचूक रणनीति
अपनी गलतियों से सबक लेते हुए अंशु ने तीसरे प्रयास (साल 2021) में अपनी पूरी रणनीति बदल दी। उन्होंने सबसे ज्यादा ध्यान प्रीलिम्स के उस सेकेंड पेपर (CSAT) पर दिया, जिसकी वजह से वे पिछली बार फेल हुई थीं। उन्होंने परीक्षा से पहले कई क्वेश्चन पेपर्स और मॉक टेस्ट सॉल्व किए।
प्रीलिम्स पास करने के बाद उन्होंने अपने समय को दो हिस्सों में बांट दिया। आधा समय वे केवल रिवीजन को देती थीं और बाकी का आधा समय मॉक टेस्ट और टेस्ट सीरीज को समर्पित करती थीं।
मुख्य परीक्षा (Mains) में उन्होंने अपने कोर बैकग्राउंड यानी मेडिकल साइंस को ही अपना वैकल्पिक विषय चुना, जिसे उन्होंने एमबीबीएस के दौरान गहराई से पढ़ा था।
उनकी यह सुनियोजित और सटीक मेहनत रंग लाई। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया 16वीं रैंक (AIR 16) हासिल कर सीधे राजस्थान कैडर मेंभारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का पद हासिल किया।
आईएएस अंशु प्रिया के जीवन से युवाओं के लिए 4 अमूल्य सूत्र
कल तक जो डॉ. अंशु प्रिया एम्स के कमरों में स्टेथोसकोप लगाकर मरीजों की धड़कनें नाप रही थीं, आज वे देश की प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष गलियारों में बैठकर नीतियों का निर्माण कर रही हैं। लगातार दो बार प्रीलिम्स में फेल होने के बाद देश में 16वीं रैंक लाना उनके अद्भुत मानसिक साहस को दर्शाता है।
आईएएस डॉ. अंशु प्रिया की यह कहानी देश के हर उस अभ्यर्थी के लिए एक जलती हुई मशाल है जो एक या दो बार प्रीलिम्स फेल होने के बाद टूट जाते हैं। यह कहानी गवाह है कि अगर आपके कदम लड़खड़ाए हैं तो ठहरिए मत, अपनी गलतियों को सुधारिए और एक बार फिर पूरी ताकत से वार कीजिए, मंजिल आपका रास्ता रोक नहीं पाएगी।
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