तीन साल की उम्र में माता-पिता के प्यार का 15 साल बाद भी दिखता है असर, बच्चों के दिमाग पर हुई रिसर्च में खुलासा

Arun Tiwari | Oct 17, 2026, 13:39 IST
बचपन के व्यवहार का किशोर मस्तिष्क पर असर
बच्चों की परवरिश में माता-पिता का प्यार, प्रोत्साहन और व्यवहार कितना महत्वपूर्ण है, इसका असर कई बार वर्षों बाद दिखाई देता है। बच्चे के छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना करना, गलती होने पर उसे डांटने के बजाय समझाना और मुश्किल परिस्थितियों में उसका साथ देना महज अच्छी परवरिश के तरीके नहीं हैं।

इनका संबंध बच्चे के मस्तिष्क के विकास और सकारात्मक अनुभवों को महसूस करने की क्षमता से भी हो सकता है। एक नए शोध में सामने आया है कि तीन साल की उम्र में जिन बच्चों को माता-पिता से अधिक प्यार, सहयोग और प्रोत्साहन मिला, किशोरावस्था में उनके मस्तिष्क ने सकारात्मक परिणाम मिलने पर अपेक्षाकृत मजबूत प्रतिक्रिया दिखाई। शोधकर्ताओं ने बच्चों के शुरुआती जीवन में माता-पिता के व्यवहार का अध्ययन किया और फिर लगभग 15 वर्षों तक उनके विकास पर नजर रखी। यह अध्ययन Communications Psychology में प्रकाशित हुआ है।



बच्चों पर 15 साल तक नजर

शोध का नेतृत्व मनोवैज्ञानिक कायलिन हिल और उनकी टीम ने किया। इसमें बच्चों और उनके माता-पिता के व्यवहार और बच्चों के आगे के विकास का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने शुरुआत में तीन साल के बच्चों के साथ उनके माता-पिता की बातचीत को प्रयोगशाला में देखा। इस दौरान माता-पिता के सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहारों को दर्ज किया गया।



सकारात्मक व्यवहार में बच्चे के प्रति स्नेह दिखाना, उसे सहयोग देना, उसकी कोशिशों को प्रोत्साहित करना और कठिन काम करते समय उसकी मदद करना शामिल था। वहीं कठोर व्यवहार, जरूरत से ज्यादा दखल देना और बच्चे पर अनावश्यक नियंत्रण रखने जैसी गतिविधियों को भी रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद बच्चों के नौ, 12, 15 और 18 वर्ष की उम्र में मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया गया।



इसके लिए इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) तकनीक का इस्तेमाल किया गया जो मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को मापती है।बच्चों को एक अनुमान लगाने वाले खेल में शामिल किया गया, जिसमें उन्हें पैसे जीतने या हारने का परिणाम मिलता था। शोधकर्ताओं ने इस दौरान देखा कि सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम मिलने पर उनके मस्तिष्क की प्रतिक्रिया कैसी थी। अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों को शुरुआती उम्र में अधिक सकारात्मक और कम नकारात्मक व्यवहार का अनुभव हुआ था उनमें किशोरावस्था के दौरान इनाम से जुड़ी मस्तिष्क की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत मजबूत थी।




मस्तिष्क की मजबूत प्रतिक्रिया का क्या मतलब है

मस्तिष्क में एक ऐसी प्रणाली होती है जो व्यक्ति को सफलता, पुरस्कार और दूसरे सकारात्मक अनुभवों पर प्रतिक्रिया देने में मदद करती है। इसका संबंध प्रेरणा, आनंद और किसी काम को दोबारा करने की इच्छा जैसी प्रक्रियाओं से होता है। शोध में जिन बच्चों को माता-पिता से अधिक भावनात्मक सहयोग मिला था उनके मस्तिष्क ने खेल में पैसे जीतने पर अधिक मजबूत प्रतिक्रिया दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती पारिवारिक वातावरण और किशोरावस्था में सकारात्मक अनुभवों को संसाधित करने के तरीके के बीच संबंध हो सकता है।



हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि शोधकर्ताओं ने सीधे तौर पर बच्चों की खुशी को मापा या यह साबित कर दिया कि प्यार करने वाले माता-पिता के बच्चे हमेशा अधिक खुश रहते हैं। अध्ययन में मस्तिष्क की एक विशेष प्रतिक्रिया को मापा गया था। इसलिए इसके निष्कर्षों को इसी संदर्भ में समझना जरूरी है।



बच्चे की गलती पर माता-पिता का व्यवहार है अहम

छोटे बच्चे नई चीजें सीखते समय अक्सर गलतियां करते हैं। कई बार वे किसी खिलौने को जोड़ने, पहेली हल करने या कोई नया काम करने में असफल हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता की प्रतिक्रिया बच्चे के अनुभव को प्रभावित कर सकती है। यदि माता-पिता तुरंत नाराज होकर काम अपने हाथ में ले लेते हैं या बच्चे को उसकी गलती के लिए अपमानित करते हैं, तो बच्चा निराश हो सकता है। इसके विपरीत उसे एक संकेत देना, दोबारा कोशिश करने के लिए प्रेरित करना और उसकी परेशानी को समझना उसके लिए सहयोगपूर्ण वातावरण बना सकता है।



बच्चे को प्रोत्साहित करने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी हर बात मान ली जाए या अनुशासन से समझौता किया जाए। जरूरी यह है कि गलत व्यवहार को सुधारते समय बच्चे का अपमान न हो और उसे यह महसूस कराया जाए कि गलती करना सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।




मानसिक स्वास्थ्य से भी हो सकता है संबंध

शोधकर्ताओं के अनुसार मस्तिष्क की इनाम संबंधी प्रतिक्रिया को समझना मानसिक स्वास्थ्य के अध्ययन में भी उपयोगी हो सकता है। कुछ अध्ययनों में सकारात्मक अनुभवों के प्रति कमजोर प्रतिक्रिया का संबंध अवसाद और आनंद महसूस करने में कठिनाई जैसी समस्याओं से पाया गया है। हालांकि इस शोध से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि माता-पिता का व्यवहार अकेले ही भविष्य के मानसिक स्वास्थ्य को तय करता है।



बच्चों की परवरिश के लिए क्या करें माता-पिता

पारिवारिक इतिहास, तनावपूर्ण अनुभव, सामाजिक परिस्थितियां और पर्यावरण के दूसरे पहलू भी बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि माता-पिता की कभी-कभार होने वाली गलती या गुस्सा बच्चे के भविष्य को हमेशा के लिए खराब नहीं कर देता। अध्ययन शुरुआती परवरिश और बाद के विकास के बीच संभावित संबंध दिखाता है कि किसी बच्चे के भविष्य का निश्चित परिणाम नहीं।




अध्ययन का संदेश यही है कि बच्चों की परवरिश केवल उन्हें सही-गलत सिखाने तक सीमित नहीं है। उन्हें सुरक्षित महसूस कराना, उनकी भावनाओं को समझना और उनकी कोशिशों को महत्व देना भी जरूरी है। शुरुआती वर्षों में मिलने वाला भावनात्मक सहयोग आगे चलकर बच्चे के विकास से जुड़ा हो सकता है हालांकि उसका भविष्य कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।



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