बोल हरि बोल: पर्दे के पीछे हनी ट्रैप की पटकथा, मंत्री महोदया की प्रयोगशाला...कीलन देव और धाकड़ ठेकेदार!
BHOPAL. हर हफ्ते राजनीति और अफसरशाही में बहुत कुछ होता है। कुछ घटनाएं सुर्खियां बनती हैं तो कुछ चर्चाओं में रहती हैं। कहीं किसी बयान की गूंज सुनाई देती है, कहीं किसी फैसले पर सवाल उठते हैं और कहीं छोटी-सी बात बड़े मायने रख जाती है। अब इसी मामले को देख लीजिए। मंत्री महोदया ने अपनी बात रखने के लिए जो तरीके अपनाए हैं, उनकी खूब चर्चा हो रही है।
उधर, मंत्रालय में फिर एक धाकड़ ठेकेदार की धमक महसूस की जा रही है। सबसे खास तो यह है कि विकास-मिकास की बातें छोड़िए...सूबे में फिर हनी-ट्रैप की चर्चा है। पर्दे के पीछे पूरी पटकथा लिखी जा रही है। खैर, देश-प्रदेश में खबरें तो बहुत हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आइए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
ठेकेदार तो सचमुच धाकड़ निकला
मंत्रालय में इन दिनों एक धाकड़ ठेकेदार की तूती बोल रही है। खबर है कि मंत्री और अफसरों की मेहरबानी से करीब 250 करोड़ रुपए का टेंडर नियमों को धता बताते हुए उसकी झोली में डाल दिया गया है। इस टेंडर फाइल में इतने छेद हैं कि पहली नजर में दिखाई दे जाएं, पर शिकायतें बड़े साहब से लेकर जांच एजेंसियों तक पहुंचने के बावजूद किसी ने फाइल पलटकर देखने की जहमत नहीं उठाई है। सबने जैसे मुंह में गुड़ रख लिया और आखिरकार टेंडर मंजूर भी हो गया है। अंदरखाने की मानें तो रानी कमलापति स्टेशन के पास बने एक आलीशान कॉरपोरेट टावर में बैठने वाले एक प्रभावशाली भाईसाहब का हाथ इस ठेकेदार के सिर पर है। बस यही तो बात है कि उसकी राह में फिर कौन कांटे बिछाता?
दिल्ली के बाद अब मुंबई वाली हनी!
मध्य प्रदेश में जल्द ही हनी ट्रैप-3 की पटकथा चर्चा में आ सकती है। पहला अध्याय कमलनाथ सरकार के दौर में भोपाल और सागर की हसीनाओं ने लिखा था। दूसरा अध्याय डॉक्टर साहब की सरकार में दिल्ली की रेशु के नाम रहा है। अब तीसरी किस्त की हीरोइन मुंबई से ताल्लुक रखती है। उसकी अदाओं पर मंत्रालय, पीएचक्यू और मैदान में तैनात कई आईएएस-आईपीएस अफसर फिदा हैं।
फिलहाल मैडम ने नेतानगरी से दूरी बना रखी है और पूरा फोकस अफसरशाही पर है। अभी तक सब कुछ ऑल इज वेल है, इसलिए मामला दबा हुआ है। लेकिन कहते हैं कि जिस दिन उनकी कोई बड़ी डिमांड अधूरी रह गई, उसी दिन हनी ट्रैप-3 का ट्रेलर नहीं, पूरी फिल्म रिलीज हो जाएगी। हमने तो अपना काम कर दिया है, अब आप अपने घोड़े दौड़ाकर पूरी खबर पता कर लीजिए साब!
बड़े साहब के सामने छोटे की किरकिरी!
