बच्चा बार-बार छूता है आपका चेहरा तो इसे शरारत न समझें, मनोविज्ञान के मुताबिक इसके पीछे ये खास वजह

Arun Tiwari | Oct 08, 2026, 17:48 IST
स्पर्श का मनोविज्ञान
छोटे बच्चों की कई आदतें माता-पिता को बेहद प्यारी लगती हैं, तो कुछ आदतें उन्हें परेशान भी करती हैं। ऐसी ही एक आदत है बच्चे का बात करते समय बार-बार माता-पिता का चेहरा छूना। कई बार बच्चा कहानी सुनाते हुए गाल पर हाथ रख देता है, नाक छूता है, ठुड्डी पकड़ता है या भौंहों पर उंगली फेरने लगता है।

छोटे बच्चों की कई आदतें माता-पिता को बेहद प्यारी लगती हैं, तो कुछ आदतें उन्हें परेशान भी करती हैं। ऐसी ही एक आदत है बच्चे का बात करते समय बार-बार माता-पिता का चेहरा छूना। कई बार बच्चा कहानी सुनाते हुए गाल पर हाथ रख देता है, नाक छूता है, ठुड्डी पकड़ता है या भौंहों पर उंगली फेरने लगता है। माता-पिता हाथ हटाते हैं, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद बच्चा फिर वही करता है।



आम तौर पर इसे बच्चे की शरारत या सिर्फ एक आदत मान लिया जाता है। लेकिन बाल मनोविज्ञान के नजरिए से शारीरिक स्पर्श बच्चों के लिए संवाद और जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह नहीं कहते कि किसी बच्चे का चेहरा छूना हमेशा किसी एक खास भावना का संकेत होता है। इसके पीछे बच्चे की उम्र, परिस्थिति और उस समय का भावनात्मक माहौल महत्वपूर्ण होता है।



बात करते समय स्पर्श भी हो सकता है संवाद का हिस्सा

छोटे बच्चों के लिए बातचीत सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं होती। वे बात करते समय माता-पिता के करीब बैठ सकते हैं, उनका हाथ पकड़ सकते हैं, बालों से खेल सकते हैं या शरीर से सटकर रह सकते हैं। स्पर्श उनके लिए बातचीत का स्वाभाविक हिस्सा बन सकता है। सामाजिक स्पर्श और मानव विकास से जुड़े शोधों में पाया गया है कि स्पर्श का संबंध लगाव, संवाद, सामाजिक सीखने और भावनाओं को नियंत्रित करने जैसी प्रक्रियाओं से हो सकता है।



खासकर बचपन के शुरुआती वर्षों में बच्चे तेजी से सामाजिक और भावनात्मक रिश्तों को समझ रहे होते हैं। ऐसे में माता-पिता से मिलने वाला शारीरिक संपर्क उनके लिए रिश्ते की निकटता महसूस करने का एक तरीका हो सकता है।




क्या बच्चा यह जानना चाहता है कि आप उसकी बात सुन रहे हैं

कई बार बच्चे उस समय माता-पिता का चेहरा छूते हैं, जब उनका ध्यान कहीं और होता है। उदाहरण के लिए, मां खाना बना रही है, पिता मोबाइल देख रहे हैं या लैपटॉप पर काम कर रहे हैं और बच्चा स्कूल में हुई कोई घटना सुना रहा है। ऐसे में बच्चा बार-बार पास आने या चेहरा छूने की कोशिश कर सकता है। इसे सीधे तौर पर अटेंशन सीकिंग कहना सही नहीं होगा, लेकिन यह माता-पिता का ध्यान बातचीत में बनाए रखने का एक तरीका जरूर हो सकता है।



बच्चा शायद यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सामने वाला उसकी बात सुन रहा है और उसके साथ जुड़ा हुआ है। इसलिए अगली बार जब बच्चा आपका चेहरा छुए, तो सिर्फ उसका हाथ हटाने के बजाय यह भी देखें कि उस समय वह आपसे क्या कहना चाह रहा है।



छूने से बच्चे को मिलते हैं कई संकेत

माता-पिता का चेहरा बच्चे के लिए सामाजिक संकेतों का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। बच्चा चेहरे को देखकर समझने की कोशिश करता है कि सामने वाला खुश है, नाराज है, उसकी बात सुन रहा है या उसकी कहानी पर प्रतिक्रिया दे रहा है। एक अध्ययन में 4 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों और उनकी माताओं के बीच बातचीत के दौरान स्पर्श और सामाजिक जानकारी पर ध्यान देने के बीच संबंध देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि मातृ स्पर्श की अधिकता बच्चों के सामाजिक संकेतों की ओर अधिक ध्यान देने से जुड़ी थी। हालांकि यह अध्ययन सीधे बच्चे द्वारा माता-पिता का चेहरा छूने पर नहीं था। इसलिए इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चेहरे को छूना किसी एक खास मनोवैज्ञानिक जरूरत का प्रमाण है।




