आईएएस रुक्मिणी रियार की प्रेरणादायक कहानी, कैसे बिना कोचिंग के सिविल सेवा परीक्षा में पाई ऑल इंडिया रैंक 2
असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी होती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है राजस्थान कैडर की आईएएस रुक्मिणी रियार ने। वह बचपन में इतनी कमजोर थीं कि छठी कक्षा में फेल हो गई थीं। एक कक्षा पार करने में उन्हें दो साल लग गए थे। लेकिन हार न मानने वाली रुक्मिणी ने वह कर दिखाया, जिसका लाखों एकडेमिक टॉपर सपना देखते हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की।
जब पास होना ही था मुश्किल
रुक्मिणी रियार का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ। उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार एक रिटायर्ड डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं और माता गृहिणी। बचपन में रुक्मिणी का पढ़ाई में मन नहीं लगता था। नतीजा यह हुआ कि कक्षा 6 में वे फेल हो गईं। फेल होने के बाद परिवार के लोग और शिक्षकों के सामने जाने की उनकी हिम्मत नहीं होती थी। यह सोचकर शर्म आती थी कि बाकी लोग क्या सोच रहे होंगे।
कई दिनों तक इस तनाव में रहने के बाद उन्होंने फैसला किया कि इस समस्या से निपटने का जिम्मा खुद उठाना होगा। उन्होंने उसी डर को अपनी प्रेरणा बना लिया और ठान लिया कि बहाने बनाने या दूसरों को दोष देने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसके बाद उन्होंने मेहनत की और उनका मन पढ़ाई में लगने लगा।
2012 बैच की रुक्मिणी ने शुरूआती शिक्षा गुरदासपुर में पूरी करने के बाद हिमाचल प्रदेश के डलहौजी स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल में आगे की शिक्षा प्राप्त की। यहां उन्होंने पूरी लगन से पढ़ाई की और बाकी की स्कूली शिक्षा अच्छे अंकों से पूरी की। यहीं से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया और अब वह पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहती थीं।
पोस्ट ग्रेजुएशन में बनीं गोल्ड मेडलिस्ट
रुक्मिणी ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से सोशल साइंसेज में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) में दाखिला लिया और यहां से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। यहां भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी और गोल्ड मेडल हासिल किया।
इंटर्नशिप में मिली UPSC की प्रेरणा
पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद रुक्मिणी ने योजना आयोग, मैसूर के अशोदया और मुंबई की अन्नपूर्णा महिला मंडल जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। यहां काम करते हुए उन्होंने समाज की समस्याओं को बहुत करीब से देखा और मन बना लिया कि वह बदलाव लाने वाली व्यवस्था का हिस्सा बनेंगी। यहीं से उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया।
बिना कोचिंग के ऐसे की तैयारी
रुक्मिणी रियार ने अपनी तैयारी की रणनीति बताई जिसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
स्वयं अध्ययन: उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान के बजाय अपनी मेहनत और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया।
NCERT का आधार: कक्षा 6 से 12 तक की सभी NCERT किताबों को अपनी तैयारी का मुख्य आधार बनाया और उन्हें बारीकी से पढ़ा।
करंट अफेयर्स: रोजाना समाचार पत्र पढ़कर और मासिक पत्रिकाओं के जरिए समसामयिक घटनाओं पर पकड़ मजबूत की।
मॉक टेस्ट और अभ्यास: ढेरों मॉक टेस्ट दिए ताकि समय प्रबंधन में सुधार हो सके और परीक्षा के दौरान होने वाली गलतियों को कम किया जा सके।
पुराने प्रश्नपत्र: परीक्षा के पैटर्न और प्रकृति को समझने के लिए पिछले सालों के UPSC प्रश्नपत्रों को नियमित रूप से हल किया।
आत्मविश्वास और निरंतरता: उनका मानना है कि सफलता के लिए कोचिंग से ज्यादा आत्मविश्वास और लगातार की गई मेहनत जरूरी है।
ऑल इंडिया रैंक 2 की हासिल
साल 2011 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में रुक्मिणी रियार ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की। उस समय यह उन सभी के लिए एक बड़ा सरप्राइज था, जो उनके बचपन के संघर्षों को जानते थे। एक लड़की जो कभी कक्षा 6 में फेल हुई थी, वह देश की दूसरी सबसे मेधावी छात्रा बन गई।
प्रशासनिक उत्कृष्टता के लिए मिले कई सम्मान
रुक्मिणी रियार को प्रशासनिक उत्कृष्टता और जन-सेवा के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। बच्चों के अधिकार और पोषण के क्षेत्र में उनके सराहनीय कार्यों के लिए दिल्ली आयोग द्वारा 'Children's Champion's Award' (2023) दिया गया, तो वहीं महिला सशक्तिकरण के लिए राजस्थान सरकार ने उन्हें 'इन्दिरा महिला शक्ति प्रोत्साहन एवं सम्मान' (2023) से सम्मानित किया। डिजिटल गवर्नेंस और तकनीक के कुशल प्रयोग के लिए उन्हें 'State E-Governance Award (Gold)' और 'State E-Governance Award 2021-22' प्राप्त हुए।
पति भी हैं आईएएस
रुक्मिणी रियार का प्रशासनिक सफर जितना प्रभावशाली है, उनका निजी जीवन भी उतना ही प्रेरणादायी है। उनके पति सिद्धार्थ सिहाग भी 2012 बैच के राजस्थान कैडर के ही IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने यूपीएससी में 42वीं रैंक हासिल की थी।
पर्यटन विभाग की निदेशक के रूप में दे रही हैं सेवाएं
आईएएस अधिकारी रुक्मिणी रियार वर्तमान में राजस्थान पर्यटन विभाग की निदेशक (आयुक्त) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन इससे पहले उन्होंने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी संभाली है। इस पद पर आने से ठीक पहले वे नगर निगम जयपुर ग्रेटर में आयुक्त के पद पर तैनात थीं। इससे पूर्व उन्होंने हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में जिला कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सराहनीय बदलाव किए। इसके अलावा, वे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में संयुक्त शासन सचिव और बूंदी व बारां में जिला परिषद की सीईओ भी रह चुकी हैं।
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