बोल हरि बोल: साहब की ससुराल का एमपी प्रेम, कप्तान साहब का गुस्सा और क्रेडिट कार्ड मॉडल

Harish Divekar | Jan 04, 2026, 13:26 IST
bol hari bol 4 january 2026
मध्यप्रदेश में इन दिनों सियासी हलचल और अफसरशाही की गर्मी का दौर जारी है। इंदौर कांड ने प्रदेश की साख पर बड़ा दाग लगाया है और नेताओं-अफसरों का ‘घंटा’ बज चुका है।

मध्यप्रदेश में कश्मीर सी सर्दी है। शीतलहर से पूरा सूबा कंपकंपा रहा है, लेकिन सत्ता, सियासी और अफसरशाही में गर्माहट है। इंदौर कांड ने पूरे प्रदेश की साख पर बट्टा लगा दिया है। नेता-अफसरों का ‘घंटा’ बज गया है। डैमेज कंट्रोल के हथकंडे भी काम नहीं आ रहे हैं।



इन सबके बीच खबर है कि एक आईपीएस अफसर के ससुरालीजनों को मध्यप्रदेश खूब भा गया है। उन्होंने बड़े पैमाने पर जमीन का सौदा किया है। कुछ अधिकारियों के बच्चों के विदेश में मौज कराने का नया मॉडल भी सामने आया है। वहीं, एसआईआर ने सत्तारूढ़ दल की टेंशन डबल कर दी है।



खैर, देश प्रदेश में खबरें तो और भी हैं, पर आप तो सीधे नीचे उतर आईए और बोल हरि बोल के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।



साहब की ससुराल का रियल एस्टेट प्रेम

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डॉक्टर साहब के भाषणों से कितने उद्योगपति निवेश के लिए आए, इसका आंकड़ा भले किसी के पास साफ न हो, लेकिन अफसरों के नातेदार कितने प्रभावित हुए हैं। इसका नमूना जरूर सामने आ गया है।



मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय में ऊंचे ओहदे पर बैठे एक आईपीएस साहब की ससुराल इन दिनों चर्चा में है। वजह कोई छोटी-मोटी नहीं, बल्कि करोड़ों रुपए की जमीन की खरीद की है। साहब की सासू मां, साली साहिबा और साले साहब ने मिलकर मध्यप्रदेश में जमीनों पर हाथ साफ किया है।



खास बात ये है कि साली साहिबा खुद दूसरे राज्य में आईएएस हैं। अब सवाल उठता है कि जब साहब खुद एमपी के मूल निवासी नहीं है, ससुराल का भी मध्यप्रदेश से नाता नहीं तो फिर एमपी में करीब 200 बीघा जमीन खरीदने का इतना शौक अचानक कहां से उमड़ पड़ा? चर्चा है कि इस सौदे में एमपी पुलिस सेवा के एक रंगीले अफसर भी साझेदार बने हैं।



कहा जा रहा है कि ये अफसर आईपीएस के बेहद करीबी हैं, इसलिए धीरे-धीरे ससुराल के भी करीबी हो गए हैं। द सूत्र दस्तावेजों के साथ पूरी कहानी जल्द सामने लाएगा, तब तक आप अंदाजा लगाइए…कौन हैं ये ‘ईमानदार’ साहब, जिनकी ससुराल को एमपी की मिट्टी से इतना प्यार हो गया?



विदेश में मौज कराने का 'नया मॉडल'

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प्रदेश के अफसरों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। यह अब कोई खबर नहीं रही। खबर ये है कि उनकी मौज-मस्ती कैसे चल रही है और उसका बिल कौन चुका रहा है?



सूत्रों की मानें तो सिस्टम के कुछ तेजतर्रार अफसरों ने बच्चों को विदेश में लक्जरी फील देने के लिए नया तरीका खोज निकाला है। तरीका बड़ा सिंपल और उतना ही चतुर है।



अफसर यहां मलाईदार पदों पर बैठकर बड़े ठेकेदारों पर मेहरबानी दिखाते हैं। बदले में ठेकेदार अपने क्रेडिट कार्ड अफसरों के बच्चों के हाथ में थमा देते हैं।



अब समझिए कमाल। बच्चे विदेश में गोल्फ खेल रहे हैं, महंगे रेस्तरां में डिनर कर रहे हैं। ब्रांडेड शॉपिंग और ट्रैवल में करोड़ों उड़ रहे हैं और अफसर साहब को एक रुपए का हिसाब नहीं देना पड़ता। खर्च बच्चे कर रहे हैं, भुगतान कार्ड कर रहा है और जवाबदेही हवा में घुल जाती है।



बताया जा रहा है कि यह अब कोई एक-दो केस नहीं रहा। यह ट्रेंड बनता जा रहा है। हर स्मार्ट अफसर एक-दो ठेकेदार ऐसे सेट कर रहा है, जो विदेश में बच्चों की मौज का पूरा खर्च अफोर्ड कर ले। आप खुद पता लगाइए, कौन से मलाईदार पदों पर बैठे अफसरों के बच्चे विदेश में पढ़ाई के साथ गोल्फ, पार्टी और लक्जरी लाइफ का पूरा पैकेज एन्जॉय कर रहे हैं?



