UP में नया खेल शुरू, मायावती ने कांग्रेस नेताओं को दरवाजे से लौटाया
पहले, समझें क्या है पूरा मामला
- Congress के दो बड़े नेता Mayawati के घर पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हुई।
- पार्टी ने कहा यह निजी यात्रा थी, लेकिन बाद में नोटिस भी जारी किया।
- दोनों नेता SC Department से जुड़े हैं जो दलित राजनीति का केंद्र है।
- ठीक उसी दिन Rahul Gandhi Raebareli में दलित कार्यक्रमों में थे।
UP Election 2027. बिना appointment किसी के घर पहुंच जाओ और वो मिलें ही नहीं! फिर वापस आकर कहो- बस हाल-चाल पूछने गए थे… यह UP की राजनीति का वो पल है जो बिना कुछ हुए भी सबकुछ कह देता है।
मामला 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जो पिछले सप्ताह चुपचाप घट गया। अगर आप भारत की राजनीति में रुचि रखते हैं तो यह खबर दिखाती है कि दलित वोट किस दिशा में जा सकता है और कौन सी पार्टी उस पर दावा ठोकने की कोशिश में है
Mayawati के दरवाजे पर Congress
लखनऊ में 20 मई 2026 की शाम एक ऐसी घटना हुई जिसने UP की राजनीति में हलचल मचा दी। कांग्रेस के SC Department के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और सांसद तनुज पूनिया बीएसपी प्रमुख मायावती के निवास पर पहुंचे। कोई appointment नहीं था। Mayawati ने मिलने से मना कर दिया और दोनों नेता वापस आ गए।
यहां तक तो घटना साधारण लग सकती है। लेकिन जो explanation आई वो और ज्यादा चर्चा का विषय बन गई।
बस हाल-चाल पूछने गए थे
Tanuj Punia ने कहा कि SC Department की बैठक में Mayawati की तबीयत की चर्चा हुई। उनका घर पास था, इसलिए वो शिष्टाचार के लिए चले गए। उन्होंने कहा कि Mayawati एक वरिष्ठ दलित नेता हैं और करीब 70 साल की हैं। मिलने जाना जरूरी लगा।
कांग्रेस ने खुद को किया किनारे
Congress के UP प्रभारी और AICC (All India Congress Committee) महासचिव अविनाश पांडे ने साफ कहा कि इस यात्रा से पार्टी का कोई संबंध नहीं है। न उन्होंने निर्देश दिया, ना ही राहुल गांधी ने। दोनों नेताओं को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।
यह नोटिस खुद एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। Congress नेतृत्व यह दिखाना चाहता था कि SP (Samajwadi Party) के साथ गठबंधन अभी भी पहली प्राथमिकता है।
SP से गठबंधन, लेकिन दरारें भी हैं
UP में Congress और SP का गठबंधन है। SP प्रमुख Akhilesh Yadav ने खुद कहा है कि 2027 में दोनों दल साथ लड़ेंगे, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है।
Congress के कई नेताओं को डर है कि SP उन्हें पर्याप्त सीटें नहीं देगी। यही डर उन्हें BSP और दूसरी ताकतों की तरफ देखने पर मजबूर कर रहा है। इनकी दलील है कि संविधान, दलित अधिकार और अल्पसंख्यक मुद्दों पर सभी विपक्षी ताकतों को एकजुट होना चाहिए।
इसे ऐसे समझिए, मान लीजिए एक दुकान में दो partners हैं। ऊपर से सब ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से एक partner सोच रहा है कि अगर यह partnership टूटे तो कोई backup तो होना चाहिए। Mayawati के दरवाजे पर यात्रा उसी बैकअप की तलाश जैसी लगती है।
राहुल गांधी उसी दिन रायबरेली में
जिस दिन यह सब हो रहा था, Rahul Gandhi अपने संसदीय क्षेत्र Raebareli में दो दलित कार्यक्रमों में थे। उन्होंने बहुजन स्वाभिमान सभा को संबोधित किया और स्वतंत्रता सेनानी Veera Pasi की प्रतिमा का उद्घाटन किया।
यह टाइमिंग संयोग था या रणनीति, इस पर अलग-अलग राय है। लेकिन इतना साफ है कि Congress दलित वोटरों से सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दे रही है- चाहे रास्ता कोई भी हो।
BSP की अपनी चुनौतियां
BSP पिछले कुछ सालों में कमजोर हुई है। 2022 UP विधानसभा चुनाव में BSP को बड़ा झटका लगा था। लेकिन दलित वोटों पर मायावती की पकड़ अभी भी एक राजनीतिक ताकत है जिसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता।
BSP के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक Mayawati का ब्राह्मण वोटरों पर बढ़ता जोर एक नई रणनीति का हिस्सा है। इसका मतलब यह हो सकता है कि BSP किसी बड़े गठबंधन में जाने की बजाय अपना अलग रास्ता चुन सकती है।
मुश्किल दौर से गुजर रही हैं BSP और कांग्रेस
