राम मंदिर का चढ़ावा शेयर बाजार में... पुलिस ने खोला करोड़ों का खेल

Rajesh Lahoti | Jul 10, 2026, 20:32 IST
राम मंदिर का चढ़ावा शेयर बाजार में 2026
अयोध्या के राम मंदिर दान पात्र से कथित धन गबन मामले की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार चोरी किए गए पैसे का एक हिस्सा कथित रूप से शेयर बाजार में निवेश किया गया और उसे कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर वैध दिखाने की कोशिश की गई।

अयोध्या में राम मंदिर के दान पात्र से चोरी किए गए धन को शेयर बाजार में निवेश करने और इस घोटाले के पर्दे के पीछे छिपे ताने-बाने ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला केवल एक साधारण चोरी या राशि के गबन का नहीं है, बल्कि यह एक बेहद जटिल, सुनियोजित और शातिराना तरीके से अंजाम दिया गया वित्तीय फ्रॉड है, जिसमें धार्मिक आस्था से जुड़े पैसे को निजी मुनाफे के लिए प्रयोग किया गया। पुलिस और फॉरेंसिक जांच में जो नए तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने इस पूरे घोटाले के नए आयामों को उजागर किया है। इसके तहत अब तक लगभग तीस बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है और आरोपियों के घरों पर लगातार छापेमारी चल रही है।



घोटाले का दायरा

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब अयोध्या में राम मंदिर के डोनेशन फंड के गबन की खबरें सामने आईं। शुरुआत में इसे एक छोटी चोरी के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे अयोध्या पुलिस ने इस मामले की तहकीकात गहराई से शुरू की, इसका दायरा लगातार बढ़ता चला गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि चोरी की गई कैश राशि का एक बड़ा हिस्सा न केवल छुपा कर रखा गया था, बल्कि उसे शेयर बाजार और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर दिया गया था। आरोपियों का मकसद केवल इस पैसे को छुपाना नहीं था, बल्कि इस चोरी के पैसे से एक बड़ा मुनाफा कमाना और लीगल मनी ट्रेल को पूरी तरह से धुंधला कर देना था ताकि जांच एजेंसियां उन तक न पहुंच सकें। अयोध्या पुलिस के मुताबिक, जांच का दायरा अब उन सभी लोगों तक पहुंच गया है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन आरोपियों से जुड़े हुए थे। जांच में यह बात सामने आई है कि घोटाले की राशि को अलग-अलग तरीकों से घुमा कर मुख्य वित्तीय प्रणाली में शामिल करने की कोशिश की गई थी। इसमें सभी आरोपियों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें चोरी का पैसा तुरंत निजी उपयोग में न आकर, पहले फाइनेंशियल मार्केट्स में जाता था ताकि उसपर ऊंचे रिटर्न्स कमाए जा सकें और बाद में उसे सामान्य आय के रूप में दिखाया जा सके।



आरोपियों की पहचान और पुलिस की कार्रवाई

इस पूरे वित्तीय फ्रॉड में कई मुख्य किरदार सामने आए हैं जिन्होंने इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया। लखनऊ और अयोध्या पुलिस की संयुक्त जांच और एक्शन के तहत आरोपी अनुकल्प मिश्रा को उसके घर से हिरासत में लिया गया और उससे कड़ी पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान अनुकल्प मिश्रा ने इस पूरे मामले का खुलासा किया और अपने सह आरोपी अविनाश शुक्ला के नाम को भी उजागर किया। अनुकल्प ने पुलिस को बताया कि उन दोनों ने मिलकर राम मंदिर के दान पात्र से चोरी किए गए पैसे को बहुत ही शातिर तरीके से स्टॉक मार्केट में निवेश किया था। इसके अलावा, पुलिस ने इस मामले में दो और मुख्य आरोपियों लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को भी अपनी हिरासत में लिया है और उन्हें 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस रिमांड के दौरान इन सभी आरोपियों को उनके निवास स्थानों पर ले जाया गया जहां फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में फिर से गहरी छापेमारी की गई। इस दौरान आरोपियों के घरों से कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, मोबाइल फोन और इन्वेस्टमेंट से जुड़े रिकॉर्ड्स बरामद किए गए हैं। पुलिस इन सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को खंगाल रही है ताकि उनके बाकी बचे नेटवर्क्स और उनके माध्यम से किए गए अन्य गैर-कानूनी निवेशों का पता लगाया जा सके।



