सड़क हादसे ने बदला रास्ता: जज्बे की मिसाल बने आईएएस भुवनेश यादव
छत्तीसगढ़ कैडर के 2006 बैच के आईएएस भुवनेश यादव की कहानी सिर्फ एक अफसर बनने की नहीं, बल्कि हालातों को हराकर खुद को गढ़ने की मिसाल है। पांच अक्टूबर 1975 को राजस्थान के उदयपुर में जन्मे भुवनेश यादव ऐसे परिवार से आते हैं, जहां प्रशासनिक सेवा की प्रेरणा उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता भी आईएएस अधिकारी रहे। लेकिन उनकी सफलता की राह सीधी नहीं थी… यह संघर्ष, असमंजस और कई मोड़ों से होकर गुजरी।
पढ़ाई में तेज, लेकिन रास्ता खुद चुना
भुवनेश यादव ने उदयपुर के सेंट पॉल स्कूल से पढ़ाई की। उन्होंने एक नहीं, कई बड़े एंट्रेंस एग्जाम छत्तीसगढ़ कैडर क्लियर किए। आईआईटी, एनडीए, कर्नाटक इंजीनियरिंग… हर जगह उनका चयन हुआ। उन्होंने इंजीनियरिंग भी शुरू की, लेकिन सिर्फ 8 महीने बाद ही एहसास हुआ-ये मेरा रास्ता नहीं है। आखिरकार उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ दी, वापस उदयपुर लौटे और बीए किया। इसके बाद एमबीए (मार्केटिंग और फाइनेंस) और पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स किया। यह फैसला दिखाता है-सही दिशा चुनना, सफलता की पहली शर्त है।
नौकरी से बिजनेस तक का सफर
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की, फिर खुद का बिजनेस शुरू किया। कोचिंग सेंटर, कंप्यूटर सेंटर और यहां तक कि पेट्रोल पंप भी। सब कुछ ठीक चल रहा था…शादी हो चुकी थी, जिंदगी स्थिर थी, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
एक हादसा जिसने जिंदगी बदल दी
साल 2003 में एक भयानक सड़क दुर्घटना ने उनकी जिंदगी को झकझोर दिया। लंबे समय तक अस्पताल और बेड रेस्ट। बाहर जाना तक मना हो गया। यहीं से शुरू हुआ असली बदलाव। खाली समय में उन्होंने पढ़ाई शुरू की। पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग, फिर यूपीएससी। यही समय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया।
आईएएस बनने की कहानी
भुवनेश यादव की तैयारी की सबसे खास बात, उन्होंने बिना कोचिंग, घर पर सेल्फ स्टडी से यूपीएससी क्रैक किया। उनकी पत्नी नौकरी करती थीं और वे घर पर 6 महीने के बच्चे के साथ रहते हुए पढ़ाई करते थे। जिस सोफे पर बच्चे के साथ खेलते हुए उन्होंने पढ़ाई की, उस सोफे को आज भी उन्होंने संभालकर रखा है। यह सिर्फ एक फर्नीचर नहीं, उनकी मेहनत और जज़्बे की निशानी है। पहले प्रयास में ही उन्होंने UPSC निकालकर इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस हासिल की। दूसरे प्रयास में वे आईएएस बन गए।
प्रशासनिक कॅरियर
साल 2006 में आईएएस जॉइन करने के बाद भुवनेश यादव ने छत्तीसगढ़ में कई अहम पदों पर काम किया। बिलासपुर जिला पंचायत सीईओ , रायगढ़ नगर निगम कमिश्नर और नारायणपुर कलेक्टर के रूप में वे अपना सफर शुरू कर चुके थे। नारायणपुर में उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके ट्रांसफर पर पूरा शहर 2 दिन बंद रहा। यह किसी अफसर के लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है। कॅरियर की शुरुआत में भुवनेश यादव के एक साल में पांच ट्रांसफर हुए। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति ऐसे में निराश हो जाता है, लेकिन वे जो काम मिला उसे लगन से करते चले गए। आज भी वे नए आईएएस और यूपीएससी की तैयारी कर रहे बच्चों को मार्गदर्शन देते हैं।
कोरोना काल में नेतृत्व की मिसाल
कोरोना की पहली लहर में स्वास्थ्य आयुक्त और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के एमडी रहते हुए उन्होंने बेहतरीन काम किया। उन्होंने एक ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया, जिसे राज्य ही नहीं, केंद्र सरकार ने भी सराहा। इससे दूरस्थ इलाकों में विकास कार्यों की निगरानी आसान हो गई।
जिम्मेदारियों का लंबा सफर
अपने करियर में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। सचिव, महिला एवं बाल विकास, सचिव, उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम, पु नर्वास आयुक्त, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़, सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन और अभी वे समाज कल्याण विभाग के सचिव हैं।
युवाओं के लिए सीख
• रास्ता बदलना कमजोरी नहीं, समझदारी है। • मुश्किल वक्त ही असली मौके लेकर आता है। • सफलता के लिए महंगी कोचिंग नहीं, मजबूत इरादा चाहिए। • परिवार का साथ, हर जीत की नींव होता है। ये खबरें भी पढ़ें... दस बार स्टेट सर्विस में फेल हुए आईएएस अवनीश शरण, कहते हैं- सपनों की कोई सीमा नहीं होती
एक ताना, एक जिद और फिर... आईपीएस रतन लाल डांगी की प्रेरणादायक कहानी
स्लम से IPS तक… आईपीएस मयंक गुर्जर के संघर्ष और जिद की कहानी
आईएएस डॉ सौरभ सोनवणे: प्रशासन में किताबी ज्ञान नहीं, ऑन-द-स्पॉट निर्णय क्षमता आती है काम