इस समय BSP और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य में दोनों ही अपनी जमीन तलाश रही हैं। ऐसे में कोशिशें करना कोई बुरी बात नहीं है। मगर दिक्कत ये है कि यूपी में SP, BSP और Congress का एक साथ आना आज की तारीख में लगभग असंभव है। ऐसे में कांग्रेस अगर मायावती से पींगें बढ़ाना शुरू करेगी तो अखिलेश यादव के साथ दोस्ती जारी रखने में दिक्कतें आ सकती हैं।
तीन पार्टियां, एक वोट बैंक
UP में दलित वोटर चुनाव के नतीजों को पलटने की ताकत रखते हैं। BJP ने भी इसे समझा है। हाल ही में UP Cabinet के विस्तार में OBC (Other Backward Classes), दलित और ब्राह्मण चेहरों को साधने की कोशिश साफ दिखी।
अब Congress, SP, BSP और BJP, चारों दलित वोटर को अपनी तरफ खींचना चाहते हैं। हाल-चाल वाली यात्रा उसी बड़ी सियासत का एक छोटा-सा हिस्सा है।
एक बात जो अकसर नजरअंदाज होती है- UP की दलित राजनीति (dalit politics)अकसर वहां होती है, जहां दिखती नहीं। इस पूरे प्रकरण में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि क्या नेतृत्व को पहले से पता था और नोटिस सिर्फ बचाव की कवायद थी। जवाब अभी किसी के पास नहीं है।
आगे क्या होगा
इस छोटी घटना ने Congress के अंदर की दरारें सार्वजनिक कर दी हैं। नोटिस जारी होना दिखाता है कि नेतृत्व नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
लंबी अवधि में 2027 करीब आते-आते यह देखना होगा कि दलित वोट किस खेमे में जाता है। अभी खुले सवाल हैं- क्या Congress वाकई BSP से बात करना चाहती है? क्या Mayawati किसी के साथ जाएंगी या अकेले लड़ेंगी?
अब आप क्या करें: UP के 2027 चुनाव में गठबंधन की खबरों पर नजर रखें। अगले कुछ महीनों में तस्वीर साफ होने लगेगी।
BSP का सबसे बड़ा पतन: UP में 403 सीटें और सिर्फ एक MLA
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 बहुजन समाज पार्टी के इतिहास का सबसे कठिन अध्याय साबित हुआ। BSP ने सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन जीत सिर्फ एक सीट पर मिली। बलिया जिले की रसड़ा सीट, जहां पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह ने 87,887 वोट (43.82%) पाकर जीत दर्ज की।
वोट शेयर के मोर्चे पर BSP को 12.9% वोट मिले और वह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी, पर सीटों में वह कहीं नहीं थी। तुलना करें तो 2017 में BSP ने 22% से अधिक वोट पाए थे और 19 सीटें जीती थीं। यानी पांच साल में वोट शेयर करीब 10 प्रतिशत लुढ़क गया।
विश्लेषकों के अनुसार BSP का वोट बड़े पैमाने पर समाजवादी पार्टी की तरफ शिफ्ट हुआ। जिन सीटों पर BSP का वोट शेयर 9% से अधिक गिरा, वहां SP+ को औसतन 6% का फायदा मिला।
1989 के बाद यह BSP का सबसे खराब वोट शेयर था। यानी पार्टी के शुरुआती संघर्ष के दिनों जैसी स्थिति। BJP ने 41.29% और SP ने 32.06% वोट शेयर के साथ क्रमशः 255 और 111 सीटें जीतीं।
संक्षेप में: करोड़ों वोट और शून्य सत्ता BSP का यह आंकड़ा बताता है कि वोट और सीट के बीच का फर्क ही किसी पार्टी की असली कहानी कहता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
UP में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित राजनीति में बड़ा बदलाव हो रहा है। Congress और BSP के बीच किसी भी तरह की नजदीकी UP के मौजूदा गठबंधन समीकरणों को बदल सकती है। यह घटना यह भी दिखाती है कि पार्टी अनुशासन और नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच खींचतान किस तरह चुनावी राजनीति को प्रभावित करती है।
FAQ
- Mayawati से मिलने Congress नेता क्यों गए थे?
Congress नेताओं ने कहा यह एक निजी शिष्टाचार यात्रा थी। लेकिन पार्टी ने इसे अनधिकृत बताते हुए दोनों को नोटिस दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह UP में BSP से संभावित संपर्क का संकेत हो सकता है। - क्या Congress और BSP का गठबंधन होगा?
अभी कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। Congress की आधिकारिक लाइन SP के साथ गठबंधन की है। लेकिन पार्टी के अंदर एक तबका BSP समेत अन्य दलों को जोड़ने की वकालत कर रहा है। - UP में दलित वोट का 2027 में क्या असर होगा?
UP में दलित वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। BJP, Congress, SP और BSP- सभी इस वोट बैंक को साधने में लगी हैं। दलित वोट जिस भी गठबंधन के साथ जाएगा उसका फायदा 2027 में सीधे दिखेगा।
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स्रोत: Election Commission of India | The Print (10 मार्च 2022) | Business Standard (11 मार्च 2022) | Swarajya Mag (अप्रैल 2022) | Deccan Herald