आईएएस सौम्या झा ने डॉक्टरी छोड़ चुनी देशसेवा की राह, नवाचार से बनाई पहचान
राजस्थान के प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया की सुर्खियों तक आईएएस डॉ. सौम्या झा आज एक ऐसा नाम बन चुकी हैं, जो सादगी और ड्यूटी के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं। वर्तमान में दौसा जिले की कलेक्टर के रूप में तैनात डॉ. सौम्या ने यह सिद्ध किया है कि यदि आपके पास एक स्पष्ट विजन और जनसेवा का जुनून हो तो आप तकनीक और संवेदनशीलता के संगम से समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
बिहार की जड़ें और मध्य प्रदेश की आबोहवा
सौम्या झा का जन्म 8 जून 1993 को बिहार के दरभंगा जिले में हुआ था। हालांकि, नियति उन्हें जन्म के महज 15 दिन बाद ही मध्य प्रदेश ले आई। उनके पिता संजय कुमार झा एमपी कैडर के आईपीएस (IPS) अधिकारी थे। पिता की वर्दी और उनके प्रति समाज के सम्मान ने सौम्या के बाल मन पर गहरा प्रभाव डाला।
पिता की अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग के कारण उनका बचपन भोपाल, खंडवा, दमोह, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों में बीता, जिससे उन्हें विभिन्न संस्कृतियों और सामाजिक चुनौतियों को करीब से देखने का अवसर मिला।
डॉक्टरी की पढ़ाई और यूपीएससी कॉलिंग
सौम्या की शैक्षणिक यात्रा किसी मेधावी छात्र की आदर्श कहानी जैसी है। उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में से एक मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (दिल्ली) से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री हासिल की। 2015 में इंटर्नशिप पूरी करने के बाद उनके पास चिकित्सा के क्षेत्र में एक शानदार और सुरक्षित भविष्य था।
लेकिन, उनके भीतर कहीं न कहीं वह वर्दी का आकर्षण और समाज के लिए कुछ बड़ा करने की चाह जीवित थी। उन्होंने तय किया कि वे केवल मरीजों का ही नहीं, बल्कि उस सिस्टम का भी इलाज करेंगी जहां से आम आदमी की परेशानियां शुरू होती हैं।
पहले ही प्रयास में अखिल भारतीय रैंक 58
यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है, लेकिन डॉ. सौम्या ने इसे अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन से पहले ही प्रयास में फतह कर लिया। साल 2016 की परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 58 हासिल की।
पढ़ाई विद AI
डॉ. सौम्या झा केवल आदेश देने वाली अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे एक इनोवेटर भी हैं। टोंक कलेक्टर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘पढ़ाई विद AI’ नाम की एक अनूठी पहल शुरू की। उनका मकसद तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक और समावेशी बनाना था। इस पहल के जरिए जिले के 300 से अधिक स्कूलों के बच्चे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गणित जैसे कठिन विषय के डर को मात दे रहे हैं।
व्यक्तिगत जीवन और कैडर का बदलाव
सौम्या झा को शुरुआत में हिमाचल प्रदेश कैडर मिला था, लेकिन राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी अक्षय गोदारा से विवाह के बाद उन्होंने अपना कैडर बदलकर राजस्थान करवा लिया। आज यह पावर कपल राजस्थान के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
युवाओं के लिए सबक
डॉ. सौम्या झा का जीवन हमें कुछ महत्वपूर्ण सबक सिखाता है:
लक्ष्य की स्पष्टता: यदि आपने एक बार लक्ष्य तय कर लिया है, तो करियर का कोई भी मोड़ (जैसे डॉक्टरी से आईएएस) आपकी सफलता में बाधा नहीं बन सकता।
पहली कोशिश ही आखिरी हो: उन्होंने पहले ही प्रयास में टॉप रैंक लाकर यह दिखाया कि सही रणनीति से सफलता पहले ही प्रयास में संभव है।
तकनीक का साथ: वे मानती हैं कि बदलते समय के साथ हमें AI जैसी तकनीक का उपयोग जनकल्याण के लिए करना चाहिए।
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