स्कूल के दिनों में देखा सपना, पहले ही प्रयास में AIR 15, IAS रिया डाबी की कहानी
देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में जगह बनाना हर युवा का सपना होता है। लेकिन जब एक ही घर की दो सगी बहनें देश की इस सर्वोच्च परीक्षा को टॉप कर दिखाएं, तो वह पूरे देश के लिए एक मिसाल बन जाता है। हम बात कर रहे हैं देश की सबसे चर्चित प्रशासनिक बहनों की जोड़ी में से एक - आईएएस रिया डाबी की।
बड़ी बहन टीना डाबी (UPSC 2015 टॉपर) के पदचिह्नों पर चलते हुए रिया डाबी ने न केवल अपने पहले ही प्रयास में सफलता का झंडा गाड़ा, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 15 (AIR 15) हासिल कर अपनी एक स्वतंत्र और मजबूत पहचान बनाई।
वर्तमान में राजस्थान कैडर की इस होनहार अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO, राजस्थान) में OSD के अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है। आइए जानते हैं कॉलेज के गलियारों से शुरू होकर सीएमओ तक पहुंचने वाले उनके इस शानदार सफर को।
रगों में दौड़ती प्रशासनिक सेवा
रिया डाबी का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां अनुशासन और देश सेवा विरासत में मिली थी। उनके माता-पिता दोनों ही देश के प्रतिष्ठित तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर रहे हैं।
जहां पिता, श्री जसवंत डाबी, भारतीय दूरसंचार सेवा (ITS) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वहीं मां श्रीमती हिमाली डाबी, इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (IES) की अधिकारी रही हैं।
ऐसे पढ़े-लिखे और अनुशासित माहौल में पली-बढ़ी रिया बचपन से ही पढ़ाई में बेहद गंभीर और मेधावी थीं।
स्कूल के दिनों का सपना
रिया डाबी की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जब उनकी बड़ी बहन टीना डाबी ने साल 2015 में यूपीएससी परीक्षा में पूरे देश में पहली रैंक (AIR 1) हासिल की थी, तब रिया स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं।
घर के उस ऐतिहासिक जश्न और बड़ी बहन को देश की सेवा करते देख रिया के बाल-मन पर इसका असर पड़ा। उन्होंने उसी समय यह पक्का संकल्प ले लिया था कि वे भी एक दिन अपनी बहन की तरह आईएएस अधिकारी बनकर देश की मुख्यधारा में बदलाव लाएंगी।
दिन में 12-13 घंटे की पढाई
रिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। उन्होंने कॉलेज के दिनों से ही यूपीएससी की रूपरेखा तैयार कर ली थी। ग्रेजुएशन खत्म होते ही वे पूरी तरह तैयारी में डूब गईं।
रिया बताती हैं कि परीक्षा के दिनों में वे रोज़ाना 12 से 13 घंटे की कड़ी और अनुशासित पढ़ाई करती थीं। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए एक कॉन्स्टेंट शेड्यूल (नियमित समय-सारणी) का पालन किया।
रिया के अनुसार, उनकी सफलता के पीछे दो सबसे बड़े कारण रहे - पहला, रिवीजन पर अत्यधिक फोकस (जो पढ़ा उसे बार-बार दोहराना) और दूसरा, विषय का सही चुनाव। उनका मानना है कि यूपीएससी में ऑप्शनल सब्जेक्ट हमेशा अपनी रुचि के हिसाब से चुनना चाहिए, न कि किसी के दबाव में आकर।
उनकी यही सटीक रणनीति रंग लाई और साल 2020 की यूपीएससी परीक्षा के अपने पहले ही प्रयास में मात्र 23 साल की उम्र में ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल कर उन्होंने अपने बचपन के सपने को हकीकत में बदल दिया।
कला और सोशल मीडिया का खूबसूरत संतुलन
आमतौर पर माना जाता है कि सिविल सेवा की तैयारी करने वाले बेहद नीरस और किताबों में खोए रहने वाले होते हैं, लेकिन रिया इससे बिल्कुल अलग हैं:
पेंटिंग का शौक: पढ़ाई के थकाऊ घंटों के बाद बचे समय में रिया पेंटिंग करना पसंद करती थीं। यह उनकी बचपन की हॉबी है। खासकर इंडियन फोक आर्ट (भारतीय लोक कला) में उनकी गहरी रुचि है, जो उनकी रचनात्मक सोच को दर्शाता है।
सोशल मीडिया पर लोकप्रियता: रिया डाबी आज के डिजिटल युग के युवाओं के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 4.4 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, जहां वे अक्सर अपने जीवन और प्रशासनिक दौरों की तस्वीरें साझा करती हैं।
व्यक्तिगत जीवन और राजस्थान कैडर
रिया डाबी को राजस्थान कैडर आवंटित हुआ, जहां उन्होंने सहायक कलेक्टर (ट्रेनी) के रूप में अलवर से अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे उदयपुर के झाडोल में एसडीएम (SDM) के पद पर तैनात रहीं, जहां उन्होंने आदिवासी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का बेहतरीन कार्य किया।
रिया डाबी ने अप्रैल 2023 में आईपीएस (IPS) अधिकारी मनीष कुमार के साथ कोर्ट मैरिज की थी। मनीष कुमार 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उन्हें पहले महाराष्ट्र कैडर मिला था। शादी के बाद, नियमानुसार मनीष कुमार का कैडर बदलकर महाराष्ट्र से राजस्थान कर दिया गया, जिससे अब यह प्रशासनिक जोड़ा एक ही राज्य में अपनी सेवाएं दे रहा है।
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कल तक जो रिया डाबी अपनी बड़ी बहन के इंटरव्यू टीवी पर गर्व से देखती थीं, आज वे खुद राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था के सबसे रसूखदार और ताकतवर गलियारे - मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में बैठकर नीति-निर्माण और जनहित के कार्यों को गति दे रही हैं।
रिया डाबी की यह कहानी देश की हर उस बेटी के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है जो अपनी आंखों में ऊंचे ख्वाब सजाती है और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी दिन-रात की सुख-चैन की आहुति देने का जज्बा रखती है।
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