सड़क बनाने वाले विभाग के प्रमुख सचिव अपने ही मातहतों के भरोसे ऐसी चूक कर बैठे हैं कि बड़े साहब के सामने किरकिरी हो गई। दरअसल, सरकार के प्रमोशन अभियान के तहत विभागीय पदोन्न्ति समिति की बैठक में चीफ इंजीनियरों के प्रमोशन का मामला पहुंचा था। वहां फोल्डर खुले तो सभी 23 अधीक्षण यंत्रियों की सीआर आउटस्टैंडिंग निकली।
जैसे ही फाइलों के भीतर झांका गया तो पता चला कि उनमें से पांच अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच पेंडिंग है। इस पर बड़े साहब ने तुरंत सवाल दाग दिया कि जिसके खिलाफ जांच चल रही हो, उसकी सीआर आउटस्टैंडिंग कैसे हो सकती है? सवाल सुनते ही प्रमुख सचिव सकपका गए। दरअसल, उन्होंने भी अधीनस्थों द्वारा तैयार फाइलों पर भरोसा कर लिया था, लेकिन यह भरोसा इस बार भारी पड़ गया।
प्रमोशन खुले तो सबकी निकल पड़ी!
प्रदेश में अरसे बाद प्रमोशन का रास्ता खुला तो प्रमोट होने वालों से ज्यादा विभागों के मंत्री और अफसरों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है। वर्षों से रुके प्रमोशन के कारण कई कर्मचारियों ने न सीआर की चिंता की और न विभागीय जांच की।
अब जैसे ही पदोन्नति की खिड़की खुली तो रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए मंत्री और अफसरों के दरबार सजने लगे हैं। कई जगह तबादलों के बाद अब प्रमोशन के नाम पर भी जमकर चांदी काटी जा रही है। एक मंत्री के पीए की तो खास चर्चा है, जिसने मोटी दक्षिणा लेकर पांच-पांच साल से लंबित विभागीय जांच दो दिन में निपटवा दी और प्रमोशन का रास्ता भी साफ करा दिया है।
चढ़ावा चढ़ाइए, काम बन जाएगा...
भारी-भरकम विभाग वाले मंत्रीजी की छवि बाहर से जितनी साफ-सुथरी दिखती है, अंदरखाने उतनी ही दिलचस्प कहानियां सुनाई देती हैं। कहा जाता है कि कितना भी उलझा मामला हो, समाधान तय है। बस इसके लिए पहले कीलन देव में चढ़ावा चढ़ाना होता है। यहां मंत्रीजी के भाई का पार्टनर अपना अलग दरबार लगाकर बैठा है।
उसकी पर्ची जैसे ही मंत्री जी के बंगले तक पहुंचती है, संबंधित अधिकारी का काम भी रफ्तार पकड़ लेता है। दिलचस्प बात यह है कि मंत्रीजी को अपने भाई से ज्यादा भरोसा उसी पार्टनर पर है। वर्षों की साझेदारी में उसने हिसाब-किताब का ऐसा भरोसा बनाया है कि आज तक एक पैसे की शिकायत भी सुनने को नहीं मिली है।
जाति की चाशनी में फंस गईं मंत्री जी!
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी इन दिनों अपने बयान से ज्यादा उसकी सफाई को लेकर चर्चा में हैं। जितनी सफाई दे रही हैं, उतने ही नए सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, विवाद उनके उस बयान से शुरू हुआ है, जिसमें अनुसूचित जाति से जुड़े अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि आज भी ब्राह्मण और ठाकुर सहित उच्च जातियों के लोग बागरी समाज के घर का पका भोजन नहीं करते। इस पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि पूरे समाज को इस तरह कैसे कटघरे में खड़ा किया जा सकता है।
बयान पर घिरने के बाद मंत्री जी सोशल मीडिया पर सफाई देने उतरीं। दिलचस्प बात यह रही कि अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने तीन गिलासों के साथ पूरा डेमो ही पेश कर दिया। चाय, कॉफी और ग्रीन टी के सहारे उन्होंने अपनी दलील समझाने की कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी सफाई से ज्यादा उसी प्रयोगशाला की चर्चा शुरू कर दी।
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