10,000 से अधिक छात्राओं ने पास की जेईई एडवांस्ड 2026, ​इतिहास में पहली बार!

Jageshwar prasad | Jun 02, 2026, 14:11 IST
Photograph: (the sootr)
इस बार जेईई एडवांस्ड 2026 में हमारी बेटियों ने अपना जबर्दस्त दमखम दिखाया है। परीक्षा में 10 हजार से अधिक छात्राओं ने पहली बार सफलता हासिल की है।

ऐसे समझें बेटियों की सफलता को 5 पाइंट्स में

  • इस बार JEE Advanced 2026 में 10,000 से अधिक छात्राओं ने सफलता हासिल की।
  • 2019 के बाद JEE Advanced पास करने वाली लड़कियों की संख्या में 89 प्रतिशत उछाल।
  • बेटियों की सफलता का आंकड़ा 5,356 से बढ़कर सीधे 10,107 पर पहुंच गई है।
  • इस बार 56,000 छात्र-छात्राओं ने क्वालीफाई कर कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) में जगह बनाई।
  • ​IITs में लड़कियों की संख्या में सुधार के लिए 2018 में सुपरन्यूमरेरी सीट स्कीम शुरू की गई।

News In Detail

देश में आईआईटी और शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाने वाली JEE Advanced 2026 में 10,000 से अधिक छात्राओं ने सफलता का परचम लहराया है। आंकड़ों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया कि परीक्षा देने वाली हर चार में से एक छात्रा ने इस परीक्षा को क्रैक किया है, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।



​आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि साल 2019 के बाद से अब तक JEE Advanced पास करने वाली लड़कियों की संख्या में करीब 89 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। यह संख्या 5,356 से बढ़कर सीधे 10,107 पर पहुंच गई है। इसी दौरान परीक्षा में बैठने वाली छात्राओं की संख्या भी लगभग 22% बढ़ी है। यानी यह संख्या 33,249 से 40,562 हो गई है।



​सोमवार को जारी हुए नतीजों के मुताबिक परीक्षा में शामिल हुईं 40,562 छात्राओं में से 24.9 प्रतिशत ने बाजी मारी है। इस बार लगभग 56,000 छात्र-छात्राओं ने क्वालीफाई कर कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) में अपनी जगह बनाई है।



अब इनमें से कितनी छात्राओं को IIT की सीट मिलेगी, यह उनकी रैंक और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। देश के सभी 23 IIT मिलकर कुल मिलाकर लगभग 20,000 सीटों की पेशकश करते हैं।



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​सीट न भी मिले, तो रास्ते और भी

जो छात्राएं IIT की मुख्य रेस में पीछे रह जाएंगी, उनके लिए भी राहें बंद नहीं हुई हैं। वे देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे NIT (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) या IIIT (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) में आसानी से सीट हासिल कर सकती हैं।



​विशेषज्ञों ने 10,000 के इस जादुई आंकड़े को STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, और मैथ्स) शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।



​सुपरन्यूमरेरी (अतिरिक्त) सीटों का मास्टरस्ट्रोक

​IITs में लड़कियों की कम संख्या को सुधारने के लिए 2018 में सुपरन्यूमरेरी सीट स्कीम (विशेष अतिरिक्त सीटें) शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य पांच साल के भीतर लड़कियों का दाखिला 20% तक ले जाना था।



​साल 2018 में परीक्षा में शामिल होने वाली लड़कियों में से केवल 13.47% ही क्वालीफाई हो पाई थीं। ​लेकिन इस योजना के बाद से लड़कियों की सफलता दर लगातार बढ़ती गई।


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आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर और 2018 में JEE-Advanced के आयोजन चेयरमैन रहे शलभ का कहना है कि सरकार द्वारा तय किए गए 20% के लक्ष्य को पार करके हमारी बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि वे IIT जैसे कड़े माहौल में भी सफलता के झंडे गाड़ने का पूरा दम रखती हैं।



​बदल रहा है समाज, बदल रही है इंजीनियरिंग

​आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर दीपांकर चौधरी (2015 में इस परीक्षा के वाइस-चेयरमैन थे) का कहना है कि यह बदलाव केवल नंबर का नहीं है, बल्कि समाज की सोच का है। अब परिवार बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बेटियों को उनके मनपसंद करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।



​इंजीनियरिंग की पढ़ाई का स्वरूप भी अब बदल चुका है। मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग जैसी ​पारंपरिक ब्रांचों को पहले शारीरिक रूप से अधिक थका देने वाला माना जाता था। कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी आधुनिक ब्रांचों में हमेशा से छात्राओं की रुचि ज्यादा रही है।



अब IITs में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, एनर्जी एंड एनवायरनमेंट के साथ-साथ फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में बीएस (बैचलर ऑफ साइंस) जैसे नए प्रोग्राम्स आ चुके हैं। इससे छात्रों के पास चुनने के लिए विकल्पों की भरमार है।



आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक और वर्तमान में बिट्स पिलानी के वाइस-चांसलर प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने बताया कि इस बदलाव से एक बेहतरीन पीयर इफेक्ट (सहेलियों को देखकर मिलने वाली प्रेरणा) पैदा हुआ है। जब एक लड़की IIT पहुंचती है तो उसे देखकर कई और लड़कियों के सपने उड़ान भरने लगते हैं!



FAQ

  1. JEE Advanced 2026 में लड़कियों की सफलता की क्या स्थिति रही?
    JEE Advanced 2026 में 10,000 से अधिक छात्राओं ने सफलता प्राप्त की। यानी परीक्षा देने वाली हर चार में से एक छात्रा ने इस परीक्षा को क्रैक किया है। साल 2019 के बाद से JEE Advanced पास करने वाली लड़कियों की संख्या में करीब 89 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। यह संख्या 5,356 से बढ़कर सीधे 10,107 पर पहुंच गई है।
  2. आईआईटी में लड़कियों की संख्या में सुधार के लिए क्या कोई प्रयास हुए?
    IITs में लड़कियों की कम संख्या को सुधारने के लिए 2018 में सुपरन्यूमरेरी सीट स्कीम (विशेष अतिरिक्त सीटें) शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य पांच साल के भीतर लड़कियों का दाखिला 20% तक ले जाना था। साल 2018 में परीक्षा में शामिल होने वाली लड़कियों में से केवल 13.47% ही क्वालीफाई हो पाई थीं। लेकिन इस योजना के बाद से लड़कियों की सफलता दर लगातार बढ़ती गई।
  3. क्या आईआईटी में लड़कियों के प्रवेश को लेकर सामाजिक सोच बदल रही है?
    विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल नंबर का नहीं है, बल्कि समाज की सोच का है। अब परिवार बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बेटियों को उनके मनपसंद करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई का स्वरूप भी अब बदल चुका है।

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