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नेता-अफसरों का ‘घंटा’ बज गया

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कहते हैं, भगीरथ धरती पर गंगा लाए थे, लेकिन इंदौर के भागीरथपुरा में कहानी उलटी निकल गई। यहां गंगा तो आई नहीं, राम तेरी गंगा मैली वाली तस्वीर जरूर सामने आ गई। नतीजा यह हुआ कि 16 लोगों की जान चली गई और पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा हो गया। घटना बड़ी थी, इसलिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मैदान में उतरे। पीड़ितों के साथ खड़े होने की कोशिश की, अफसरों पर गुस्सा भी फूटा, लेकिन असली धमाका तब हुआ, जब झल्लाहट में घंटा वाला बयान मीडिया के माइक्रोफोन में चला गया। बस, यहीं से कहानी ने नया मोड़ ले लिया है।



कहते हैं, उस घंटे की आवाज इतनी तेज थी कि दिल्ली हाईकमान की नींद टूट गई। फिर क्या था, इंदौर से भोपाल तक, छोटे से लेकर बड़े तक, नेता हों या अफसर सबका घंटा बज गया। अफसर निपटाए गए, नेताओं की क्लास अलग से लगी। जो कल तक सीना तानकर चल रहे थे, आज मुंह छिपाते फिर रहे हैं। फिलहाल सवाल यही है कि इस घंटे की घनघनाहट इंदौर की राजनीति में आगे क्या-क्या तोड़ेगी या फिर कुछ दिनों बाद यह आवाज भी बाकी शोर में दबा दी जाएगी?



कप्तान साहब नाराज, महकमे में हड़कंप

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बुंदेलखंड के एक जिले में इन दिनों पुलिस महकमे का तापमान अचानक बढ़ गया है। वजह हैं वहां के पॉवरफुल कप्तान साहब, जिनका मूड अपने मातहतों की एक छोटी सी चूक से बिगड़ गया है। खबर है कि साहब इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने एक झटके में 26 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस थमा दिया। आरोप भी बड़ा दिलचस्प है। दरअसल, इन कर्मचारियों ने पत्राचार में अस्थायी एसपी के नाम के आगे प्रभारी शब्द नहीं लिखा था। बस, यही बात कप्तान साहब को नागवार गुजर गई।



दरअसल, कहानी ये है कि कप्तान साहब 25 दिन की ट्रेनिंग पर थे। इस बीच एक बटालियन के साहब को जिले का अतिरिक्त एसपी प्रभार सौंपा गया, लेकिन कर्मचारियों ने फाइलों और चिट्ठियों में उन्हें सिर्फ साहब लिखा, प्रभारी नहीं। कागजों की यही कमी कप्तान साहब को इतनी बड़ी लगी कि गुस्सा फाइलों से निकलकर नोटिस तक पहुंच गया। अब आलम ये है कि 26 लोग तीन दिन में जवाब तैयार करने में जुटे हैं। कप्तान साहब ने साफ कर दिया है कि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो एकतरफा कार्रवाई तय है।



सियासी मैसेज और करारा जवाब

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राजा साहब की एक पोस्ट ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि अपनों से लेकर विरोधियों तक सब सवाल पूछने लगे हैं। मोदी और आडवाणी की पुरानी तस्वीर शेयर कर संघ और भाजपा संगठन की तारीफ करने पर राजा साहब की निष्ठा पर ही सवाल उठ गए हैं। पार्टी के भीतर फुसफुसाहट शुरू हो गई है और भाजपा ने मौका देखकर खुला ऑफर तक उछाल दिया है।



अब इस मामले में छोटे राजा साहब की भी एंट्री हुई है। उन्होंने सीधे बहस में कूदने के बजाय डैमेज कंट्रोल का सिनेमाई तरीका चुना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर राजा साहब का वीडियो शेयर करते हुए इस पर दमदार वाइस ओवर लगाया है।



डायलॉग है कि बौखला गए हैं, खलबली मच गई है। बेबुनियाद आरोप, मनगढ़ंत स्कैंडल, लेकिन आसमान में थूकने वालों को ये नहीं पता कि थूक पलटकर उन्हीं के चेहरे पर गिरता है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह वीडियो विरोधियों से ज्यादा अपने घर के भीतर उठे सवालों को भी जवाब है। मैसेज साफ है कि राजा साहब अकेले नहीं हैं, परिवार पूरी तरह मैदान में है।



एसआईआर ने डबल की टेंशन

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हर मामले में नंबर वन रहने वाला मध्यप्रदेश इस बार पिछड़ गया है और वजह है एसआईआर। पहले चरण में जैसे ही प्रदेश में 42 लाख वोटर्स के नाम कटे तो सत्तारूढ़ दल की टेंशन डबल हो गई है। मामला इतना गंभीर है कि भोपाल से ज्यादा दिल्ली की नजरें टिक गईं हैं। बताया जा रहा है कि शीर्ष नेताओं की व्यस्तताओं के चलते आमने-सामने की बैठक तो नहीं हो सकी, लेकिन ऑनलाइन मीटिंग कर इस पर मंथन किया गया है। स्क्रीन पर प्रदेश के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे।



मीटिंग में साफ-साफ कहा गया कि पहले चरण में नुकसान हो चुका है, अब दूसरे फेज में कोई ढिलाई नहीं चलेगी। पार्टी वर्कर्स को अलर्ट कर दिया गया है कि 10 जनवरी तक मैदान में उतरिए, लोगों को जागरूक करें, फॉर्म भरवाएं और ज्यादा से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट में वापस जुड़वाएं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या दूसरे फेज में सत्तारूढ़ दल बाजी पलट पाता है या फिर एसआईआर का यह झटका आगे की राजनीति में और बड़े साइड इफेक्ट दिखाएगा?



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