ऐसे दिया इस फ्रॉड को अंजाम

आरोपियों की मोडस ऑपरेंडी यानी काम करने का तरीका बेहद हैरान करने वाला और शातिराना था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी लोग मंदिर के डोनेशन काउंटिंग रूम में या दान इकट्ठा करने के दौरान बहुत ही छोटी-छोटी मात्रा में कैश निकालते थे ताकि किसी को अचानक से कोई शक न हो और न ही दैनिक ऑडिट में कोई बड़ा अंतर देखने को मिले। इस तरह से धीरे-धीरे करके उन्होंने एक बड़ी राशि इकट्ठा कर ली। जब यह कैश एक बड़ी रकम में बदल गया, तब उन्होंने इसे सीधे अपने अकाउंट्स में जमा करने के बजाय एक दूसरा ही रास्ता चुना। उन्होंने इस चोरी के पैसे को अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और करीबी परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया या फिर उनके नाम पर कैश जमा करवाया। इसके बाद, उन्होंने उस पैसे को उन अकाउंट्स से रूट करके वापस अपने खुद के ट्रेडिंग और ब्रोकरेज अकाउंट्स में मंगवाया। इस पूरे घुमावदार रास्ते का इस्तेमाल इसलिए किया गया था ताकि उनकी घोषित आमदनी और उनके बैंक अकाउंट्स में आने वाले पैसे के बीच का अंतर आसानी से पकड़ा न जा सके। इतना ही नहीं, जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने इस पैसे का एक हिस्सा आम लोगों को मोटे ब्याज पर उधार देने में भी लगाया था, जहां से उन्हें मोटी कमाई हो रही थी। इसके साथ ही, उनके पास से मंदिर की नकली और फर्जी डोनेशन रसीदें भी मिली हैं, जिसका इस्तेमाल शायद वो लोग पैसे के गबन को सही ठहराए जाने के लिए करते थे।



वित्तीय जांच और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स

मामले की गंभीरता और वित्तीय जटिलता को देखते हुए, जांच टीम ने इसमें फॉरेंसिक अकाउंटेंट्स और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की एक पूरी फौज को शामिल किया है। अब तक की जांच में लगभग 30 ऐसे बैंक अकाउंट्स को फ्रीज किया जा चुका है जिनका इस्तेमाल इस घोटाले के पैसे को पार्क करने या रूट करने के लिए किया गया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब इन सभी 30 बैंक खातों के हर एक ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। वो उन सभी बैंकिंग ट्रांजैक्शन्स को आरोपियों के शेयर बाजार के निवेश, प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त और बरामद किए गए कैश से मैच कर रहे हैं। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मुख्य ध्यान अब इस बात पर है कि इस पूरे फाइनेंशियल ट्रेल को फिर से रीकंस्ट्रक्ट किया जाए। इसका मतलब है कि पैसे के निकलने के पॉइंट से लेकर उसके आखिरी निवेश के पॉइंट तक के पूरे रास्ते का एक-एक विवरण निकालना। इसके लिए ब्रोकरेज अकाउंट्स, ट्रेडिंग स्टेटमेंट्स, मोबाइल ट्रेडिंग एप्लिकेशंस और डिजिटल पेमेंट गेटवे के रिकॉर्ड्स को गहराई से खंगाला जा रहा है। फॉरेंसिक अकाउंटेंट्स यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपियों ने किन-किन कंपनियों के शेयर्स खरीदे, किस टाइमिंग पर खरीदे और क्या उन्होंने मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए किसी विशेष ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी का सहारा लिया था।



आय से अधिक संपत्ति और गैरकानूनी मुनाफा

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह जांच अब सिर्फ चोरी हुए कैश को बरामद करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इससे आगे निकल कर उन एसेट्स पर केंद्रित हो गई है जो इस पैसे के बलबूते पर खरीदे गए हैं। जांच में यह साफ दिख रहा है कि आरोपियों और उनके परिवार वालों के पास जो संपत्ति मिली है, वो उनकी वैध और घोषित आमदनी से कहीं ज्यादा है। उनके अकाउंट्स में जो ट्रांजैक्शन हुए हैं, वो उनके इनकम टैक्स रिटर्न और सामान्य कमाई से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते, जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि गैर-कानूनी पैसे को सिस्टम में व्हाइट करने की कोशिश की जा रही थी। इसके साथ ही, इन्वेस्टीगेटर्स अब इस बात का भी पता लगा रहे हैं कि शेयर बाजार में लगाए गए इस पैसे से आरोपियों ने कितना प्रॉफिट कमाया। क्या उस मुनाफे के पैसों को उन्होंने बाजार से निकाल कर कहीं और निवेश कर दिया या फिर उससे नई प्रॉपर्टीज और अचल संपत्ति खरीदी गई। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत फाइनेंशियल मार्केट्स का रुख किया था ताकि उन्हें लगातार रिटर्न्स मिलते रहें और उनका निजी लिविंग स्टैंडर्ड भी हाई हो सके, बिना किसी लीगल स्क्रूटनी के।



कानूनी और सामाजिक पक्ष

राम मंदिर जैसे बड़े और पवित्र संस्थान के साथ इस तरह का विश्वासघात पूरे समाज के लिए एक चिंताजनक विषय है। लाखों-करोड़ों भक्तों की आस्था और उनके द्वारा दान किए गए पैसे का इस तरह से निजी स्वार्थ और स्टॉक मार्केट में उपयोग करना एक गंभीर कानूनी जुर्म के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक अपराध भी है। पुलिस इस मामले में लगातार सख्त धाराएं लगाने की तैयारी में है ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और आगे कोई भी व्यक्ति इस तरह के पवित्र निधियों के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आएगी और फ्रीज किए गए अकाउंट्स के बारे में नए तथ्य उजागर होंगे, इस घोटाले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।



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