घर में रहकर की तैयारी, पहले प्रयास में ही IAS अधिकारी बनी श्रद्धा गोमे
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को पार करना जहां लोगों के लिए वर्षों की तपस्या बन जाता है, वहीं देश में कुछ ऐसे भी बिरले मेधावी होते हैं जो अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता और सटीक रणनीति के बल पर पहले ही प्रयास में इस चक्रव्यूह को भेद देते हैं।
ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है स्कूल और कॉलेज की हर परीक्षा में टॉप करने वाली, वर्ष 2021 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी श्रद्धा गोमे की।
उन्होंने लॉ की पढाई में 13 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। लंदन व मुंबई जैसी महानगरीय चकाचौंध में बतौर लीगल मैनेजर काम किया। लेकिन जब देश की सेवा का संकल्प लिया, तो अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 60 हासिल कर सबको हैरान कर दिया। आइए जानते हैं उनकी इस शानदार और अनुशासित सफलता के सफर को।
इंदौर की माटी और पढ़ा-लिखा परिवार
श्रद्धा गोमे मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं। उनका परिवार एक बेहद सम्मानित और शिक्षित पृष्ठभूमि से आता है। पिता श्री रमेश कुमार गोमे, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं। मां श्रीमती वंदना गोमे, एक कुशल होममेकर (गृहिणी) हैं।
श्रद्धा बचपन से ही असाधारण रूप से प्रतिभावान थीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा इंदौर के सेंट राफेल हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। वे सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं, दोनों ही परीक्षाओं में पूरे इंदौर जिले की टॉपर रहीं।
इतना ही नहीं, स्कूल के दिनों में उन्होंने इंटरनेशनल डिबेट (अंतरराष्ट्रीय वाद-विवाद) प्रतियोगिता जीतकर वैश्विक स्तर पर अपनी डिबेट कला का लोहा मनवाया था।
क्लैट में टॉप और बेंगलुरु एनएलयू में 13 गोल्ड मेडल
स्कूली शिक्षा के बाद श्रद्धा ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी क्लैट (CLAT) की परीक्षा को क्रैक किया। CLAT में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित लॉ संस्थान नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में दाखिला मिला।
साल 2018 में जब उन्होंने अपनी बीए एलएलबी (BA LLB) की डिग्री पूरी की, तो उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान रचा जो किसी भी छात्र के लिए एक सपना होता है। श्रद्धा ने अपने पांच साल के लॉ कोर्स के दौरान 13 गोल्ड मेडल जीते, जिसने उन्हें कॉलेज की सबसे लोकप्रिय छात्रा बना दिया।
लंदन की आलीशान नौकरी
ग्रेजुएशन पूरा होते ही श्रद्धा की असाधारण प्रतिभा को देखते हुए देश-विदेश की बड़ी कंपनियों में उनके लिए रास्ते खुल गए। उन्हें मशहूर मल्टीनेशनल कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड में बतौर लीगल मैनेजर के पद पर शानदार नौकरी मिली।
इस नौकरी के दौरान वे अक्सर भारत (मुंबई) और ब्रिटेन (लंदन) के बीच अप-डाउन करती थीं। कॉर्पोरेट जगत में उनका करियर बेहद शानदार था। लेकिन लंदन की उस चकाचौंध के बीच भी श्रद्धा के मन में हमेशा एक बात कौंधती थी।
इस कानूनी समझ और मेधा का उपयोग अपने देश के जमीनी स्तर के लोगों के कल्याण और प्रशासनिक नीतियों को सुधारने के लिए करना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने कॉर्पोरेट लाइफ को अलविदा कहा और यूपीएससी के मैदान में उतर गईं।
बिना किसी कोचिंग के, घर पर रहकर की स्मार्ट स्टडी
श्रद्धा जब 2020 में तैयारी के मैदान में उतरीं, तो उन्होंने दिल्ली जाकर किसी महंगी कोचिंग में एडमिशन लेने के बजाय अपने घर (इंदौर) में रहकर सेल्फ स्टडी (खुद की पढ़ाई) करने का फैसला किया। उनकी रणनीति बेहद व्यावहारिक और सटीक थी:
लॉ ऑप्शनल और नोट्स: चूंकि उनका बैकग्राउंड कानून का था, इसलिए उन्होंने मुख्य परीक्षा में लॉ (Law) को ही अपना वैकल्पिक विषय चुना। उन्होंने अपने कॉलेज के पुराने लॉ नोट्स से ही गहराई से रिवीजन किया।
25 सालों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण: श्रद्धा ने किसी भी भटकाव से बचने के लिए यूपीएससी के आधिकारिक सिलेबस और पिछले 25 वर्षों के प्रश्न पत्रों थोरो स्टडी किया। इससे उन्हें समझ आ गया कि परीक्षा की डिमांड क्या है।
पढ़ाई की अवधि और ऑनलाइन माध्यम: शुरुआती दौर में वे रोज़ाना 8 से 10 घंटे की फोकस्ड पढ़ाई ऑनलाइन माध्यमों की मदद से करती थीं।
आइसोलेशन की जगह फोकस: श्रद्धा की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने तैयारी के दौरान खुद को दुनिया से पूरी तरह काटा नहीं था। वे सामान्य जीवन जीती थीं, लेकिन जब वे पढ़ने बैठती थीं, तब वे खुद को हर तरह के डिस्ट्रैक्शन (भटकाव) से दूर कर लेती थीं।
पहले ही प्रयास में AIR 60
प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा को अपने पहले ही प्रयास में पास करने के बाद, श्रद्धा इंटरव्यू की तैयारी के लिए मात्र 15 दिनों के लिए दिल्ली आईं, जहां उन्होंने कई मॉक इंटरव्यू देकर अपनी कमियों को सुधारा। जब परिणाम आया, तो श्रद्धा गोमे ने महज़ 26 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 60वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
राजस्थान कैडर में पोस्टिंग
चयन के बाद श्रद्धा गोमे को राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने अपनी प्रशासनिक पारी की शुरुआत सहायक कलेक्टर (ट्रेनी) के रूप में की और वर्तमान में वे राजस्थान के झालावाड़ के भवानी मंडी में उपखंड अधिकारी (SDM) / प्रशासनिक पद पर तैनात हैं, जहां वे पूरी ईमानदारी और कानूनी सूझबूझ के साथ आम जनता को राहत पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।
आईएएस श्रद्धा गोमे की जर्नी से अभ्यर्थियों के लिए 4 सबसे बड़े सूत्र
कल तक जो श्रद्धा गोमे लंदन की अदालतों और कॉर्पोरेट बोर्ड मीटिंग्स में कंपनियों के कानूनी मसले सुलझा रही थीं, आज वे राजस्थान के भवानी मंडी में बैठकर आम जनता के हक और प्रशासनिक न्याय की फाइलें निपटा रही हैं।
स्कूल की टॉपर से लेकर 13 गोल्ड मेडल और पहले ही प्रयास में आईएएस बनने तक का उनका यह सफर यह साबित करता है कि निरंतरता, एकाग्रता और खुद की क्षमताओं पर किया गया अटूट विश्वास ही आपको सफलता के सर्वोच्च शिखर पर स्थापित करता है।
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