स्पर्श बच्चे को सुरक्षा का एहसास भी दे सकता है

माता-पिता का स्पर्श बच्चों के लिए भावनात्मक सुरक्षा से भी जुड़ा हो सकता है। एक अन्य अध्ययन में 138 माता-पिता और बच्चों की जोड़ियों को शामिल किया गया था। इसमें देखा गया कि माता-पिता का हल्का और संक्षिप्त स्पर्श बच्चों की सामाजिक खतरे से जुड़ी प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है। अधिक सामाजिक चिंता वाले बच्चों में माता-पिता के स्पर्श का संबंध अधिक भरोसे से भी पाया गया। यह अध्ययन भी बच्चे के माता-पिता का चेहरा छूने पर आधारित नहीं था। इसलिए इसे इस व्यवहार का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि भरोसेमंद माता-पिता का शारीरिक संपर्क बच्चों के लिए भावनात्मक संदेश रख सकता है।



हर बार कोई गहरी मनोवैज्ञानिक वजह नहीं होती

माता-पिता को हर बच्चे की आदत के पीछे कोई गहरी वजह तलाशने की जरूरत भी नहीं है। कई बार बच्चा सिर्फ स्पर्श को पसंद करता है। उसे मां की नाक छूना मजेदार लगता है, पिता की मूंछ या भौंह से खेलना अच्छा लगता है या वह देखना चाहता है कि ऐसा करने पर सामने वाला कैसे प्रतिक्रिया देता है। बच्चे अपने आसपास की दुनिया को इंद्रियों के माध्यम से भी समझते हैं। इसलिए चेहरा छूना सिर्फ जिज्ञासा या खेल का हिस्सा भी हो सकता है। अगर बच्चा सभी लोगों के साथ ऐसा करता है, तो यह भावनात्मक जरूरत के बजाय आदत या स्पर्श संबंधी जिज्ञासा हो सकती है।




माता-पिता को क्या करना चाहिए

अगर बच्चे का स्पर्श हल्का है और माता-पिता को असहज नहीं करता, तो हर बार उसे रोकना जरूरी नहीं है। इसके बजाय ध्यान दें कि बच्चा उस समय कैसा महसूस कर रहा है। क्या वह स्कूल की कोई महत्वपूर्ण बात बता रहा है क्या वह परेशान है। क्या वह थका हुआ है। या सिर्फ आपके साथ खेल रहा है। साथ ही बच्चे को व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना भी सिखाना जरूरी है। अगर वह आंखों में उंगली डाल रहा है, होंठ खींच रहा है या मना करने के बाद भी चेहरा छूता रहता है, तो शांत तरीके से सीमा तय की जा सकती है जैसे, चेहरा छू सकते हो, लेकिन धीरे से या ‘मेरा हाथ पकड़ लो।



असली वजह चेहरा नहीं, रिश्ता हो सकता है

बच्चे के इस व्यवहार को समझने का सबसे बेहतर तरीका शायद यह पूछना है कि मेरा बच्चा मेरा चेहरा क्यों छू रहा है के बजाय उस समय हमारे बीच क्या हो रहा है। हो सकता है वह आपका ध्यान चाहता हो, आपके करीब महसूस करना चाहता हो, स्नेह जता रहा हो या सिर्फ किसी परिचित स्पर्श से खुद को सहज महसूस कर रहा हो। और यह भी संभव है कि उसे बस आपकी नाक बहुत मजेदार लगती हो।



इसलिए बच्चे के हर स्पर्श को किसी खास मनोवैज्ञानिक संकेत से जोड़ना सही नहीं होगा। लेकिन अगर वह प्यार से आपका चेहरा छूते हुए अपनी कहानी सुना रहा है, हंस रहा है और आपके करीब रहना चाहता है, तो यह माता-पिता और बच्चे के बीच बने भरोसे और जुड़ाव का एक छोटा-सा हिस्सा हो सकता है। बच्चे को ध्यान से सुनना, गर्मजोशी से प्रतिक्रिया देना और उसकी व्यक्तिगत सीमाओं के साथ अपनी सीमाओं का सम्मान करना इस रिश्ते को और मजबूत बना सकता है।



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